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क्रिप्टोकरेंसी के नियमन से क्यों बच रही है सरकार

बैंक में बचत रखने पर सही रिटर्न प्राप्त होता नहीं दिख रहा। फलत: निवेशक निजी क्रिप्टोकरेंसी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अगर यह प्रवृत्ति बढ़ी, तो बैंकिंग सिस्टम के समक्ष संकट और भी गहरा हो जाएगा। सरकार लोगो को सुरक्षित निवेश का ऐसा रास्ता उपलब्ध कराए, जिससे बैंकिंग सिस्टम भी मजबूत हो।

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Why the government is avoiding regulation of cryptocurrency

Why the government is avoiding regulation of cryptocurrency

राहुल लाल
(आर्थिक मामलों के जानकार)

केंद्रीय बजट में वित्तमंत्री ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दो बड़ी घोषणाएं की हैं। वित्तमंत्री के अनुसार आरबीआइ ब्लॉकचेन और आधुनिक टेक्नोलॉजी से सुसज्जित सरकारी क्रिप्टोकरेंसी 'डिजिटल रुपी' जारी करेगी। इसके साथ ही वित्तमंत्री ने क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर 30 फीसदी की दर से टैक्स लगाया है। वर्तमान क्रिप्टोकरेंसी का उद्भव 2008 की आर्थिक मंदी के समय केंद्रीय बैंक एवं सरकार से मुक्त मुद्रा के रूप में हुआ था। एक तरह से सरकारी नियंत्रण से मुक्ति ही इसकी शक्ति है, लेकिन बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसियों ने वैश्विक तौर पर जो लोकप्रियता प्राप्त की, उससे अब सरकार समर्थित क्रिप्टोकरेंसी का विकल्प सामने आ रहा है। यह कितना स्वीकार्य होगा, यह भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है। युवाओं के आकर्षण को देखते हुए सरकारी क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च करने का निर्णय स्वागतयोग्य है।

वित्त मंत्री की दूसरी घोषणा पर सवाल उठ रहा है। क्रिप्टोकरेंसी से आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जा रहा है। प्रश्न यह है कि क्या सरकार ने प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी की आय को कर दायरे में लाकर इसे वैध बना दिया है? हालांकि बजट भाषण के बाद वित्त मंत्री ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि कर लगाना निजी क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देना नहीं है। वित्त मंत्री के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी पर केवल टैक्स लगाया है, उसे वैध घोषित नहीं किया गया है। क्रिप्टोकरेंसी पर इस उलझन के कई कारण हैं। आरबीआइ का रवैया निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर शुरू से ही काफी कठोर रहा है।

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आरबीआइ ने इसे हमेशा हतोत्साहित करने का प्रयास किया है। इसके बावजूद भारत में क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों की संख्या 10 करोड़ है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई भी रेगुलेशन नहीं है। शीतकालीन सत्र में 'द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल-2021" संसद में पेश करने की योजना थी। इस विधेयक में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध का प्रस्ताव है,परंतु यह विधेयक फिलहाल टला हुआ है।

निजी क्रिप्टोकरेंसी में भारतीयों ने लगभग 10 लाख करोड़ निवेश किया है। सरकार के समक्ष चुनौती है कि इन निवेशकों के निवेश को सुरक्षित कैसे किया जाए? साथ ही निजी क्रिप्टोकरेंसी में भविष्य में निवेश को हतोत्साहित कैसे किया जाए? बजटीय घोषणा से स्पष्ट है कि सरकार निजी क्रिप्टोकरेंसी को भले ही मुद्रा के रूप में स्वीकार नहीं कर रही है, परंतु निवेश के लिए स्वीकार करती नजर आ रही है।

अगर इस मामले में सरकार ने संतुलित दृष्टि से कदम नहीं उठाया, तो इससे हमारा बैंकिंग तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। क्रिप्टोकरेंसी में युवाओं के आकर्षण का मुख्य कारण रातोंरात निवेश में अप्रत्याशित वृद्धि की इच्छा है। उदाहरण के लिए बजट में क्रिप्टोकरेंसी घोषणाओं के बाद बिटकॉइन के दाम 71,981 रुपए तक बढ़ गए।

निजी क्रिप्टोकरेंसी के निवेश को कर दायरे में लाने से बैंकों में बचत को रखने की प्रवृत्ति हतोत्साहित हो सकती है। केंद्र सरकार के महत्त्वाकांक्षी 'सुकन्या समृद्धि योजना' हो या 'वरिष्ठ नागरिक बचत योजना', इन सभी योजनाओं पर ब्याज दरों में प्राय: कटौती की जा रही है। बैंक में बचत रखने पर सही रिटर्न प्राप्त होता नहीं दिख रहा। फलत: निवेशक निजी क्रिप्टोकरेंसी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अगर यह प्रवृत्ति बढ़ी, तो बैंकिंग सिस्टम के समक्ष संकट और भी गहरा हो जाएगा।

सरकार लोगो को सुरक्षित निवेश का ऐसा रास्ता उपलब्ध कराए, जिससे बैंकिंग सिस्टम भी मजबूत हो। सरकार को जल्द ही क्रिप्टोकरेंसी के नियमन से संबंधित कानून का निर्माण करना चाहिए, नहीं तो क्रिप्टोकरेंसी साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और डेटा प्रोटेक्शन की चुनौतियों में और भी वृद्धि कर सकता है।

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