
शी जिनपिंग का वॉल स्ट्रीट को संकेत, मौलिक स्तर पर खेल बदल चुका
जोश रोजिन, (स्तम्भकार द वॉशिंगटन पोस्ट)
हाल ही शी जिनपिंग ने वॉल स्ट्रीट को धक्का पहुंचाने के लिए चीन की उस बड़ी टैक कंपनी के खिलाफ दमनचक्र चलाया, जिसमें अमरीकी निवेशकों ने कई बिलियन डॉलर का निवेश किया ही था। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद वॉल स्ट्रीट के चीन समर्थकों ने अंतत: स्वीकार ही लिया कि मौलिक स्तर पर खेल बदल चुका है।
गोल्डमैन सैक, जेपी मॉर्गन व मॉर्गन स्टेनली द्वारा न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर चीनी राइडिंग एप डिडि जशिंग का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आइपीओ) लांच किए जाने के दो दिन बाद ही 2 जुलाई को चीनी नियामकों ने कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। डेटा सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे एप स्टोर से हटा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि आइपीओ की लिस्टिंग के थोड़ी देर बाद ही इसके स्टॉक की कीमत 30 प्रतिशत गिर गई, जबकि निवेशक, अधिकांश अमरीकी, 4.4 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुके थे। इसके बावजूद आइपीओ लाने वाली वॉल स्ट्रीट फम्र्स ने लाखों डॉलर की फीस वसूल ही ली।
वॉल स्ट्रीट जानकारों को संभवत: पहली बार एहसास हुआ कि वे अमरीकियों को चीनी टैक फर्म में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर मूर्खता कर रहे थे। सीएनबीसी के एंकर जिम क्रेमर जो पहले डिडि के शेयर खरीदने की बात कर रहे थे, अब कह रहे हैं कि 'अगर अब भी आप चीनी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो आपबेवकूफ हैं।' अमरीका में पूंजी जुटाने वाली चीनी कंपनियों का ऑडिट नहीं हो सकता। अब जबकि चीन उन पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए दृढ़ है, उनकी स्वतंत्रता के दावे भरोसे लायक नहीं हैं। 'चाइनाज विजन ऑफ विक्ट्री' के लेखक जॉनथन डी.टी. वार्ड के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के बड़ी टैक कंपनियों पर कसते शिकंजे की वजह कंपनियों के स्वतंत्रता के भाव को खत्म करना ही नहीं, बल्कि उन्हें बीजिंग के रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप कामकाज के लिए बाध्य करना भी है। चीनी कंपनियों की शून्य पारदर्शिता, जवाबदेही और सीपीसी से शून्य स्वतंत्रता से स्पष्ट है कि उनमें निवेश देश और निवेशकों दोनों के लिए नुकसानदेह है।
Published on:
10 Jul 2021 09:26 am
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