
अमीर लोग बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और जीवनशैली के लिए पलायन करते हैं। टैक्स हेवन्स में निवेश और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारण भी उन्हें देश छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
अमीर लोग अपने बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा की तलाश में अक्सर विदेशों में पलायन करते हैं। वहाँ विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय और संस्थानों में अध्ययन की सुविधा होती है। वे स्वयं भी नए कौशल और पेशेवर विकास के लिए विदेशी संस्थानों का रुख करते हैं।
टैक्स चोरी या किसी अपराध में पकड़े जाने और अपने आपको कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए लोग देश से पलायन का फैसला लेते हैं।
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, लिंग आधारित भेदभाव और एकपक्षीय महिला कानूनों के कारण प्रतिवर्ष 1.64 लाख युवा पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं। महिलाओं के लिए दर्जनों कानून, आयोग, और हेल्पलाइनों के विपरीत, पुरुषों के लिए बचाव के कोई साधन नहीं हैं। ऐसे हालात अमीर और शिक्षित वर्ग को देश छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं।
शिक्षित और अमीर वर्ग एक संतुलित और उच्च स्तरीय जीवन जीने के लिए विदेशों की ओर आकर्षित होता है। मीडिया और राजनेताओं द्वारा विदेशों को बेहतर प्रस्तुत करना भी इसका एक बड़ा कारण है।
अमीर लोग बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और जीवनशैली के लिए पलायन करते हैं। टैक्स हेवन्स में निवेश और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारण भी उन्हें देश छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
देश की कर प्रणाली और रिश्वतखोरी छोटे व्यवसायियों को इतना परेशान करती है कि वे विदेशों में अपना व्यवसाय स्थापित करना बेहतर समझते हैं।
बेहतर जीवन स्तर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को विदेशों की ओर खींचती हैं। देश में इन बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और सुधार आवश्यक है।
विदेशों में कानूनी प्रक्रियाएं सरल और तेज होती हैं, जबकि हमारे देश में उद्यम स्थापित करने में अत्यधिक समय और जटिलता लगती है।
देश में रोजगार की कमी के कारण लोग पलायन करते हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति बेहतर होने पर वे लौट आते हैं।
उच्च जीवन स्तर, स्वास्थ्य सुविधाएं, और रोजगार के बेहतर अवसर लोगों को विदेशों की ओर आकर्षित करते हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए तकनीकी उन्नति और रोजगार के अवसरों का सृजन आवश्यक है।
Published on:
12 Jan 2025 12:55 pm
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