
मोबाइल से बने दूरी
सबसे पहले विद्यार्थियों को मोबाइल से दूरी बनाने के लिए भावनात्मक रूप से समझाया जाए। स्कूल व कॉलेजों में स्वस्थ रहने के लिए खेलों का महत्व बताएं। आसपास के प्रसिदृध खिलाडियों से प्रेरणा दिलवाएं। खिलाडियों, जैसे मिल्खा सिंह,सचिन तेंदुलकर, दारा सिंह की जीवनी से संबंधित फिल्में, कथाएं, कहानियां आदि सुनाई व दिखाई जाएं, जिससे वे प्रेरित हों।
—सुधा आचार्य, बीकानेर
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विद्यार्थियों के लिए कोच की व्यवस्था हो
खेलों को भी प्रत्येक विद्यार्थी के लिए शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाया जाए। खेलों के प्रशिक्षण के लिए उच्च स्तर के कोच की व्यवस्था हो। खेलों के प्रति आकर्षण जगाया जाए। खेलों में भेदभाव न हो, उसमें राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। खेलों से विद्यार्थियों का समुचित विकास होता है। खेल भावना विकसित की जाए।
— आशुतोष शर्मा, जयपुर
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समाज में खेलों के महत्व को मिले बढ़ावा
व्यक्ति बचपन से ही खेल कूद में रुचि रखता है। पढ़ाई में बढते कॉम्पीटिशन ने बच्चों को खेलों से दूर कर दिया है। समाज में भी शारीरिक श्रम की अपेक्षा बौद्धिक श्रम को अच्छा समझा जाता है। माता पिता की रोक, कैरियर की चिंता आदि से खेलकूद को दुश्मन समझ लिया है। बच्चे चाहकर भी अपना मन मार लेते हैं। इसलिए समाज में ऐसा वातावरण तैयार किया जाए कि खेलकूद का भी जीवन में बहुत महत्व है।
— वेन्या, बीकानेर, राजस्थान
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खेलों को राजनीति से दूर रखा जाए
खेल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनें। अच्छे कोच उपलब्ध हों। खेलों में भाग लेने पर अतिरिक्त अंक दिए जाएं। इसे राजनीति से दूर रखें और खेल जीवन शैली का हिस्सा बने। छात्रों को प्रोत्साहित करने में माता-पिता और अध्यापक का महत्वपूर्ण स्थान है।
— नरपत सिंह चौहान, जैतारण, पाली
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खेलों में पर्याप्त सुविधाएं दी जाएं
विधार्थियों में खेल-कूद के प्रति आकर्षण बढाने के लिए विधार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलें। खेल सामग्री व श्रेष्ठ प्रशिक्षण दिया जाए। कई तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित हों। विद्यार्थियों के साथ उनके परिवार वालों को भी जोडा जाए, जिससे वे खेलों के प्रति आकर्षित हों। खेलों के महत्व को समझाया जाए। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विधार्थियों व खेल प्रतिभा को सरकारी सेवा में अतिरिक्त अंक मिलें।
—सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
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खेलकूद हो अनिवार्य विषय
विद्यार्थियों मेंं खेलकूद के प्रति आकर्षण बढाने के लिए स्कूल,, कालेजों में खेलकूद एक अनिवार्य विषय हो। समय— समय पर हर स्तर के शिक्षा संंस्थानों मेंं इनामी खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए ।
— ओमप्रकाश श्रीवास्तव, उदयपुरा मध्यप्रदेश
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स्कूल—कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताओं को मिले बढ़ावा
विद्यालय में खेल के लिए योग्य व कुशल प्रशिक्षक हों। विद्यार्थियों में उनके रुचि के अनुसार खेल में शामिल करे जिससे वो अपने खेल में पारंगत हो सके। समय समय पर विद्यालय में खेलों का आयोजन हो, जिससे विद्यार्थी प्रतियोगिता में भाग ले सके। विजेता को प्रोत्साहित किया जाए। उसे आगे के लिए अवसर मिलें।
—दिलीप शर्मा, भोपाल, मध्यप्रदेश
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सर्वांगीण विकास में जरूरी है खेल
व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में जितना जरूरी अध्ययन है, उतना ही आवश्यक शारीरिक सौष्ठव भी होता है। खेल कूद को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सरकारी नौकरी तथा योजनाओं के साथ ही निजी क्षेत्र को भी खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने के नियम होने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में खेल कूद के प्रति रुचि बढ़े।
— विवेक रंजन श्रीवास्तव, भोपाल
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योग्य व अनुभवी खेल शिक्षक हों
विद्यार्थियों के लिए खेल का मैदान होना जरूरी है। साथ ही योग्य व अनुभवी खेल शिक्षक का होना जरूरी है। खेल को एक विषय अवश्य रूप से पढ़ाना चाहिए। छुट्टियों में भी विशेष खेलों की बारीकी सिखानी होगी ।
— साजिद अली, इंदौर
Published on:
21 May 2024 05:31 pm
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