
युवाओं की क्षमता व रुचि के अनुसार हो शिक्षा
युवाओं को आवश्यक तकनीकी कौशल, व्यावसायिक कौशल एवं सॉफ़्ट कौशल (जैसे संचार कौशल,सामूहिक कार्य, समस्या समाधान,आदि) पर विशेष ज़ोर देने की आवश्यकता है| युवाओं को उनकी क्षमता, रुचि एवं योग्यता के आधार पर रोजगार का चयन करने हेतु मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए | तभी देश की और स्वयं की प्रगति हो पाएगी |
— सुमन चौधरी अध्यापक, भरतपुर (राजस्थान)
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समय के साथ परिवर्तन आवश्यक
हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में किताबी ज्ञान को अधिक महत्व दिया गया है। वर्तमान में इसके साथ साथ अपने कौशल, नई टेक्नोलॉजी में भी निपुणता हासिल करनी होगी, जिससे रोज़गार पाने की स्पर्धा में हम दूसरों से एक क़दम आगे रहे।
— शुभम् सिंह ठाकुर, धार मध्य प्रदेश
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रोजगारपरक शिक्षा की उपलब्धता हो
वर्तमान शिक्षा प्रणाली के अधिकांश पाठ्यक्रम सैद्धांतिक हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी है। सरकार ने कौशल विकास योजनाओं और नई शिक्षा नीति के माध्यम से सुधार की दिशा में कदम उठाए हैं। उद्योगों की जरूरत के अनुसार सिलेबस को बदलने की जरूरत है। शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने की महती आवश्यकता है।
— सुखराम कश्यप, बस्तर (छत्तीसगढ़)
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सैद्धांतिक की बजाय व्यावहारिक कौशल व तकनीकी दक्षता पर हो जोर
आज की शिक्षा प्रणाली युवाओं को रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार नहीं कर पा रही है। अधिकांश पाठ्यक्रम सैद्धांतिक ज्ञान पर केंद्रित हैं, जबकि व्यावहारिक कौशल, तकनीकी दक्षता और उद्यमिता को नजरअंदाज किया जाता है। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रमों में सुधार, इंटर्नशिप और स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि युवा प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बन सकें।
– इशिता पाण्डेय, जयपुर।
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शिक्षा प्रणाली में सिर्फ परीक्षाओं पर ही ध्यान केंद्रित
देश के युवा शिक्षित होते हुए भी बेरोजगार हैं। शिक्षा प्रणाली उन्हें रोजगार के लिए तैयार करने में विफल रही है| शिक्षा प्रणाली में सिर्फ परीक्षाओं पर ध्यान देने की बजाय युवाओं के व्यावहारिकता व कौशलता पर भी ध्यान देने की जरूरत है| शिक्षा में आवश्यक सुधार किए जाएं तो युवा आत्मनिर्भर बन पाएंगे। उन्हें आजीविका के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने की भी जरूरत है।
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वर्तमान शिक्षा प्रणाली बेरोजगार युवाओं की फौज कर रही तैयार
देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली युवाओं को रोजगार के लिए तैयार नहीं कर पा रही है। वोट मांगते समय नेता युवाओं को अनेक तरीके से रोजगार देने के आकर्षक झुनझुने देते हैं। लेकिन सरकार बनने के बाद खानापूर्ति करके वाहवाही बटोरने में लग जाते हैं। सरकारी नौकरियां तो ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। सरकारी नौकरी की प्रतियोगी परीक्षाओं में जो सवाल आते हैं, उन्हें किसी भी यूनीवर्सिटी के कोर्स में नहीं पढ़ाया जाता । नौकरियां सीमित है इसलिए युवा वर्ग को नए उद्यम लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिए
—आनन्द सिंह राजावत, देवली कला, पाली राजस्थान
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Updated on:
19 Apr 2025 03:12 pm
Published on:
19 Apr 2025 03:11 pm

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