
आपकी बात, ऑनलाइन ठगी की घटनाओं पर अंकुश कैसे लग सकता है?
अनजान लिंक पर क्लिक न करें
ऑनलाइन ठगी की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ठग मैसेज के जरिए कुछ अंजान लिंक भेजते हैं। उपहार का झांसा दे कर फंसाने की कोशिश करते हैं। आपको इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए और न ही लिंक क्लिक करना चाहिए। इसके अलावा पब्लिक वाइफाइ ट्रांजेक्शन से बचें, ओ.टी.पी. भी किसी से शेयर न करें और सिर्फ प्रमाणित एप ही डाउनलोड करें। फिर भी आपके साथ ठगी हो जाती है, तो शिकायत दर्ज कराएं।
-मिलिंद मिश्रा, जयपुर
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वेरिफाइड साइट पर ही सर्च करें
तकनीक कार्य को गति प्रदान करने के साथ - साथ कार्य में सुगमता भी लाती है, लेकिन लापरवाही हानि भी पहुंचा सकती है। जिस प्रकार सिक्के को दो पहलू होते हैं, उसी प्रकार इंटरनेट के भी दो पहलू हैं लाभ और हानि। ऑनलाइन कार्य करते समय इन दोनों पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए। जैसे - किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले हमें उसके सोर्स का पता होना चाहिए। ऑनलाइन कार्य वेरिफाइड साइट पर ही करने चाहिए। बैंक से संबंधित ऑनलाइन कार्य करते समय किसी भी अनावश्यक लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। ओटीपी नंबर शेयर करने से बचना चाहिए। ऑनलाइन खरीदारी में भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
-ज्योतिरादित्य शर्मा लाडवा, नागौर
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पुलिस की सक्रियता जरूरी
ऑनलाइन ठगी से निपटना बहुत ही आसान काम है, लेकिन पर्याप्त सतर्कता और जांच के अभाव में अपराधी लोगों को ठग रहे हैं। कई तरह के प्रपंच करके वे लोगों की पूंजी को लूट रहे हैं। ऑनलाइन संबंधित अपराध करने वाले बदमाशों के भी बैंक के खाते होते हैं। अगर कोई भी अपराधी ऑनलाइन के माध्यम से ठगी कर रहा है, तो राशि वह किसी खाते में ही ट्रांसफर करेगा। यूपीए ट्रांजेक्शन के माध्यम से पता खाते के बारे में पता लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है। अगर पुलिस और सम्बधित विभाग ध्यान दें, तो कुछ ही घंटों के अंदर अपराधी पुलिस की गिरफ्त में आ सकते हैं।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्यप्रदेश
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नई व्यवस्था जरूरी
ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए सभी बैंकों और ई-कॉमर्स शाखाओं को मिलकर एक इंटरकनेक्ट प्लेटफॉर्म लॉन्च करना चाहिए और ऐसे प्लेटफॉर्म की प्रत्येक उपभोक्ता के पास हेल्पलाइन कनेक्टिविटी होनी चाइए। जिस पर सूचना करते ही तुरंत फ्रॉड किए हुए पैसों को होल्ड किया जा सके और ऐसे प्लेटफॉर्म को पुलिस के साथ भी साझा किया जाना चाइए।
-शैलेष कुमार महर, टोडाभीम, करौली
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जल्दबाजी न करें
वर्तमान में हो रही ऑनलाइन ठगी कोई नई बात नहीं है। वर्षों से हमारे समाज में ठगी होती आई है, बस उनका तरीका बदल जाता है। आज के समय में यदि हमें ठगी से बचना है, तो हमे डिजिटल जागरूक होना होगा। यह सुनिश्चित करें कि क्या हम सही व्यक्ति को जानकारी दे रहे है? जानकारी देने में किसी भी प्रकार की जल्दी आपको ठगी का शिकार बना सकती है।
-अंकुर माहेश्वरी, किशनगंज, बारां
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जानकारी साझा न करें
इंटरनेट का प्रयोग करते समय बैंक में दिए गए मोबाइल नंबर और बैंक से लिंक मेल आइडी की जानकारी साझा न करें। साथ ही किसी अनजान कॉल से बैंक से रिलेटेड जानकारी मांगे जाने पर कॉल तुरंत डिस्कनेक्ट करें।
-अरुण कुमार, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
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गूगल सर्च में सावधानी बरतें
सभी व्यक्ति सावधानी बरतें एवं अकाउंट से जुड़ी सूचनाएं कहीं भी शेयर नहीं करें। साइबर अपराधियों का कॉल आने या मेल प्राप्त होने पर उसका कोई रिप्लाई नहीं दें। बैंकिंग सेवाओं के मामले में कस्टमर केयर नंबर या बैंक की वेबसाइट को गूगल पर सर्च करते समय विशेष सावधानी बरतें ताकि साइबर अपराधियों द्वारा डाले गए फर्जी कस्टमर केयर नंबर या वेबसाइट के चंगुल में न फंसे। इस तरह थोड़ी सी सावधानी रखने से ऑनलाइन ठगी की घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत साइबर थाने या संबंधित शाखा में शिकायत दर्ज कराएं।
-राजेश कुमार, शाहपुरा भीलवाड़ा
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नागरिक रहें जागरूक
जनता की मेहनत की कमाई को डिजिटल अपराध की भेंट चढ़ने से रोकने के लिए नागरिक स्वयं डिजिटल साक्षर हों। अपराध होने पर पुलिस कड़ी कार्रवाई करे। ऐसा होने पर ही ऑनलाइन ठगी पर लगाम लग सकती है।
-कुंजबिहारी गोचर, बारां
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साइबर टीम जरूरी
ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए एक क्विक रिएक्शन साइबर टीम का गठन करना आवश्यक है। शिकायत आसानी से दर्ज करने की व्यवस्था हो और ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय भी लगातार बताएं जाएं।
-निखिल निम्बोरे, इंदौर
Published on:
28 Jul 2022 04:24 pm
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