28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ओलिंपिक गोल्ड मेडेलिस्ट कर रहा दिहाड़ी, सरकार है इस बात से अंजान

बीजेपी सिरोमणी अकाली दल वाली पंजाब सरकार ने 15 लाख रुपये देने का वादा किया था लेकिन अभी तक ऐसा नहीं कर पाई

2 min read
Google source verification

नई दिल्ली। 17 साल के चैंपियन साइक्लिस्ट राजबीर सिंह को आजिविका चलाने के लिए दिहाड़ी लेबर और वीलचेयर खींचने का काम करना पड़ रहा है। बीजेपी सिरोमणी अकाली दल वाली पंजाब सरकार ने 15 लाख रुपये देने का वादा किया था लेकिन अभी तक ऐसा नहीं कर पाई यह रकम राजबीर के परिवार जीवन जीने में काफी मदद कर सकती थी और शायद इससे उसके खेल में और सुधार आ पाता जिससे भारत में और गोल्ड मैडल आ सकते, लेकिन यह सपना हकीकत नहीं बन पाया है।

राजबीर सिंह टूर्नमेंट के 1 और 2 किमी साइकिलिंग इवेंट में गोल्ड जीते थे इनको पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सम्मानित किया और 15 लाख रुपए के अलावा 1 लाख रुपए अतिरिक्त पुरस्कार भी देने का ऐलान भी किया था, जबकि साथ ही साथ 10 लाख रुपये केंद्र सरकार की ओर से बॉन्ड्स के रूप में मिलने वाले थे। एक अंग्रेजी अख़बार को बताते समय मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने कहा, 'हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। और कहा हम लोग पूरी जानकारी लेने के उपरांत राजबीर सिंह की हर तरीके से मदद करेंगे और जो वादा किया है तो पूरा करेंगे।

4 सदस्यों का यह परिवार एक छोटे से कमरे में अपनी जिंदगी गुज़ार रहा है। मजबूर राजबीर के पिता बलबीर का कहना है, 'मेरा बेटा वाकई मेरे लिए स्पेशल और टेलेंटेड है। लेकिन वह हर दिन अधिकारियों के कारण ठगा हुआ महसूस करता है। मेरा यह मानना है कि किसी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए प्रसाशन को अपने किए हुए वादे पूरे करने चाहिए।' इस साल मई में 'मनुक्ता दी सेवा' एनजीओ के फाउंडर गुरप्रीत सिंह ने राजबीर की मदद करने का फैसला किया। वह यह बताते हैं कि, 'जब मैंने राजबीर को देखा तो मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। भला एक ओलिंपियन के साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है? वह हर महीने 5000 रुपए के लिए दिहाड़ी मजदूर बनने को मजबूर है।' उन्होंने राजबीर को काम देने के अलावा साइकिल, दवाइयों और डाइट की व्यवस्था की।

वह बताते हैं कि राजबीर की सहायता के लिए मैं कोच और लुधियाना में खेले अधिकारियों के पास गए, लेकिन किसी की तरफ से कोई सहायता नहीं की गई। खुद भी मजदूरी करने वाले बलबीर कहते हैं, जब बेटे ने गोल्ड मेडल जीता तो लगा हमारे भी सुनहरे दिन आएंगे। लेकिन, मुझे समझ नहीं आ रहा है बेटे के साथ ऐसा क्यों हुआ।' लेकिन इस कदम के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने कहा कि हम लोग पूरी जानकारी लेने के बाद राजबीर सिंह की हरसंभव मदद करेंगे और जो वादा किया है तो पूरा करेंगे।