आर्थराइटिस डे विशेष: गेस्ट राइटर :डॉ. जयराज सिंह शेखावत, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, जिला आयुर्वेद चिकित्सालय
Arthritis Day 2022: पाली। आर्थराइटिस हड्डियों के जोड़ों को प्रभावित कर सूजन तथा असहनीय दर्द देने वाली और तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है। इस बीमारी के कारण हर साल 30 प्रतिशत लोग आंशिक दिव्यांग हो जाते हैं। इस वर्ष विश्व आर्थराइटिस डे की थीम इट्स इन योर हैंड टेक एक्शन है।
आर्थराइटिस को आयुर्वेद में वातिक तथा कष्टकारी रोग माना है। आर्थराइटिस अलग-अलग 120 प्रकार के लक्षण समूहों में पाए जाते हैं। यह मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं गठिया और संधिवात। यह लोग 30 से 40 वर्ष की आयु वाले लोगों में हो जाता है। पुरुषों के बजाय महिलाओं में यह तीन गुना अधिक होता है। इसका एक कारण आनुवांशिक भी है। गठिया रोग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को उलट देता है। जिससे प्रतिरोधक क्षमता शरीर के बचाव की बजाय उस पर आक्रमण करने लगती है। इसका रंग गठिया का उपचार मुश्किल होता है। पुराना होने पर यह असाध्य हो जाता है।
गठिया रोग की पहचान
गठिया रोग में मरीज को हल्का बुखार, संधियों में सूजन जोड़ों में जकड़न व तेज दर्द तथा स्विच सब चुभने जैसी पीड़ा होती है। भोजन में अरुचि होती है। चलने-फिरने पर तेज दर्द होता है। मरीज को उठने-बैठने में भी परेशानी होने लगती है। रोग बढ़ने पर उत्तक को व हड्डियों का क्षय होने लगता है। संधियों में पाया जाने वाला सायनोवियल तरल पदार्थ समाप्त हो जाता है, जिससे पीड़ा होती है।
संधिवात रोग के कारण
यह रोग शरीर की संधियों विशेषकर घुटनों पर अधिक होता है। इसका मुख्य कारण वृद्धावस्था, जोड़ों में चोट लगना, कैल्शियम की कमी, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना, रासायनिक पदार्थों और दवाइयों के साइड इफेक्ट है। संयमित दिनचर्या व मोटापा भी इसका एक कारण है।
यह नहीं करना चाहिए
गठिया रोग होने पर ज्यादा मीठा, खट्टा, ठंडा भोजन, जंक फूड, फास्ट फूड, रेडीमेड फूड का उपयोग नहीं करना चाहिए। बिना भूख लगे भोजन नहीं करना चाहिए और ठंडी हवा में जाने से बचना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में पंचकर्म चिकित्सा, भोजन व्यवस्था, उचित व्यायाम और उपचार से गठिया रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।