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पाली में मंत्रों के साथ लगवाई गांठें, श्रद्धालुओं ने दी हवन में आहुतियां

पाली

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Rajeev Dave

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Updated: 29 Jan 2026, 8:24 PM IST

Krishnagiri Bhairav ​​Katha

पाली में भैरव कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।

शहर के अणुव्रत नगर में आयोजित भैरव कथा व महालक्ष्मी यज्ञ में उमड़े साधक

शहर के अणुव्रत नगर में आयोजित भैरव कथा व महालक्ष्मी यज्ञ में गुरुवार को बड़ी संख्या में शहरवासी व ग्रामीण उमड़े। जयकारों से अणुव्रत नगर परिसर गूंज उठा। वहां जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी की निश्रा में भैरव देव की आराधना की गई। मंत्रोच्चार कर श्रद्धालुओं से सर्व कष्ट अवारक डोरे सिद्ध करवाए गए। डोरों में विधि-विधान के साथ 30 मिनट तक चले विधान मतें 27 गांठें लगवाई गई। उधर, महालक्ष्मी यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर विश्व कल्याण की प्रार्थना की।

कथा करते हुए कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी ने हरिकेश की शिव भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भैरव के 64 स्वरूप हैं। कुबेर देव यक्षों के राजा हैं। रामदेव नाम के यक्ष के पुत्र गुणभद्र के संतान नहीं थी। गुणभद्र ने शिव की भक्ति और साधना की। इस पर उन्हें सन्तान प्राप्ति हुई। उसका नाम हरिकेश रखा गया। वह बचपन से शिवभक्त था। गुरुकुल जाने की जगह शिव की आराधना में लीन रहन से उसके पिता नाराज होते थे। इसके बाद हरिकेश घर छोड़ जंगल में चला गया। शिव उपासना में लीन हो गया। उसकी भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए। जब तपस्या में लीन हरिकेश ने आंख खोली तो वह जंगल की जगह काशी में था। वहां उसने मणिकर्णिकाश्मसान में तपस्या की। जब मां पार्वती के साथ भगवान शिव भ्रमण पर निकले तो माता पार्वती ने हरिकेश को देखा। मां पार्वती ने प्रभु शिव से हरिकेश के कल्याण की कामना की। इस पर भगवान शिव ने हरिकेश को विश्व विलक्षण वरदान दिया। उनको दण्डनायक भैरव बनने का वर दिया।