
बिपरजॉय ने थामे वाटर ट्रेन के पहिये, पढ़ें पूरी खबर...
-राजेन्द्रसिंह देणोक/खुशालसिंह भाटी
पिछले साल बिपरजॉय चक्रवात पाली-जालोर के लिए सुकून भरा रहा। चक्रवात के दौरान और उसके बाद हुई बारिश से दोनों ही जिलों में भूजल स्तर में औसत 2 से 5 मीटर तक सुधार हुआ। वहीं जलस्रोतों में भी पानी की भरपूर आवक इस बार गर्मी के मौसम में पेयजल संकट की स्थिति पैदा नहीं होने देगी।
पाली जिले के प्रमुख जलस्रोत में जवाई बांध में भरपूर आवक हुई। ऐसे में दो साल पूर्व वॉटर ट्रेन के जरिये पाली शहर की प्यास बुझाने के जो प्रयास हुए थे, वैसे हालात इस बार नहीं बनेंगे और जवाई बांध से पानी पेयजल के लिए गर्मी में भी उपलब्ध हो सकेगा। इधर, जालोर जिले में अच्छी बारिश से भूजल भंडार वर्ष 2018 से भी बेहतर स्थिति में पहुंचे। वर्ष 2018 में जिले में 29.45 मीटर औसत गहराई पर भूजल भंडार थे, वहीं अब जलस्तर 28.48 मीटर है। सर्वाधिक फायदा कृषि क्षेत्र को हुआ और इस स्थिति में करीब 7 साल से पानी के अभाव में बंद पड़े कुएं भी रिचार्ज हुए, जिससे किसान निहाल हुए। भूजल विभाग की ओर से जारी किए गए आंकड़े काफी सकारात्मक है। बता दें जालोर जिला डार्क जोन में है और यहां भूजल स्तर में लगातार गिरावट हो रही है। प्रदेश की बात करें तो 200 प्रतिशत अधिक भूजल दोहन प्रतिवर्ष होता है। ऐसे में भूजल स्तर में वर्ष 2018 से भी पूर्व की स्थिति भूजल भंडार की बेहतर स्थिति का संकेत है।
2018 से 2023 में बारिश बाद ऐसी सुधरे हालात
-2018 में मानसून ज्यादा बेहतर नहीं रहा, इस काकरण बारिश के बाद भी भूजल दोहन हुआ और जल भंडार में कमी आई। आहोर ब्लॉक में भूजल भंडार बारिश के बाद 1.40 मीटर की कमी के साथ 18.26 मीटर पर थे। भीनमाल में 1.10 मीटर की कमी के साथ 41.06 मीटर पर थे। चितलवान में 0.42 मीटर की गहराई के साथ 10.52 मीटर गहराई पर थे। जालोर में 1.77 मीटर तक गहराई के साथ 27.91 मीटर, जसंवतपुरा में 2.40 मीटर गहराई के साथ 22.40 मीटर, रानीवाड़ा में 1.82 मीटर की कमी के साथ 18.75, सांचौर में 0.10 मीटर की कमी के साथ 34.79 मीटर और सायला में 2.57 मीटर कमी के साथ 61.25 मीटर गहराई पर था। बारिश के बाद जिले में 29.45 मीटर गहराई पर पानी उपलब्ध था।
-2023 में भारी बारिश के चलते आहोर में 8.53 मीटर सुधार के साथ जल स्तर 14.43 मीटर, भीनमाल में 3.06 मीटर सुधार के साथ 51.40 मीटर, चितलवाना में 1.43 मीटर सुधार के साथ 11.89 मीटर, जालोर में 8.03 मीटर सुधार के साथ 27.01 मीटर, जसंवतपुरा में 11.29 मीटर सुधार के साथ 14.63 मीटर, रानीवाड़ा में 5.75 मीटर सुधार के साथ 14.31 मीटर, सांचौर में 2.31 मीटर सुधार के साथ 30.61 मीटर और सायला में 2.91 मीटर सुधार के साथ 63.48 मीटर पर भूजल भंडार मौजूद है। औसत भूजल भंडार में 5.41 मीटर तक सुधार हुआ, जो वर्ष 2017 से अब तक सर्वाधिक है। बता दें वर्ष 2017 में भी बाढ़ आई थी और जवाई नदी में कई दिनों तक पानी का बहाव रहा, जिससे जिल के भूजल स्तर में 5.10 मीटर तक सुधार हुआ था। वर्ष 2017 में जिले में वर्षा पूर्व 31.32 मीटर गहराई पर भूजल भंडार थे और बारिश के बाद 26.22 मीटर गहराई पर पानी मौजूद था।
2018 से 2023 में बारिश पूर्व की स्थिति
-वर्ष 2018 में आहोर में भूजल भंडार 16.86 मीटर गहराई पर थे। इसी तरह भीनमाल में 39.96, चितलवाना में 10.10, जालोर में 26.14 मीटर, जसंवतपुरा में 20.30, रानीवाड़ा में 16.93, सांचौर में 34.69, सायला में 59.08 मीटर गहराई पर था। इसी तरह जिले में औसत भूजल भंडार 28.01 मीटर गहराई पर था।
-वहीं वर्ष 2023 में बारिश पूर्व की स्थिति पर गौर करें तो आहोर में 22.95, भीनमाल में 51.40, चितलवाना में 13.33, जालोर में 34.04, जसवंतपुरा में 25.92, रानीवाड़ा में 20.06, सांचौर में 32.92 और सायला में 66.38 मीटर गहराई पर भूजल भंडार थे। औसत भूजल गहराई 33.90 मीटर पर थी।
टॉपिक एक्सपर्ट
इस बार बिपरजॉय चक्रवात के दौरान भारी बारिश और उसके बाद मानसूनी बारिश के चलते भूजल भंडारों में काफी सुधार हुआ है। जवाई नदी में कई दिनों तक बहाव रहने से भी इस बार जिले के औसत भूजल भंडार में 5 मीटर से अधिक सुधार हुआ है। ये बेहतर स्थिति वर्ष 2017 के बाद देखने को मिल रही है।
- गणपत राणा, भूजल वैज्ञानिक, भूजल भंडार जालोर
Updated on:
06 Apr 2024 08:39 pm
Published on:
06 Apr 2024 08:39 pm
