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Pali: एक ही चिता पर हुआ पति-पत्नी, बेटा-बेटी का अंतिम संस्कार, बिलखता हुआ पिता बोला-हे भगवान, बुढ़ापे में यह दिन क्यों दिखाया

रोहट थाना क्षेत्र के बीठू गांव में बुधवार सुबह उस समय हर आंख नम हो गई, जब एक ही परिवार के चार लोगों की अर्थियां एक साथ घर से निकली और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।
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पाली

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Anil Prajapat

Jul 01, 2026

Pali Family Suicide

गांव में एक साथ उठी पति-पत्नी, बेटा-बेटी की अर्थी। फोटो: पत्रिका

पाली। रोहट थाना क्षेत्र के बीठू गांव में बुधवार सुबह उस समय हर आंख नम हो गई, जब एक ही परिवार के चार लोगों की अर्थियां एक साथ घर से निकली और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बुजुर्ग पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार यही कहता रहा कि हे भगवान, ऐसा क्या गुनाह किया कि बुढ़ापे में बेटे, बहू और पोते-पोतियों की अर्थी देखनी पड़ी। अब यह बुढ़ापा कैसे कटेगा? बेटा, अगर कोई तकलीफ थी तो एक बार बता देता, ऐसा कदम क्यों उठाया? परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला और ढांढस बंधाया। इसके बाद गेनाराम, उसकी पत्नी पुष्पा, बेटी खुशबू और बेटे किशन का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान माहौल गमगीन हो गया और अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखें नम हो गईं।

मंगलवार सुबह जैसे ही बीतू गांव में इस सामूहिक मौत की खबर पहुंची, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। पहले से ही लकवे की मार झेल रहे लाचार पिता और बूढ़ी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। बुधवार सुबह चारों शवों को गमगीन माहौल में बीटू गांव लाया गया। जहां पर चारों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि पुष्पा के माता-पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी। मुकनपुरा निवासी भुआ ने पाल-पोसकर उसे बड़ा किया और बीटू के गेनाराम से शादी कराई थी। दो बच्चों के साथ खुशहाल चल रहा यह सफर इस तरह खौफनाक मोड़ पर खत्म होगा, किसी ने नहीं सोचा था।

डॉक्टर के पास जाने के बजाय गेनाराम ने अंधविश्वास का रास्ता चुना

मूल रूप से बीटू निवासी गेनाराम के कंधों पर जिम्मेदारियों का भारी बोझ था। घर में बूढ़े पिता जोधाराम पिछले कई वर्षों से लकवे से ग्रसित थे, तो वहीं भाई राजू दिव्यांग और मंदबुद्धि है। इस विपरीत परिस्थिति में भी परिवार के पालन-पोषण के लिए गेनाराम सैकड़ों किलोमीटर दूर फतेहगढ़ (देचू) जाकर खेती करता था। सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन अचानक उसकी पत्नी पुष्पा की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। डॉक्टर के पास जाने के बजाय गेनाराम ने अंधविश्वास का रास्ता चुना और एक तांत्रिक की शरण ली। तांत्रिक ने पुष्पा को 'डायन' बताकर गेनाराम के दिमाग में ऐसा खौफ भर दिया कि वह पूरी तरह टूट गया। इस भ्रम और डर के साए में कि उसकी पत्नी बाकी परिवार को मार डालेगी, गेनाराम ने देचू पहुंचकर बिना सोचे समझे अपनी पत्नी, बच्चों और खुद की जीवनलीला समाप्त कर ली।

कृषि फार्म पर मिले थे चारों के शव

बता दें कि फलोदी जिले के देवू क्षेत्र के फतेहगढ़ स्थित एक कृषि फार्म पर मंगलवार सुबह एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव मिले थे। घर के भीतर खुशबू (13), किशन (11) और उनकी मां पुष्पा (32) के शव मिले, जबकि परिवार का मुखिया गेनाराम पटेल (35) बरामदे में फंदे से लटका मिला। मृतक पाली जिले रोहट क्षेत्र के बीठू गांव के रहने वाले थे। गेनाराम ने पहले भोजन में नींद की गोलियां मिलाकर पत्नी और दोनों बच्चों को बेहोश किया, फिर गला दबाकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।