
कोयलवाव की पथरीली राहों पर खुलेगा राजस्थान का तीसरा ग्रामीण हाट
-राजकमल व्यास
पाली। पथरीली राहों और पहाड़ियों से घिरा हमारा आदिवासी क्षेत्र अब तेजी से अंगड़ाई लेने लगा है। हाल ही के सालों में सीताफल के पल्प व पलाश के फूलों की गुलाल के जरिए आत्मनिर्भर बनकर देश को पाठ पढ़ाने वाला पाली जिले का आदिवासी क्षेत्र अब एक कदम और आगे बढ़ा रहा है। ये कदम है रूरल हाट का, जो कि कोयलवाव ग्राम पंचायत में बनाया गया है, जो कि प्रदेश का तीसरा हाट होगा। इससे इससे अब यहां के ग्रामीणों को कृषि और गैर कृषि सामान के लिए ओवरलोडेड जीपों में सफर नहीं करना पड़ेगा।
इस हाट में कुल 40 दुकानें हैं, जिसका संचालन ग्राम पंचायत के जरिए एक समिति करेगी। आने वाले दिनों में इसका उद्घाटन किया जाएगा। भले ही आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की लौ से उजियारा हो रहा है और तकनीक भी पहुंच चुकी है। लेकिन, उपयुक्त बाजार व आवागमन के साधनों की कमी से यहां के आदिवासी आज भी हलकान है। जरूरत का कुछ भी सामान लेने के लिए नाना, सेवाड़ी या बाली जाना पड़ता है। ऐसे में आदिवासियोें के लिए वो सामान डेढ़ गुना कीमत में पहुंच पाता है। आखिरकार यहीं पर बाजार मुहैया कराने के लिए ग्रामीण हाट (रुरल हाट) का सपना बुना। जिला प्रशासन के जरिए ग्राम पंचायत से जमीन आवंटन करवाई और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड के अनुदान से इस सपने को पंख लगाए गए। अब सृजन संस्था के सहयोग से इस ग्रामीण हाट का संचालन जल्द शुरू किया जाएगा। खास बात ये है कि आदिवासी क्षेत्र के उत्पादों की बिक्री भी इसी हाट के जरिए हो सकेगी, इससे अच्छे खरीदार और भाव भी सुलभ होंगे।
सोलर से होगा रोशन, स्वच्छ होगा भारत
यहां पर स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय के साथ ही कचरा पात्रों की भी व्यवस्था की गई है। साथ ही इसे रोशन करने सोलर लाइट लगाई गई है।
नजदीकी बाजार भी 17 किलोमीटर दूर
ये गांव दूरस्थ है और पहाड़ियों से घिरा है। सबसे नजदीकी बाजार भी नाना है, जो यहां से करीब 17 किलोमीटर दूर है। सेवाड़ी, फालना व बाली तो और भी दूर है।
ऐसे समझें रूरल हाट के फायदे
● आदिवासियोें को जरूरत का सामान अब सही दाम पर मिल सकेगा।
● पहले बाजार जाने ओवरलोडेड जीपों में सफर करना पड़ता था, उससे भी मुक्ति।
● जो यहां दुकान लगाएंगे, उन्हें भी नाम मात्र का किराया देना होगा।
● सीताफल के पल्प, गुलाल व लोकल उत्पादों के लिए भी खरीदार मिलेंगे।
● संचालन समिति गठित होगी, जिसमें नाबार्ड, सृजन, स्थानीय बैंक, ग्राम पंचायत और अन्य सामाजिक सस्था के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
ये दो हाट प्रदेश में
इसके अलावा प्रदेश में अन्य दो जगहों अलवर के बिघोटा और भरतपुर के राराह गांव में रूरल हाट तैयार किए गए हैं।
लोगों को यहीं पर मिलेगा सामान
ये प्रदेश का तीसरा रूरल हाट है, जिसके लिए नाबार्ड ने अनुदान दिया है। हाल ही में अलवर व भरतपुर जिले में भी हाट तैयार हुए हैं। ये हाट बनकर तैयार हो गया है। पहले यहां के लोगों को सामान खरीदने दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब यहीं पर उनका खुद का बाजार होगा। जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा। - विनोद दाधीच, जिला विकास अधिकारी, नाबार्ड
अब नहीं जाना पड़ेगा दूर
इस रूरल हाट के बनने से ग्रामीणों को फायदा होगा। यहीं पर उचित दाम पर सामान मिल सकेगा। उन्हें जीपों में खतरेभर सफर से भी राहत मिलेगी। अब कहीं और नहीं जाना पड़ेगा। - बासु बाई, सरपंच, कोयलवाव
Published on:
21 Jul 2022 09:12 pm
बड़ी खबरें
View Allपाली
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
