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लीड -स्कूल से पहले परीक्षा: लूनी नदी बहाव को लकड़ी के पुल के सहारे पार कर स्कूल पहुंच रहे विद्यार्थी, पुल नहीं बनने से 500 परिवार परेशान

पाली

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Newsdesk

Jul 29, 2026

Rajasthan

- एक दशक से समस्या बरकरार, मुख्य रूप से कोली, रेबारी समेत अन्य समुदाय के लोग निवासरत

जालोर पत्रिका
सांचौर में नेहड़ क्षेत्र के होतीगांव ग्राम पंचायत के हदा की ढाणी के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का खामियाजा भुगत रहे हैं। यहां लूनी नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण करीब 50 स्कूली विद्यार्थी रोजाना ग्रामीणों द्वारा बनाए गए अस्थायी लकड़ी के पुल के सहारे नदी पार कर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय होतीगांव पहुंचने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में यह सफर और भी जोखिम भरा हो जाता है, जबकि करीब 500 परिवारों की आवाजाही भी इसी मार्ग पर निर्भर है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 70 फीट लंबा लकड़ी का पुल हर वर्ष ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग और श्रमदान से तैयार किया जाता है। पुल नहीं होने से विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

एक दशक से परेशानी बरकरार
वर्ष 2014 के बाद नर्मदा परियोजना के ओवरफ्लो पानी की लगातार निकासी तथा बरसात में लूनी नदी के बहाव के कारण यह क्षेत्र स्थायी जलभराव वाला बन गया है। ऐसे में पुल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूर्व सांसद देवजी पटेल, पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई तथा वर्तमान विधायक जीवाराम चौधरी को कई बार ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया जा चुका है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी भी मौके का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन अब तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।

हर साल ग्रामीण ही बनाते हैं पुल
ग्रामीणों के अनुसार बहाव क्षेत्र में पहले बोरवेल के पाइप करीब 10 फीट गहराई तक गाडकऱ नींव तैयार की जाती है। इसके बाद बबूल की लकडिय़ों को तारों से बांधकर अस्थायी पुल बनाया जाता है, जिससे लोग किसी तरह नदी पार कर सकें।

4 किमी का रास्ता, बारिश में 20 से 50 किमी का चक्कर
हदा की ढाणी से होतीगांव की दूरी महज 4 किलोमीटर है, लेकिन नदी के कारण यह रास्ता बाधित हो जाता है। सामान्य दिनों में लोग लकड़ी के पुल से आवागमन करते हैं, जबकि तेज बहाव के दौरान दूठवा, लालपुरा या अगड़ावा होकर जाना पड़ता है। इन वैकल्पिक मार्गों की दूरी 17 से 50 किलोमीटर तक होने से ग्रामीणों और विद्यार्थियों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।

बच्चों की सुरक्षा दांव पर, जिम्मेदार कहां
जब ग्रामीण वर्षों से अपने दम पर अस्थायी पुल बनाकर जीवन और शिक्षा की डोर संभाले हुए हैं, तब स्थायी पुल का निर्माण केवल विकास का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों के बुनियादी अधिकार का भी सवाल बन चुका है। अब जरूरत है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।

विद्यार्थी बोले-स्कूल जाना जरुरी
हदा की ढाणी निवासी 10वीं कक्षा के विद्यार्थी रतनसिंह ने कहा कि अध्ययन के लिए होतीगांव जाना पड़ता है। पुल नहीं होने से दिक्कत होती है। छठीं कक्षा के छात्र दिलीप कुमार कोली ने कहा कि पुल नहीं होने से हर साल दिक्कत होती है। अधिक बारिश में तो स्कूल भी नहीं जा पाते हैं। आठवीं कक्षा की छात्रा वसुंधरा सिंह ने कहा कि पक्का पुल निर्माण हो जाए तो समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

इन्होंने कहा
हदा की ढाणी से होतीगांव नदी प्रवाह क्षेत्र पर बड़े पुल की दरकार है। पूर्व में यहां पुल के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। यहां के निवासियों की पुल निर्माण की वाजिब मांग है। पुल निर्माण के लिए मैं व्यक्तिगत रूप से प्रयासरत हूं।
- जीवाराम चौधरी, विधायक, सांचौर

मौका स्थल के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। पहले प्रस्ताव गया है या नहीं इस बारे में जानकारी जुटाने के साथ उचित कार्रवाई की जाएगी।
- एचपी मीणा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, सांचौर