ओरछा-चित्रकूट में राम देखिये, पन्ना-रीवा में बाघ, सीधी की गुफाएं निहारिये, सिंगरौली का विकास
पन्ना। विंध्य प्रदेश का हिस्सा रहे बुंदेलखंड और बघेलखंड के जिलों के बीच बेहतर सड़क मार्ग की आवागमन सुविधा होने के साथ ही हवाई सेवाओं का भी विस्तार हो रहा है। अब बुंदेलखंड और बघेलखंड में पर्यटन विकास के लिए कॉरिडोर विकसित करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। विशेषज्ञ इसके विकास की संभावनाएं भी देख रहे हैं। एक सप्ताह के विशेष पर्यटन पैकेज के तहत पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ने की मांग की जा रही है।
बुंदेलखंड और बघेलखंड के जिलों में पर्यटन का केंद्र खजुराहो है। अभी पर्यटन सर्किट का विकास नहीं होने से पर्यटक अपने मनपसंद क्षेत्र के एक-दो स्थलों को देखकर ही वापस लौट जाते हैं। ऐतिहासिक पर्यटन में रुचि रखने वाले पर्यटक खजुराहो के मंदिर देखते हैं लेकिन इसके बाद उन्हें पता नहीं होता है कि और क्या देखा जा सकता है। जबकि जबकि पन्ना और सीधी में गुप्त काल 5वीं से 5वीं सदी तक के मंदिर, गुफाएं हैं। इसी प्रकार से धार्मिक पर्यटन में रुचि रखने वाले लोग ओरछा में रामराजा सरकार के दर्शन कर लेते हैं लेकिन वे चित्रकूट, मैहर, पन्ना के मंदिर नहीं देख पाते।
श्रीराम पथगमन मार्ग के स्थलों को भी नहीं देख पाते हैं। इसी तरह वाइल्ड लाइफ में रुचि रखने वाले लोग पन्ना टाइगर रिजर्व का भ्रमण कर बाघ तो देख लेते हैं, लेकिन मुकुंदपुर में सफेद बाघ और संजय टाइगर रिजर्व देखने से चूक जाते हैं। झांसी का किला तो लोग घूम लेते हैं लेकिन कालिंजर, अजयगढ़, के किले नहीं देख पाते। इसी को देखते हुए अब पर्यटन पैकेज की मांग की जा रही है, जिससे आने वाले पर्यटक अपने रुचि के अनुसार एकबार के खर्च में ही कई क्षेत्रों का भ्रमण और अध्ययन कर सकें।
अभी पर्यटन विकास के लिए पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद, इको पर्यटन बोर्ड, एमपी टूरिज्म सहित कई संस्थाएं अलग-अलग काम कर रही हैं। जरूरत इनको एक करके विकास करने की है। सस्टेनेबल टूरिज्म के विकास की दरकार है। हीरा खनन, उसकी नीलामी प्रक्रिया, कटिंग, पॉलिसिंग और ज्वेलरी मेकिंग का अपना आकर्षण है। हीरा खदानों को भला कौन नहीं देखना चाहेगा। इस दिशा में काम करने की जरूरत है।
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एजेंसियां कर रहीं अलग-अलग काम
पन्ना, कलिंजर, खजुराहो, चित्रकूट एक पर्यटन सर्किट में आते हैं। इन्हें जोड़ने और विकास के लिए काम किए जाने की जरूरत है। पर्यटन विकास की दिशा में अभी कई एजेंसियां अलग-अलग काम कर रही हैं। इनका टास्क फोर्स गठित कर विकास किए जाने की जरूरत है। एडवेंटर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स की बाणसागर संभावनाएं भी हैं। जगह-जगह सूचना केंद्र खोलकर पर्यटकों का आसान परिवहन सुविधा उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।
-इंद्रभान सिंह बुंदेला, फील्ड को-ऑर्डिनेटर, द लास्ट वाइल्डरनेश फाउंडेशन
पन्ना के पर्यटन स्थलों के विकास के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजी गई थी। इसमें पर्यटन स्थलों को विकसित कर वहां पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं दिलाने का प्रयास था। अभी तक इस कार्ययोजना को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
-अशोक चतुर्वेदी, नोडल ऑफिसर जिला पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद