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एमपी में महिलाओं की जमीन हड़पने वाला कांग्रेस नेता गिरफ्तार

mp news: कांग्रेस नेता पर आरोप है कि उसने फर्जीवाड़ा कर दो आदिवासी महिलाओं की पैतृक भूमि अपने नाम दर्ज करा ली है।

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panna

congress leader arrested for grabbing tribal women land

mp news: मध्यप्रदेश के पन्ना में आदिवासी महिलाओं की जमीन हड़पने के एक गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महामंत्री श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फर्जीवाड़ा कर दो आदिवासी महिलाओं की पैतृक भूमि अपने नाम कराने के आरोप में गुरुवार सुबह पुलिस ने श्रीकांत दीक्षित को उसके घर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार इस मामले में दो अन्य आरोपी अनुपम त्रिपाठी पिता रामलखन त्रिपाठी निवासी नगर सुधार न्यास इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना और जैतुपुरा निवासी राजाराम की तलाश जारी है।

फर्जी बेटे का खेल, बहनों की जमीन हड़पी

मामले की शिकायत आदिवासी महिला संतोष रानी निवासी तखोरी तहसील शाहनगर थाना रैपुरा ने 25 सितंबर 2025 को कोतवाली थाना पन्ना में दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनके पिता का निधन हो चुका है और माता नेत्रहीन हैं। परिवार में वे केवल दो बहनें हैं और कोई भाई नहीं है। बावजूद इसके ग्राम जैतुपुर निवासी एक व्यक्ति को फर्जी रूप से उनका भाई बताकर ग्राम मनौर स्थित उनकी पैतृक भूमि का नामांतरण करा लिया गया। शिकायत के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पन्ना द्वारा कराई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस नेता पप्पू दीक्षित ने अपने मित्र अनुपम त्रिपाठी के साथ मिलकर जैतुपुरा निवासी राजाराम को फर्जी रूप से बहनों का भाई और माता-पिता का पुत्र दर्शाया। इसके आधार पर खसरा नंबर 148/4 रकबा 2.000 हेक्टेयर भूमि का अवैध रूप से क्रय-विक्रय और नामांतरण कराया गया।

राजस्व जांच में फर्जीवाड़ा साबित

एसडीएम द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता और उनके परिजनों के शपथ पत्रों में साफ तौर पर लिखा है कि पिता की केवल दो पुत्रियां हैं, कोई पुत्र नहीं है। निकट संबंधियों और साक्षियों के शपथ पत्रों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की। इसके बावजूद हल्का पटवारी द्वारा खातेदार की मृत्यु दर्शाते हुए फर्जी पुत्र के नाम नामांतरण की प्रविष्टि की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जीवाड़े के लिए राजाराम को 35 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद 9 नवंबर 2020 को पंजीकृत विक्रय पत्र के आधार पर श्रीकांत दीक्षित और अनुपम त्रिपाठी के पक्ष में भूमि का नामांतरण स्वीकृत कर लिया गया।

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