
भरत तिवारी (फोटो- bharat tiwari facebook)
भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भोजपुर पुलिस अधीक्षक से तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. बदर ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अधिकारियों को लगभग चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। आयोग में अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई है। मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी काशीनाथ तिवारी के पुत्र भरत भूषण तिवारी को फर्जी एनकाउंटर में पुलिस ने गोली मारी, जिससे उनकी मौत हो गई।
मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा ने आरोप लगाया है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। शिकायतकर्ता ने इस घटना को मानवाधिकार का उल्लंघन और कथित फर्जी एनकाउंटर बताया है। राज्य मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार, सेवानिवृत्त जिला जज शैलेंद्र सिंह के अनुसार, नोटिस के आलोक में संबंधित अधिकारियों से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसकी समीक्षा की जाएगी और आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी की मौत के मामले की सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। इस जांच की जिम्मेदारी हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाएगी। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी थी। मुख्यमंत्री ने लिखा था, "भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।"
Updated on:
23 Jun 2026, 6:47 AM IST
Published on:
22 Jun 2026, 8:20 PM IST
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