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‘शॉक में था मरीज, लगी थीं 4-5 गोलियां’; भरत तिवारी का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताई कहानी

Bharat Tiwari Encounter: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब उस डॉक्टर का बयान सामने आया है, जिसने गोली लगने के बाद सबसे पहले उनका इलाज किया था। डॉक्टर ने दावा किया कि भरत को 4 से 5 गोलियां लगी थीं, वह गंभीर शॉक की स्थिति में थे और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत बेहद नाजुक थी।

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पटना

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Anand Shekhar

Jun 22, 2026

doctor statement of bharat tiwari encounter case

भरत तिवारी की फ़ाइल फोटो और उसका इलाज करने वाले डॉक्टर

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं हैं। इस मामले में अब उस डॉक्टर का बयान सामने आया है जिसने गोली लगने के बाद सबसे पहले भरत तिवारी का इलाज किया था। अस्पताल लाए जाने के समय की स्थिति बताते हुए आरा सदर अस्पताल के सर्जन डॉक्टर एम. एच. अंसारी ने कहा कि ज्यादा खून बहने के कारण मरीज लगभग दम तोड़ चुका था।

बचने की हालत में नहीं था मरीज, पल्स पूरी तरह गायब थी- डॉक्टर

डॉक्टर ने कहा कि शाहपुर पुलिस जब घायल युवक (भरत तिवारी) को लेकर आई, तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी। उसके पैर में और पेट के नीचे वाले हिस्से में गोलियां लगी हुई थीं। हमारे पास जब उसे लाया गया, तो उसकी नब्ज नहीं मिल रही थी, मरीज पूरी तरह से गहरे शॉक में था। उसके बिल्कुल भी बचने की उम्मीद नहीं था। हमारी मेडिकल टीम ने बड़ी मुश्किल से उसे होश में लाने का प्रयास किया, जिसके बाद उसकी कंडीशन में थोड़ा सा सुधार हुआ और ब्लड प्रेशर वगैरह मिलने लगा।

मेजर ब्लड वेसेल्स फटने से हुई थी वास्कुलर इंजुरी

डॉक्टर ने बताया कि गोलियां शरीर के ऐसे हिस्सों में लगी थीं, जिससे पूरा सर्कुलेटरी सिस्टम खराब हो गया था।। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर बंदूक की गोली की वजह से हुआ जख्म था। वास्कुलर इंजुरी (खून की नसों में चोट) की वजह से उसकी हालत खराब थी। शरीर के अंदर की जो मेजर ब्लड वेसेल्स होती हैं, उन्हें गंभीर चोट पहुंची थी और वे फट गई थीं। इसी वजह से शरीर का सारा खून बह गया और मरीज गहरे शॉक में चला गया था। हमारे प्राथमिक केंद्र पर इस स्थिति को हैंडल करना नामुमकिन था, इसीलिए उसे तुरंत हायर सेंटर रेफर कर दिया गया था।

क्या मानसिक रूप से विक्षिप्त था भरत तिवारी?

एनकाउंटर के बाद यह नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई कि भरत तिवारी मानसिक रूप से अस्थिर या विक्षिप्त थे। जब डॉक्टर से इस दावे के बारे में पूछा गया कि क्या पुलिस ने उनके मानसिक रूप से बीमार होने के बारे में कुछ बताया था, तो उन्होंने कहा कि जब मरीज को लाया गया, तो उनकी हालत ऐसी थी कि उनसे किसी भी तरह की बातचीत करना नामुमकिन था। वे लगभग पूरी तरह से बेहोश थे।

डॉक्टर ने कहा कि मरीज बोलने की हालत में नहीं थे, इसलिए हमारे लिए यह पता लगाना मुमकिन नहीं था कि वे मानसिक रूप से अस्थिर थे या नहीं। जहां तक पुलिस की बात है, उन्होंने भी उनकी मानसिक स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। जब तक कोई व्यक्ति होश में न हो, हम उसकी मानसिक स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।