
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (सोर्स: ANI)
बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) की ओर से शुक्रवार को 11 सचेतकों की आधिकारिक सूची जारी की गई। सूची सामने आते ही असली और फर्जी लिस्ट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक पत्र सामने आने से मामला और पेचीदा हो गया।
मुख्यमंत्री ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 11 नेताओं को सचेतक मनोनीत करने की सिफारिश की थी। इसके कुछ ही देर बाद उनके नाम से जारी दो अलग-अलग चिट्ठियां सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। दोनों पत्रों में 11-11 नाम शामिल थे, लेकिन दोनों सूचियों में किसी भी नाम का मेल नहीं था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर असली सूची कौन-सी है और फर्जी कौन-सी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई पहली चिट्ठी में सुल्तानगंज के विधायक ललित नारायण मंडल का नाम भी शामिल था। सूची सामने आते ही उन्हें बधाइयां मिलने लगीं। हालांकि, कुछ देर बाद विधानसभा की ओर से जारी आधिकारिक सूची में उनका नाम नहीं था। उनकी जगह विनय चौधरी को सचेतक बनाया गया।
दरअसल, एनडीए इस सूची के जरिए उन नेताओं को साधने की कोशिश कर रही है, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 11 नेताओं को सचेतक मनोनीत करने की सिफारिश की है।
इनमें दीघा के विधायक संजीव चौरसिया, बरौली के विधायक मंजीत सिंह, गोविंदगंज के विधायक राजू तिवारी, पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार और परिहार की विधायक गायत्री देवी जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी नेता सम्राट सरकार में मंत्री पद की दौड़ में माने जा रहे थे, लेकिन मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी। अब पार्टी और सरकार ने उन्हें सचेतक की जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की कोशिश की है। मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है, जबकि अन्य सचेतकों को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
Published on:
16 May 2026 10:07 am
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