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बिहार: MLC उपचुनाव में हार के बाद जदयू में बगावत तेज, अंदरूनी कलह खुलकर आई सामने

भोजपुर–बक्सर MLC उपचुनाव के नतीजों के बाद जदयू में अंदरूनी कलह सामने आ गई है। एनडीए ने इस सीट पर कन्हैया प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन जदयू के बागी नेता मनोज कुमार उपाध्याय के चुनाव लड़ने से पार्टी में मतभेद गहराते चले गए।

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Kanhaiya

जदयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद

भोजपुर–बक्सर MLC उपचुनाव के परिणाम के बाद जदयू में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। इस हार के लिए पार्टी ने अपने बागी उम्मीदवार मनोज कुमार उपाध्याय को जिम्मेदार ठहराया है। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर मनोज कुमार उपाध्याय बगावत करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए थे। वहीं, जगदीशपुर विधायक और बिहार सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने भी इस हार को लेकर उन्हें प्रमुख कारण बताया है, जिसके बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

उधर, उपचुनाव परिणाम के बाद जदयू के बागी प्रत्याशी मनोज कुमार उपाध्याय ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक जदयू के लिए पूरी निष्ठा और मेहनत से काम किया, लेकिन टिकट वितरण के समय एक समर्पित कार्यकर्ता की अनदेखी कर धनबल को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि पार्टी एक संभावित जीत वाली सीट भी हार गई।

NDA के बागी उम्मीदवार ने बिगाड़ा खेल

बिहार विधान परिषद की भोजपुर–बक्सर MLC सीट राधाचरण सेठ के विधानसभा चुनाव 2025 जीतने के बाद खाली हुई थी। इसके बाद एनडीए ने इस रिक्त सीट पर राधाचरण सेठ के पुत्र कन्हैया प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया। सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष भी देखने को मिला था।

दरअसल, कन्हैया प्रसाद को टिकट मिलने से जदयू नेता मनोज कुमार उपाध्याय का दावा कमजोर पड़ गया, जिसके चलते वे असंतुष्ट होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए। माना जा रहा है कि उनके द्वारा काटे गए वोटों ने कन्हैया प्रसाद की जीत की संभावनाओं को प्रभावित किया और अंततः उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

बागी वोट बने NDA की हार की वजह

पहले राउंड की मतगणना में सोनू कुमार राय को 2,486 वोट मिले, जबकि एनडीए उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को 2,146 वोट प्राप्त हुए। वहीं जदयू के बागी उम्मीदवार मनोज कुमार उपाध्याय को 636 वोट मिले, जिन्हें निर्णायक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये वोट कन्हैया प्रसाद के पक्ष में जाते, तो चुनाव का पूरा समीकरण बदल सकता था। दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में भी सोनू कुमार राय ने इस सीट पर बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की।