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बिहार में सूखे और बाढ़ की दोहरी मार, 12 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

बारिश के पूरे सीजन में बिहार को 1,137 मिमी बारिश मिलनी चाहिए, लेकिन अब तक इसका आधा भी नहीं हो पाया है।

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पटना

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Ashish Deep

Sep 03, 2025

Bihar Flood

बिहार में बाढ़ से करीब 12 लाख लोग प्रभावित हैं। फोटो- आईपीआरडी

बिहार में इस साल मॉनसून ने फिर कहर बरपाया है। राज्य के कुछ जिलों में बारिश की भारी कमी है, वहीं कुछ इलाकों में नदियां उफान पर हैं, जिससे बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगस्त तक राज्य में केवल 554 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 782 मिमी है, यानी 228 मिमी कम पानी गिरा। पूरे सीजन में बिहार को 1,137 मिमी बारिश मिलनी चाहिए, लेकिन अब तक इसका आधा भी नहीं हो पाया है। नतीजतन, 12 जिले सूखे की चपेट में हैं जबकि 26 जिलों में बाढ़ का संकट है। 12 लाख से ज्यादा लोग बेघर होकर सड़कों और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

इस बार बारिश क्यों कम हुई?

मौसम वैज्ञानिकों ने इसके 3 बड़े कारण बताए:

  1. मॉनसून ट्रैक का बदलाव : जो बारिश Monsoon Track से गुजरती थीं, वे इस बार झारखंड और मध्य भारत की ओर चली गईं।
  2. बंगाल की खाड़ी में बदलाव : यहां बनने वाले लो-प्रेशर सिस्टम इस बार बिहार की बजाय मध्यप्रदेश की ओर बढ़े।
  3. स्थानीय मौसम सिस्टम का अभाव : बिहार में लोकल सिस्टम बन ही नहीं पाए, जिससे अतिरिक्त बारिश नहीं हुई।

मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में सामान्य से ज्यादा (300 मिमी से ऊपर) बारिश हो सकती है, खासकर 11 से 18 सितंबर के बीच, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि सालाना बारिश का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।

गंगा, कोसी और गंडक नदियां उफान पर

नेपाल में भारी बारिश से गंगा, कोसी और गंडक नदियां उफान पर हैं। इससे भागलपुर में गंगा के पानी से बरारी, आदमपुर, नाथनगर और तातारपुर डूबे। TMBU यूनिवर्सिटी कैंपस तक में पानी घुस गया। वहीं मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से महज 6 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। चंडीका स्थान और कष्ठरानी घाट डूब गए हैं और छह ब्लॉक जलमग्न हैं। जहानाबाद की बात करें तो फल्गु नदी का बांध टूट गया है, जिससे 50 गांव जलमग्न हो गए हैं। मत्स्य पालकों को 50 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है और धान की फसल तबाह हो गई है।

अगस्त के मौसम का रिकॉर्ड

  • सबसे ज्यादा औसत तापमान : मुंगेर 32.6°C
  • सबसे गर्म दिन : सुपौल, 36.6°C (7 अगस्त)
  • सबसे भारी बारिश : पूर्णिया, 270.6 मिमी (4 अगस्त)
  • कुल बारिश : अगस्त में सामान्य से 9% कम
  • बिजली गिरने की घटनाएं : 26 दिन

मॉनसून की कमी से फसलें बर्बाद

बारिश की कमी से खरीफ फसलें बर्बाद हो रही हैं और भूजल संकट गहराने की आशंका है। दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित इलाके राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।