पटना। बिहार में बाढ़ का कहर लगातार जारी है, पटना समेत आस-पास के जिलों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सोन और गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से पटना में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। सोन नदी के इंद्रपुरी बराज से साढ़े ग्यारह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद राजधानी पटना पर बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
गंगा में लगातार बढ़ते जल स्तर को लेकर शहर से गंगा नदी में गिरने वाली सभी नालों को जाम कर दिया गया है। हर स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। दियारा इलाके में बाढ़ परेशानी का सबब बना हुया है। सोन नदी से साढ़े ग्यारह लाख क्यूसेक पानी से औरंगाबाद, रोहतास, अरवल, भोजपुर जिले में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात 2:45 बजे इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी में 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसके चलते सोन के किराने बसे गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। सोन नदी गंगा में मिलती है, जिससे आने वाले समय में गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना है।
आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव व्यास जी ने बताया कि सोन और गंगा की स्थिति नाजुक है। गंगा पटना में भी खतरे के निशान के पास बह रही है। पटना के अलावा बाढ़ का पानी छपरा जिले के दर्जनों गांव में भी घुस गया है। डोरीगंज के पास NH पर पानी बह रहा है। छपरा शहर में भी बाढ़ का पानी घुसने लगा है।
1971 से भी भीषण बाढ़ जैसी स्थितिसारण में पहले से बाढ़ आई ही थी, इसी बीच शुक्रवार की रात इंद्रपुरी बराज से 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले में 1971 से भी भीषण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। 1971 की अपेक्षा आज के समय में शहर के दक्षिण स्थित सरयू नदी के किनारे वाले सड़कों की उंचाई 10 फीट से अधिक हो गई है। डीएम ने बाढ़ की भीषण स्थिति को देखते हुए शनिवार को आपात बैठक बुलाई और कई आदेश जारी किया है।
ये नदियां खतरे के निशान से ऊपर
गंगा पटना के दीघा घाट, गांधी घाट और हाथीदह के अलावा भागलपुर के कहलगांव में, सोन कोईलवर और मनेर में, पुनपुन श्रीपालपुर में, घाघरा सिसवन में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में और कोसी बलतारा व कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।