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ओलंपिक से जुड़े डाक टिकट का भी संग्रह, 1983 में मिला था कांस्य

- शहर के जतनमल ढोर पिछले कई साल से कर रहे डाक टिकट संग्रह  

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ओलंपिक से जुड़े डाक टिकट का भी संग्रह, 1983 में मिला था कांस्य

ओलंपिक से जुड़े डाक टिकट का भी संग्रह, 1983 में मिला था कांस्य

अनुराग त्रिवेदी जयपुर. इंडिया के खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रहे हैं। ऐसा ही मान शहर के डाक टिकट संग्रहणकर्ता जतनमल ढोर ने भी बढ़ाया था। 1983 में बैंकॉक में आयोजित डाक टिकट आलंपिक में कास्य जीता था। जतनमल ने बताया कि अजमेर के टिक इतिहास को लेकर कांस्य जीता था और न्यूजीलैंड में लार्ज सिल्वर मैडल प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि अब तक लाखों डाक टिक का संग्रह किया जा चुका है। अजमेर का डाक इतिहास सन १८२० से १९४७ तक नामक पुस्तक को भी लिख चुका हूं और इसे इंटरनेशनल लेवल पर कई पदक मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए भी कई तरह के डाक टिक संग्रह किए हुए हैं।

आजादी से पहले के डाक टिकट

उन्होंने बताया कि भारत की आजादी से पहले के और आजादी के बाद के कई विषयों के डाक टिकट मेरे पास उपलब्ध है। डाक टिकटों में सन १८५२ में सिंध प्रांत से जारी पहला डाक टिक और सन १८५४ में भारत से जारी पहले चार डाक टिक जिनमें आधा आना, एक आना, दो आना और चार आने का टिकट भी मौजूद है। इनमें अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इंगलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, हॉन्गकॉन्ग, स्पिटरलैंड, थाईलैंड के डाक टिकट भी संग्रह में शामिल है।

सिक्कों का संग्रह

ढोर को सिक्कों को संग्रह करने का भी शौक है। इनके पास सिक्कों में विशेष रूप से मुगलकाल से शाहजहां, औरंगजेब, अकबर, जहांगीर, शाहआलम और ब्रिटिशकाल में महारानी विक्टोरिया, एडवर्ड सप्तम, जार्ज पंचम, जार्ज षष्टम और स्वाधीन भारत से लेकर वर्तमान तक के हजारों सिक्के मौजूद हैं।

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