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बंदूक से बैलेट तक, दहशतगर्द जंगलों से निकल बीहड़ की नई कहानी लिखना चाहता है बागी पंजाब सिंह

Dakait Punjab Singh Gurjar New Story: कानून ने सुना नहीं... सिस्टम ने छोड़ा नहीं...'घर छोड़ना अपना' कोई शौक नहीं था मेरा... जिंदगी के रास्ते बंद दिखे तो... जंगल-बीहड़ मुकद्दर बन गया मेरा... इन पंक्तियों में पूर्व डकैत पंजाब सिंह गुर्जर के अतीत की पूरी कहानी सुनाई देती है... लेकिन आज पंजाब सिंह गुर्जर की जिंदगी की नई कहानी है... 'अब बदले की आग नहीं, बदलाव की रोशनी चाहिए...जिन हाथों में कभी बंदूक थी, उन्हें आज विकास की जिम्मेदारी चाहिए... आप भी जानें आखिर क्या है चंबल और पूर्व डकैत की ये नई और दूसरी कहानी...

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Patrika Series Baghi se Nagrik Chambal ki dusri kahani dakait punjab singh gurjar ki nai kahani

Patrika Series Baghi se Nagrik Chambal ki dusri kahani dakait punjab singh gurjar ki nai kahani(photo:AI)

Dakait Punjab Singh Gurjar: कभी ग्वालियर, मुरैना और शिवपुरी के बीहड़ों के बीच बसे गांवों में जिसके कदमों की आहट से सन्नाटा पसर जाता था, आज उसी पंजाब सिंह गुर्जर उसी इलाके के गांवों में विकास की बात कर रहे हैं। 25 हजार के इनामी, सरेंडर दस्यु रहे पंजाब सिंह अब हथियार नहीं, बल्कि लोकतंत्र के रास्ते अपने गांव कोटा बगौरा (शिवपुरी) की तस्वीर बदलना चाहते हैं। patrika.com संवाददाता संजना कुमार से बातचीत में वे दावा करते हैं कि 'गांव की असली तरक्की पक्की सड़कों से ज्यादा पढ़ाई, सेहत और आधुनिक खेती से होगी।' आप भी जानें पूर्व बागी पंजाब सिंह गुर्जर के भविष्य की नई कहानी...

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