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नक्सलवाद के साए से बाहर निकलता गांव, जानें बस्तर की बंदूक से ब्लैकबोर्ड तक के सफर की अनसुनी कहानी

Bastar Development Journey: नक्सलवाद के साए से बाहर निकलते बस्तर के गांवों की अनसुनी कहानी, जहां बंदूक की जगह अब ब्लैकबोर्ड ने ले ली है। शिक्षा से लौटती उम्मीद और बदलती तस्वीर।

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नक्सलवाद के बाद का बस्तर (AI फोटो)

नक्सलवाद के बाद का बस्तर (AI फोटो)

Bastar Development Journey: बस्तर को लंबे समय तक देश ने बंदूक, बारूद और नक्सल हिंसा की तस्वीरों में देखा। जंगलों के भीतर बसे गांवों में स्कूल इमारतें थीं, लेकिन पढ़ाई नहीं; बच्चे थे, लेकिन बचपन नहीं। अब उसी बस्तर में एक शांत लेकिन निर्णायक बदलाव आकार ले रहा है- जहां संघर्ष की जमीन पर शिक्षा की वापसी हो रही है। अबूझमाड़ के रेकावाया गांव का स्कूल इसका उदाहरण है- जहां कभी नक्सली गतिविधियों का प्रभाव था, वहीं आज 167 बच्चे नियमित पढ़ाई कर रहे हैं।

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