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Attack on Venezuela: क्या ट्रंप के ‘मादुरो मिशन’ से तेल के खेल में छटपटा कर रह जाएगा लोकतंत्र ?

Maduro Capture : वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने देश चलाने का दावा किया है। क्या यह तेल संसाधनों पर कब्जे की अमेरिकी रणनीति है?

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Attack on Venezuela

डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर शिकंजा कसा। (फोटो: AI, डिजाइन: पत्रिका)

Delta Force Raid: दक्षिण अमेरिका के राजनीतिक गलियारे में उस समय भूचाल आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सैन्य ऑपरेशन के माध्यम से वेनेजुएला (Trump Venezuela Policy) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा (Maduro Arrest 2026) किया। शनिवार तड़के अमेरिकी सेना की 'डेल्टा फोर्स' ने काराकास में एक गुप्त कमांडो रेड (Delta Force Operation) की और मादुरो को हिरासत में ले लिया। इस घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके बाद वेनेजुएला का भविष्य क्या होगा?

कमांडो ऑपरेशन: रात के अंधेरे में 'तख्तापलट'

माना जा रहा है कि इस ऑपरेशन की तैयारी महीनों से चल रही थी। कैरिबियन सागर में अमेरिकी नौसेना का बढ़ता जमावड़ा महज ड्रग तस्करों रोकने के लिए नहीं, बल्कि इसी 'सर्जिकल स्ट्राइक' के लिए था। ट्रंप ने इसे एक बड़ी जीत बताते हुए "मिशन कामयाब" जैसा माहौल बना दिया है। मादुरो पर मादक पदार्थों की तस्करी और मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं, और अब उन पर अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है।

"हम देश चलाएंगे": ट्रंप का इरादा क्या है ?

ट्रंप ने मार-ए-लागो में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक एक सुरक्षित और उचित सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता, तब तक "अमेरिका ही वेनेजुएला को चलाएगा।" हालांकि, यह बयान कई पेचीदा सवाल खड़े करता है:

सैन्य नियंत्रण का अभाव: अमेरिका ने केवल मादुरो को पकड़ा है, पूरे देश पर कब्जा नहीं किया है।

तंत्र अभी भी वही है: मादुरो तो चले गए, लेकिन उनकी सेना, पुलिस, नेशनल गार्ड और खुफिया एजेंसियां अभी भी सक्रिय हैं।

लोकतंत्र की अनदेखी: ट्रंप ने चुनाव जीतने वाले विपक्षी नेताओं (जैसे एडमुंडो गोंजालेज और मारिया कोरिना मचाडो) के बजाय मादुरो की उप-राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बातचीत के संकेत दिए हैं।

लोकतंत्र की बहाली या तेल पर नजर ?

इतिहास गवाह है कि किसी तानाशाह को हटाना आसान होता है, लेकिन उसके बाद एक स्थिर समाज बनाना बेहद कठिन। 1983 में ग्रेनाडा और 1989 में पनामा के आक्रमणों में अमेरिका ने पूरे देश का नियंत्रण लिया था, जिससे वहां लोकतंत्र बहाल हो सका। लेकिन वेनेजुएला में स्थिति अलग है।

वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नजर (Venezuela Oil Reserves)

ट्रंप का मुख्य ध्यान वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नजर आता है। उन्होंने खुले तौर पर कहा है कि वह चाहते हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वहां वापस लौटें और वेनेजुएला उन संपत्तियों को लौटाए जिन्हें उसने दशकों पहले राष्ट्रीयकृत किया था। अगर अमेरिका केवल तेल संसाधनों के दोहन पर ध्यान देता है, तो उसे स्थानीय जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

आगे की राह: क्या इराक जैसी गलती दोहराएगा अमेरिका ?

मादुरो के हटने से वेनेजुएला के लोगों को एक दमनकारी शासन से मुक्ति तो मिली है, लेकिन 'शून्यता' (Power Vacuum) का खतरा बढ़ गया है। यदि अमेरिका वहां "नेशन बिल्डिंग" यानी राष्ट्र निर्माण के बजाय केवल व्यापारिक हितों को साधेगा, तो अराजकता फैल सकती है।

सशस्त्र समूह अभी भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं

मादुरो के वफादार मंत्री और सशस्त्र समूह अभी भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में ट्रंप का यह कहना कि वह "देश चलाएंगे", जमीनी हकीकत से दूर लग रहा है क्योंकि वहां कोई अमेरिकी सैन्य उपस्थिति नहीं है जो कानून-व्यवस्था संभाल सके।

क्या यह ऑपरेशन अमेरिका में लोकतंत्र के नए युग की शुरुआत करेगा

बहरहाल, वेनेजुएला एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा हुआ है। क्या यह ऑपरेशन दक्षिण अमेरिका में लोकतंत्र के नए युग की शुरुआत करेगा, या यह केवल तेल संसाधनों पर कब्जे की एक रणनीतिक चाल बन कर रह जाएगा? आने वाले कुछ हफ़्ते ही ट्रंप प्रशासन की असली नीति और वेनेजुएला की किस्मत का फैसला करेंगे।

(वॉशिंगटन पोस्ट का यह आलेख Patrika .com पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)


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