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देश का अधिकांश डेटा ट्रैफिक 4G पर निर्भर, 25% डेटा ही 5G पर, ऐसे में कौन-सा फोन खरीदना होगा सही?

क्या आप सोचते हैं कि 5G स्मार्टफोन खरीदना जरूरी है या 4G से काम चल जाएगा? जानिए, आपके लिए सही विकल्प क्या हो सकता है, ताकि आप तकनीक के इस नए युग में पीछे न रह जाएं और सही फोन पर पैसा खर्च कर पाए।
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 13, 2026

4g vs 5g compare

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

भारत में 4G और 5G स्मार्टफोन के बीच चयन करना अब सिर्फ तकनीकी सवाल नहीं रहा - यह एक व्यावहारिक खरीदारी निर्णय बन चुका है। 2026 में 5G नेटवर्क की पहुंच और फोन की कीमतें दोनों ही बदल चुकी हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर हो सकता है, और खरीदारी से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

5G की वर्तमान स्थिति

पहली नजर में, 5G अब सिर्फ भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि आज की जरूरत बन चुकी है। भारत में 5G सेवाएं अक्टूबर 2022 में शुरू हुईं और सरकार द्वारा फरवरी 2026 में संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार अब देश के 99.9% जिलों में उपलब्ध हैं।

2026 तक 5G बेस ट्रांसिवर स्टेशन (BTS) की संख्या 5.6 लाख से अधिक (जून 2026 तक 5,62,971) हो चुकी है - मार्च 2023 में यह संख्या केवल 1,40,623 थी। यह दुनिया के सबसे तेज़ 5G रोलआउट में से एक माना जा रहा है।

(नोट: गांवों में विशेष रूप से 5G कवरेज का कोई अलग आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सरकार के अनुसार देश के लगभग 98.4% गांव - यानी 6,34,000 से अधिक गांव - किसी न किसी मोबाइल नेटवर्क (4G/5G मिलाकर) से कवर हैं।)

डेटा उपयोग और स्पीड

लेकिन कवरेज का मतलब यह नहीं कि हर जगह 5G का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में देश में कुल वायरलेस डेटा उपयोग का लगभग 25% हिस्सा ही 5G नेटवर्क पर हुआ था। यानी, अभी भी अधिकांश डेटा ट्रैफिक 4G पर ही निर्भर है।

स्पीड की बात करें तो असली तस्वीर ऑपरेटर और शहर के हिसाब से काफी अलग-अलग है। TRAI के 2026 के ड्राइव टेस्ट के अनुसार:

  • दिल्ली: Jio — 243.98 Mbps, Airtel — 169.80 Mbps, Vodafone Idea — 26.26 Mbps
  • हरिद्वार-ऋषिकेश: Jio — 205.57 Mbps, Airtel — 128.99 Mbps, Vi — 58.46 Mbps
  • उडुपी: Jio — 197.40 Mbps, Airtel — 96.45 Mbps, Vi — 23.09 Mbps

यानी 5G की वास्तविक फील्ड स्पीड आमतौर पर लगभग 25–250 Mbps के बीच रहती है, ऑपरेटर पर निर्भर करते हुए — न कि एक समान 300–500 Mbps। Jio अभी सबसे तेज़ 5G ऑपरेटर के रूप में उभरा है। इसकी तुलना में 4G नेटवर्क पर स्पीड आमतौर पर 5–20 Mbps के आसपास रहती है, हालांकि यह भी क्षेत्र और भीड़भाड़ के हिसाब से बदलती रहती है।

क्या आपको 5G स्मार्टफोन खरीदना चाहिए?

अब सवाल यह है: क्या आपको अभी 5G स्मार्टफोन खरीदना चाहिए? इसका जवाब आपके उपयोग और जरूरतों पर निर्भर करता है।

यदि आप:

  • शहर में रहते हैं और आपके आसपास 5G कवरेज अच्छा है (खासकर Jio या Airtel का नेटवर्क),
  • वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, क्लाउड ऐप्स या वीडियो कॉलिंग जैसे काम करते हैं,
  • या भविष्य के लिए फोन खरीद रहे हैं जिसे आप 4–5 साल तक इस्तेमाल करना चाहते हैं,

तो 5G फोन आपके लिए बेहतर विकल्प है। पिछले कुछ वर्षों में 5G फोन की कीमतें काफी गिरी हैं, और अब बजट सेगमेंट में भी 5G सपोर्ट वाले फोन आसानी से मिल जाते हैं (सटीक कीमत रेंज मॉडल और ब्रांड पर निर्भर करती है, इसलिए खरीदने से पहले मौजूदा बाजार भाव जरूर जांच लें)।

5G की तकनीकी प्रगति

इसके अलावा, 5G-Advanced (3GPP Release 18) और Standalone 5G (SA) जैसी तकनीकें अब आम हो रही हैं। ये तकनीकें सिर्फ स्पीड ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि कम लेटेंसी, बेहतर बैटरी प्रबंधन, सैटेलाइट बैकअप और सटीक इनडोर नेविगेशन जैसी सुविधाएं भी देती हैं।

NSA बनाम SA 5G - फर्क समझना जरूरी

भारत में 5G दो तरह से काम करता है, और यह फर्क समझना खरीदारी के लिए अहम है:

  • NSA (Non-Standalone): इसमें 5G नेटवर्क, 4G के "कोर" ढांचे पर टिका होता है। ज्यादातर शुरुआती 5G रोलआउट इसी तरह के थे। Airtel ने ज्यादातर NSA मॉडल पर शुरुआत की थी।
  • SA (Standalone): यह पूरी तरह स्वतंत्र 5G नेटवर्क है, जिसमें कोर भी 5G का ही होता है। इससे लेटेंसी कम होती है, बैटरी बेहतर चलती है, और नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी एडवांस सुविधाएं मिलती हैं। Jio ने भारत में शुरू से ही SA मॉडल अपनाया।

फोन खरीदते समय अगर आपका ऑपरेटर SA नेटवर्क इस्तेमाल करता है (जैसे Jio), तो सुनिश्चित करें कि आपका फोन SA 5G को सपोर्ट करता है, वरना आपको 5G आइकन तो दिखेगा पर पूरी स्पीड और फायदे नहीं मिलेंगे।

ऑपरेटर चुनना भी उतना ही जरूरी है जितना फोन चुनना

ऊपर दिए गए TRAI आंकड़ों से एक बात साफ है - सिर्फ 5G फोन खरीद लेना काफी नहीं, आपका नेटवर्क ऑपरेटर भी उतना ही मायने रखता है। अलग-अलग शहरों के टेस्ट में Jio लगातार सबसे तेज़ डाउनलोड स्पीड दे रहा है, Airtel अक्सर दूसरे नंबर पर और अपलोड स्पीड में कई बार आगे रहता है, जबकि Vodafone Idea और BSNL अभी नेटवर्क विस्तार के मामले में पीछे हैं। इसलिए फोन खरीदने से पहले अपने इलाके में यह जरूर जांच लें कि कौन सा ऑपरेटर बेहतर 5G कवरेज और स्पीड देता है - इसके लिए आप TRAI MySpeed ऐप या Ookla Speedtest जैसे टूल्स से अपने क्षेत्र का हाल जांच सकते हैं।

5G फोन खरीदते समय चेकलिस्ट

सिर्फ "5G सपोर्ट है" लिखा देखकर फोन खरीदना काफी नहीं। नीचे दी गई बातों पर गौर करें:

  1. 5G बैंड सपोर्ट: फोन में भारत के प्रमुख बैंड्स — n1, n3, n5, n8, n28, n40, n41, n77, n78 — में से ज्यादातर का सपोर्ट होना चाहिए। कुछ सस्ते फोन सीमित बैंड्स ही सपोर्ट करते हैं, जिससे कुछ इलाकों में स्पीड कम मिलती है।
  2. NSA/SA सपोर्ट: ऊपर बताए अनुसार, अपने ऑपरेटर के हिसाब से जांचें।
  3. प्रोसेसर और रैम: कम से कम 6-8GB रैम और भरोसेमंद चिपसेट (जैसे Snapdragon, Dimensity, या Exynos की मिड-रेंज सीरीज) देखें ताकि 5G की तेज स्पीड का असली फायदा मिल सके।
  4. बैटरी और चार्जिंग: 5G ज्यादा पावर खींचता है, इसलिए बड़ी बैटरी (5000mAh के आसपास) और तेज़ चार्जिंग देखना समझदारी है।
  5. सॉफ्टवेयर अपडेट पॉलिसी: ब्रांड कम से कम 2-3 साल के OS अपडेट और सिक्योरिटी पैच देता हो, ताकि फोन लंबे समय तक चल सके।
  6. VoNR सपोर्ट: Voice over New Radio यानी 5G नेटवर्क पर ही कॉलिंग की सुविधा - यह अभी सभी फोन और सभी सर्किल में उपलब्ध नहीं, पर धीरे-धीरे बढ़ रही है।

आम गलतफहमियां

  • "5G फोन का मतलब हमेशा तेज इंटरनेट" - गलत। अगर आपके इलाके में 5G टावर कमजोर है या भीड़भाड़ ज्यादा है, तो स्पीड 4G जैसी भी हो सकती है।
  • "5G ज्यादा बैटरी खाता है, इसलिए नुकसानदेह है" - आंशिक रूप से सही, लेकिन नए चिपसेट (जैसे 4nm/5nm प्रोसेसर) इस समस्या को काफी हद तक कम कर चुके हैं।
  • "सस्ते 5G फोन में भी पूरी स्पीड मिलेगी" - जरूरी नहीं, क्योंकि बजट फोन अक्सर सीमित बैंड्स और कमजोर एंटीना डिज़ाइन के साथ आते हैं।

भविष्य की झलक: 6G की तैयारी

दिलचस्प बात यह है कि जहां आम उपभोक्ता अभी 4G से 5G में बदलाव कर रहे हैं, वहीं सरकार पहले से ही 6G पर काम शुरू कर चुकी है। दूरसंचार मंत्रालय ने भारत 6G विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया है और टेलिकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) के तहत 100 से ज्यादा शोध परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है, जिनमें से अधिकतर 6G तकनीक से जुड़ी हैं। हालांकि 6G के व्यावसायिक इस्तेमाल में अभी कई साल लगेंगे, इसलिए अभी फोन खरीदते समय इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है - 5G अगले 4-5 साल तक मुख्यधारा की तकनीक बनी रहेगी।

4G का विकल्प

लेकिन अगर आपका मौजूदा 4G फोन ठीक काम कर रहा है, और आप अभी फोन बदलने की सोच नहीं रहे, तो अभी डेटा ट्रैफिक को देखते हुए 4G पर बने रहना भी समझदारी हो सकती है। 4G नेटवर्क आने वाले कई सालों तक काम करता रहेगा, और अगर आपके क्षेत्र में मुख्य रूप से Vi या BSNL जैसा नेटवर्क है जहां 5G स्पीड अभी सीमित है, तो 5G फोन का तुरंत फायदा उतना नहीं मिलेगा।

फोन खरीदते समय सिर्फ 5G सपोर्ट पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। आपको प्रोसेसर, रैम, स्टोरेज, डिस्प्ले, बैटरी और सॉफ्टवेयर अपडेट पॉलिसी जैसी चीजों पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही, फोन में भारत में उपयोग होने वाले 5G बैंड्स (जैसे n28, n78 आदि) का सपोर्ट होना भी जरूरी है - ये भारत के प्रमुख 5G बैंड हैं।

तुलना तालिका

पहलू4G फोन5G फोन (2026)
कवरेजव्यापक, लगभग सभी क्षेत्रों में99.9% जिलों में उपलब्ध, ऑपरेटर पर निर्भर गुणवत्ता
औसत डाउनलोड स्पीड~5–20 Mbps~25–250 Mbps (ऑपरेटर व शहर पर निर्भर, Jio सबसे तेज़)
कुल डेटा ट्रैफिक हिस्सेदारीलगभग 75%लगभग 25% (FY25)
बैटरीबेहतर जब 5G नहीं हैआधुनिक चिपसेट से बैटरी प्रभाव कम हो रहा
भविष्य-प्रूफिंगसीमितबेहतर, आने वाले वर्षों तक उपयोगी
स्रोत: TRAI ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट्स (2026), दूरसंचार मंत्रालय के राज्यसभा में दिए गए आंकड़े (फरवरी-जून 2026)।

अंत में, अगर आप नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो 5G फोन लेना समझदारी है - कवरेज अब लगभग पूरे देश में है और यह भविष्य के लिए बेहतर निवेश है। लेकिन अगर आपका 4G फोन अभी ठीक चल रहा है और आप जल्द बदलाव नहीं चाहते, तो अभी 4G पर बने रहना भी एक व्यावहारिक विकल्प है - खासकर अगर आपके इलाके में 5G स्पीड का फायदा सीमित है।

अब अगला कदम आपके हाथ में है - अपने उपयोग, बजट, अपने ऑपरेटर की 5G गुणवत्ता और कवरेज के हिसाब से सोच-समझकर निर्णय लें।