
बॉबी का नया रूप (AI)
सिनेमा हमेशा से समाज का आईना रहा है, लेकिन कभी-कभी यह आईना उन कोनों की तरफ घूम जाता है जहां रोशनी डालने से अक्सर बचा जाता है। निर्देशक अनुराग कश्यप और अभिनेता बॉबी देओल का आगामी प्रोजेक्ट ‘बंदर’ (Bandar) इसी दिशा में एक ऐसा कदम माना जा रहा है, जिसने रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया और बौद्धिक मंचों पर तीखी बहस छेड़ दी है। फिल्म का केंद्रीय विषय #MeTooForMen यानी पुरुषों के खिलाफ होने वाले मानसिक, शारीरिक और कानूनी शोषण के इर्द-गिर्द बुना गया है।
फिल्म ‘बंदर’ के डिजिटल प्रीमियर को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है।
प्लेटफॉर्म: ZEE5
रिलीज डेट: 28 अगस्त
स्टार कास्ट: बॉबी देओल (मुख्य भूमिका), सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी और सबा आजाद
निर्देशक: अनुराग कश्यप
जी5 (Zee5) के आधिकारिक बयान के अनुसार, फिल्म 28 अगस्त से प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी।
साल 2018 में जब भारत में #MeToo आंदोलन की लहर आई थी, तब इसने सत्ता, पद और प्रभाव के दुरुपयोग की कई परतों को खोला था। महिलाओं को अपनी आपबीती साझा करने का मंच मिला और इसे बड़े पैमाने पर सामाजिक समर्थन हासिल हुआ।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पहलू भी सामने आया है जेंडर-न्यूट्रल जस्टिस (Gender-Neutral Justice)। समाज के एक बड़े तबके का मानना है कि शोषण का कोई एक जेंडर नहीं होता। अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ इसी संवेदनशील बिंदु को छूती है:
‘बंदर’ की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के संघर्ष को दर्शाती है जो एक बंद कमरे के विवाद और उसके बाद सोशल मीडिया व कानूनी शिकंजे में फंस जाता है। यह कहानी सिर्फ किसी एक घटना की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जहां 'धारणा' (Perception) तथ्यों से ज्यादा तेजी से फैसले सुना देती है।
फिल्म में मुख्य रूप से तीन पहलू देखने को मिलेंगे:
डिजिटल मीडिया के इस दौर में हर मुद्दा तुरंत ब्लैक-एंड-व्हाइट कर दिया जाता है। या तो कोई पूरी तरह सही होता है या पूरी तरह गलत। ‘बंदर’ उस ‘ग्रे जोन’ में कदम रखती है जिसे छूने से मेनस्ट्रीम सिनेमा कतराता रहा है।
इस तरह के प्रोजेक्ट्स के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि कहीं इसे वास्तविक महिला अधिकारों और #MeToo जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों को कमजोर करने के प्रयास के रूप में न देख लिया जाए। मेकर्स के लिए संतुलन साधना सबसे कठिन काम होगा।
यदि फिल्म केवल सनसनीखेज बनने के बजाय निष्पक्षता और मानवीय संवेदना के साथ पुरुष उत्पीड़न के वास्तविक मामलों को सामने लाती है, तो यह भारतीय सिनेमा में जेंडर डिस्कोर्स को एक नई दिशा दे सकती है।
बॉबी देओल और अनुराग कश्यप की ‘बंदर’ सिर्फ एक सस्पेंस ड्रामा नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के उस अनकहे सच से सामना कराने की कोशिश है जिस पर अमूमन चुप्पी साध ली जाती है। ओटीटी पर इसकी रिलीज के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय दर्शक इस जटिल और संवेदनशील विषय को किस रूप में स्वीकार करते हैं।
Updated on:
21 Aug 2026 01:54 pm
Published on:
21 Aug 2026 01:54 pm
