
प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने देश को एक बार फिर यह याद दिलाया है कि जलवायु संकट से बड़ा कोई संकट नहीं। अब यह समय के साथ विनाशकारी समस्या बनती दिख रही है। इस आपदा के बाद नेपाल के मंत्री न्याय और जलवायु न्याय की मांग जोर-शोर से उठा रहे हैं। आइए जानते हैं, क्या कहा गया, जलवायु न्याय क्या है, कानून क्या कहते हैं, और क्या इससे पहले किसी देश ने ऐसी मांग उठाई है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने हाल ही में नेपाल में आए भीषण हिमस्खलन और बाढ़ को एक सामान्य आपदा नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताया है। यह घटना हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के साथ बढ़ते जोखिमों को दर्शाती है।
नेपाल की कृषि, वन और पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने हाल ही में कहा कि सरकार को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार जलवायु न्याय को एक अधिकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित नहीं करती, तब तक इस संकट को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह बात विशेषज्ञों के साथ एक चर्चा के दौरान कही, जिसमें हालिया भोटेकोशी बाढ़ के नुकसान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे की मांग पर विचार किया गया।
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन के प्रति एकजुट प्रतिक्रिया की अपील की। उन्होंने कहा कि नेपाल का वैश्विक उत्सर्जन में हिस्सा मात्र 0.1% है, फिर भी नेपाल जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा शिकार बन रहा है।
जलवायु न्याय का अर्थ है कि वे देश या समुदाय, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, उन्हें इसके लिए भुगतना नहीं चाहिए। यह न्याय की मांग है - मुआवजा, वित्तीय सहायता और जिम्मेदार देशों की जवाबदेही। यह केवल सहायता नहीं, बल्कि एक अधिकार है।
नेपाल जैसे देश, जिनका योगदान वैश्विक उत्सर्जन में नगण्य है, लेकिन वे सबसे अधिक प्रभावित हैं, वे जलवायु न्याय की मांग करते हैं - यह मांग केवल सहायता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय न्याय की मांग है।
नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने 25 दिसंबर 2018 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अधिवक्ता पदम बहादुर श्रेष्ठ की याचिका पर कोर्ट ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक समेकित कानून बनाना आवश्यक है, जो जलवायु न्याय, पर्यावरण संरक्षण और पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को शामिल करे।
इसके बाद सरकार ने 2019 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रावधान शामिल किए, हालांकि यह एक अलग जलवायु कानून नहीं था।
इसके अलावा, नेपाल के संविधान और अन्य नीतियों जैसे कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 2019, राष्ट्रीय जलवायु नीति 2019, वन अधिनियम 2019, आपदा जोखिम न्यूनीकरण अधिनियम 2017 आदि में जलवायु न्याय और संवेदनशील समूहों की रक्षा का उल्लेख है, लेकिन इनकी कार्यान्वयन क्षमता सीमित है।
हां, वैश्विक स्तर पर कई देशों और समुदायों ने जलवायु न्याय की मांग की है। उदाहरण के लिए, पेरू के किसान ल्लुइया ने एक यूरोपीय ऊर्जा कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने कहा कि कंपनी को उनके घर की बाढ़ सुरक्षा के खर्च का हिस्सा वहन करना चाहिए क्योंकि वह ग्लोबल वार्मिंग में योगदान दे रही है।
इसके अलावा, नेपाल ने 2023 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में एक सलाहकार राय के लिए आवेदन में भाग लिया, जिसमें उसने कहा कि विकसित देशों को उनके ऐतिहासिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और जलवायु न्याय के सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय कानून में शामिल किया जाना चाहिए।
नेपाल ने हाल ही में UNFCCC के Loss and Damage Fund से भोटेकोशी बाढ़ के लिए वित्तीय सहायता की मांग की है। सरकार ने लिखा है कि नेपाल ने इस समस्या में बहुत कम योगदान दिया है, फिर भी उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
साथ ही, सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक 10-बिंदु वाला पत्र जारी किया है, जिसमें जलवायु न्याय और मुआवजे की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक जोर से उठाने का आह्वान शामिल है।
नेपाल की यह मांग केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह वैश्विक न्याय की पुकार है। जब एक देश, जिसका उत्सर्जन में योगदान नगण्य है, उसे भारी नुकसान झेलना पड़ता है, तो यह सवाल उठता है कि जिम्मेदार कौन है और न्याय कैसे मिलेगा।
यदि नेपाल को Loss and Damage Fund से सहायता मिलती है, तो यह एक उदाहरण बनेगा कि कैसे छोटे और कमजोर देश न्याय की मांग कर सकते हैं। इससे भविष्य में अन्य देश भी प्रेरित होंगे।
इस बाढ़ ने हमें दिखाया है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की समस्या नहीं, बल्कि हमारे घर की समस्या है। न्याय की यह मांग केवल नेपाल की नहीं, बल्कि उन सभी देशों की है जो इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
Updated on:
02 Sept 2026 12:14 pm
Published on:
02 Sept 2026 12:14 pm
