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एक अनजान कॉल और आपका खाता खाली! वॉइस फिशिंग से कैसे बचें? अपनाएं ये जरूरी सुरक्षा उपाय

क्या आप जानते हैं कि एक अनजान फोन कॉल आपकी पूरी जिंदगी और मेहनत की गाढ़ी कमाई को संकट में डाल सकती है? आज जब साइबर ठग नए-नए तकनीकी हथकंडे और मनोवैज्ञानिक दबाव अपना रहे हैं, तब थोड़ी सी सतर्कता और सही जानकारी आपको करोड़ों के नुकसान से बचा सकती है। जानिए विशिंग, डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक और फर्जी कॉल्स से बचाव के आसान व असरदार उपाय।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 18, 2026

Scam

अनजान नंबर से कॉल? (AI)

डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी दिनचर्या, बैंकिंग, व्यापार और सामाजिक संवाद का केंद्र बन चुका है। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं का दायरा बढ़ा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के तरीके भी बेहद शातिर और आधुनिक हो गए हैं। आजकल 'वॉइस-फिशिंग' (Voice-Phishing) या संक्षेप में 'विशिंग' (Vishing) के जरिए साइबर ठगी का खतरा अभूतपूर्व रूप से बढ़ चुका है।

अक्सर एक सामान्य घंटी बजती है, और स्क्रीन पर कोई अनजान नंबर चमकता है। फोन उठाने पर दूसरी तरफ से कभी खुद को बैंक का मैनेजर, कभी पुलिस कमिश्नर, कभी कस्टम्स या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी, तो कभी किसी नामी कूरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताया जाता है। कॉलर की आवाज में इतना आत्मविश्वास, गंभीरता और अधिकार होता है कि एक पल के लिए कोई भी सामान्य नागरिक सहम जाए। उनका मूल उद्देश्य केवल एक ही होता है आपकी निजी जानकारी, गोपनीय पासवर्ड, ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN) या बैंक खाता विवरण चुराना। थोड़ी सी असावधानी या घबराहट में उठाया गया एक गलत कदम इंसान की जीवनभर की बचत को पलक झपकते ही गायब कर देता है।

डर, लालच और जल्दबाजी: ठगों का मनोवैज्ञानिक खेल

साइबर अपराधी केवल तकनीक के जानकार नहीं होते, बल्कि वे इंसानी मनोविज्ञान और मानवीय कमजोरियों के भी माहिर खिलाड़ी होते हैं। उनके पूरे तंत्र का संचालन मुख्य रूप से तीन मानवीय भावनाओं पर टिका होता है: डर, जल्दबाजी और लालच।

ठग जब कॉल करते हैं, तो वे पीड़ित को सोचने, समझने या किसी परिजन से सलाह लेने का तनिक भी समय नहीं देते। वे ऐसी आपातकालीन परिस्थितियां गढ़ते हैं:

  • खाता या केवाईसी (KYC) ब्लॉक होने की धमकी: यदि आपने अगले 24 घंटे में अपनी ई-केवाईसी अपडेट नहीं की, तो आपका बैंक खाता या सिम कार्ड हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा।
  • बिजली, पानी या गैस कनेक्शन का संकट: आपका पिछला बिल अपडेट नहीं है, आज रात 9:30 बजे बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। तुरंत इस नंबर पर संपर्क करें या ऐप डाउनलोड करें।
  • भारी मुनाफे या लॉटरी का लालच: आपको अंतरराष्ट्रीय लकी ड्रॉ, सरकारी योजना या क्रिप्टो निवेश में लाखों का इनाम मिला है, जिसे क्लेम करने के लिए मामूली प्रोसेसिंग फीस या पिन साझा करें।
  • अहम सुरक्षा सिद्धांत: हमेशा यह गांठ बांध लें कि कोई भी वास्तविक बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आयकर विभाग, पुलिस या प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान कभी भी फोन कॉल, एसएमएस या व्हाट्सएप पर आपसे गुप्त पासवर्ड, ओटीपी, सीवीवी (CVV) या यूपीआई पिन की मांग नहीं करता। यूपीआई पिन का इस्तेमाल केवल पैसे भेजने (Debit) के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने (Credit) के लिए कभी पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती।

'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम: अरबों की चपत लगाता नया खौफ

हाल के वर्षों में सबसे तेजी से उभरा और खतरनाक साबित हुआ साइबर अपराध है डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) स्कैम।

इस प्रकार की ठगी में शातिर अपराधी खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), राज्य पुलिस या सीमा शुल्क (Customs) का वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं। वे फोन पर पीड़ित से कहते हैं कि उनके नाम से कोई पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें मादक पदार्थ (ड्रग्स), अवैध पासपोर्ट, जाली दस्तावेज या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संदिग्ध नकदी पाई गई है। इसके बाद पीड़ित को तुरंत स्काइप, व्हाट्सएप या अन्य वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म पर जुड़ने के लिए विवश किया जाता है। वीडियो कॉल पर बाकायदा पुलिस थाने, कोर्ट रूम या सरकारी कार्यालय जैसा बैकग्राउंड तैयार रहता है, जहां खाकी वर्दी पहने फर्जी अधिकारी मौजूद होते हैं। वे पीड़ित को स्क्रीन के सामने लगातार बंधक बनाए रखते हैं और इसे 'डिजिटल अरेस्ट' का नाम देते हैं।

हकीकत और भयावह आंकड़े

कानूनी तथ्य: भारतीय न्याय प्रणाली और कानूनी प्रावधानों में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई व्यवस्था या प्रक्रिया मौजूद नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी नागरिक की गिरफ्तारी, न्यायिक हिरासत या जुर्माने का फैसला नहीं कर सकती।

आर्थिक नुकसान: वर्ष 2022 से मई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल डिजिटल अरेस्ट और उससे मिलते-जुलते स्कैम्स के जरिए भारतीय नागरिकों को लगभग ₹4,057.7 करोड़ का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।

तुरंत करें यह काम: जैसे ही कोई कॉलर खुद को जांच एजेंसी का अफसर बताकर वीडियो कॉल करने या डिजिटल अरेस्ट की बात करे, बिना किसी झिझक के तुरंत कॉल काटें और राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।

डीपफेक और एआई (AI) वॉइस क्लोनिंग की नई चुनौती

साइबर जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। अब अपराधियों को किसी को ठगने के लिए अजनबी बनने की भी जरूरत नहीं रही।

  • वॉइस क्लोनिंग (Voice Cloning): सोशल मीडिया रील्स, वीडियो या सार्वजनिक भाषणों से महज कुछ सेकंड का ऑडियो सैंपल लेकर एआई की मदद से किसी भी व्यक्ति की हूबहू आवाज तैयार कर ली जाती है। इसके बाद पीड़ित को कॉल कर रिश्तेदार, बच्चे या दोस्त की आवाज में कहा जाता है "मैं गंभीर संकट/दुर्घटना/पुलिस हिरासत में फंस गया हूं, मुझे तुरंत 50 हजार रुपये इस खाते में ट्रांसफर करो।
  • डीपफेक वीडियो कॉल: वीडियो कॉल पर परिजनों का चेहरा सुपरइम्पोज कर भ्रम पैदा किया जाता है।
  • बचाव का अचूक तरीका: यदि किसी परिचित की आवाज में अचानक कोई पैनिक (घबराहट) भरा कॉल आए और फौरन पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाए, तो तुरंत वह कॉल काटें। इसके बाद उस व्यक्ति के मूल व सत्यापित फोन नंबर पर खुद कॉल करके मामले की सत्यता की पुष्टि करें।

सरकारी व तकनीकी उपाय: TRAI और चक्षु पोर्टल की भूमिका

साइबर सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए भारत सरकार, दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने कई बड़े तकनीकी रक्षा कवच तैयार किए हैं:

  • सीआईओआर सिस्टम (CIOR System): दूरसंचार विभाग द्वारा अक्टूबर 2024 से लागू किए गए इस अत्याधुनिक सिस्टम के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल्स पर कड़ी नकेल कसी गई है। इसके तहत रोजाना लगभग 1.35 करोड़ फर्जी स्पूफ कॉल्स को नेटवर्क स्तर पर ही ब्लॉक किया जा रहा है, जिससे स्पूफ कॉलिंग में 99% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • संचार साथी का 'चक्षु' (Chakshu) पोर्टल: यदि आपको कोई भी संदिग्ध कॉल, एसएमएस या व्हाट्सएप मैसेज मिलता है जिसमें लॉटरी, नौकरी, पार्ट-टाइम टास्क या सरकारी नाम का दुरुपयोग हो, तो नागरिक 'संचार साथी' (sancharsaathi.gov.in) पर जाकर 'चक्षु' सुविधा के अंतर्गत उस नंबर की रिपोर्ट कर सकते हैं।
  • TRAI DND ऐप: ट्राई का स्पष्ट परामर्श है कि केवल अपने फोन में स्पैम नंबर को 'ब्लॉक' कर देना पर्याप्त नहीं है। यदि आप TRAI DND 3.0 ऐप के माध्यम से स्पैम और अनचाही कॉल्स की आधिकारिक रिपोर्ट करते हैं, तो दूरसंचार कंपनियां उन कनेक्शनों की जांच कर उन्हें स्थाई रूप से काट देती हैं और अपराधियों की पहचान सुनिश्चित होती है।

संदिग्ध कॉल की त्वरित पहचान

यदि किसी कॉल के दौरान आपको निम्नलिखित में से कोई भी बात सुनाई दे, तो समझ जाएं कि यह 100% साइबर स्कैम है:

  • दबाव व अल्टीमेटम: आपका बैंक खाता, सिम कार्ड या एटीएम 24 घंटे में स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।
  • गोपनीय डेटा की मांग: वेरिफिकेशन के लिए आपके मोबाइल पर आया ओटीपी या पिन बताइए।
  • रिमोट एक्सेस ऐप्स: समस्या ठीक करने के लिए प्ले स्टोर से AnyDesk, TeamViewer, QuickSupport या कोई अज्ञात .apk फाइल इंस्टॉल करें।
  • अचानक कानूनी कार्रवाई: कस्टम्स, नारकोटिक्स, सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट से आपके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुआ है।

नंबर और कॉलर आईडी की जांच कैसे करें?

विदेशी कंट्री कोड्स से सतर्क रहें: यदि आपके फोन पर अनजान विदेशी कोड जैसे +92 (पाकिस्तान), +234 (नाइजीरिया), +880 (बांग्लादेश), +1 (यूएस/कनाडा) या अन्य असामान्य प्रीफिक्स से सामान्य कॉल या व्हाट्सएप कॉल/मैसेज आता है, तो इसे बिल्कुल न उठाएं।

मोबाइल नंबर बनाम लैंडलाइन: कोई भी प्रतिष्ठित सरकारी विभाग या बैंक मोबाइल नंबरों से आधिकारिक कानूनी नोटिस या जब्ती की जानकारी नहीं देता। सरकारी व बैंक अधिकारी आधिकारिक लैंडलाइन और ई-मेल डोमेन का इस्तेमाल करते हैं।

क्रॉस-वेरिफिकेशन: कॉलर द्वारा बताए गए नंबर या दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। गूगल सर्च करें, संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और वहां दिए गए कस्टमर केयर नंबर पर खुद कॉल करके पड़ताल करें।

अपना डिजिटल सुरक्षा चक्र कैसे मजबूत करें?

साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहने के लिए इन तकनीकी सुरक्षा सावधानियों को अपनी आदत बनाएं:

  • टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य करें: अपने सभी ईमेल, सोशल मीडिया और वित्तीय खातों में टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखें।
  • मजबूत व अलग पासवर्ड: हर प्लेटफॉर्म के लिए जटिल अक्षरों, अंकों और प्रतीकों से युक्त अलग-अलग पासवर्ड बनाएं।
  • व्हाट्सएप वेब सुरक्षा: नियमित रूप से व्हाट्सएप की सेटिंग्स में जाकर 'Linked Devices' की जांच करें। यदि कोई अनजान कंप्यूटर या ब्राउजर एक्टिव दिखे, तो उसे तुरंत 'Log Out' कर दें।
  • ट्रांजैक्शन एसएमएस व ईमेल अलर्ट सक्रिय रखें: बैंक खाते में हर छोटे-बड़े लेन-देन की त्वरित सूचना प्राप्त करने के लिए नोटिफिकेशन हमेशा चालू रखें।
  • सुरक्षित ब्राउजिंग: किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। वेबसाइट का यूआरएल हमेशा जांचें कि वह सुरक्षित 'https://' प्रोटोकॉल से युक्त हो।

पुलिस और सुरक्षा विशेषज्ञों के 4 अचूक नियम

नियम 1: ठहरें और सोचें (Pause & Verify)

जब भी कोई आपको डराए या तुरंत फैसला लेने को कहे, तो एक गहरी सांस लें। जल्दबाजी में कभी कोई वित्तीय कदम न उठाएं।

नियम 2: अनजान वीडियो कॉल से दूरी

अज्ञात नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल्स को कभी स्वीकार न करें। इनमें स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ब्लैकमेलिंग का खतरा रहता है।

नियम 3: ओटीपी व पिन की गोपनीयता

ओटीपी और यूपीआई पिन आपकी तिजोरी की चाबी हैं। इसे दुनिया के किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें।

नियम 4: तत्काल रिपोर्टिंग (Golden Hour)

यदि दुर्भाग्यवश धोखाधड़ी हो जाए, तो पहले 2 से 4 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, बैंक द्वारा फ्रॉड राशि को फ्रीज कराने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

ठगी का शिकार होने पर तुरंत क्या करें?

यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन या टेलीफोनिक वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना समय गंवाए निम्नलिखित कदम उठाएं:

  • राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन: तुरंत डायल करें 1930 (यह 24x7 सक्रिय आपातकालीन सेवा है)।
  • राष्ट्रीय पोर्टल: आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी पूरी शिकायत व स्क्रीनशॉट दर्ज करें।
  • बैंक को सूचित करें: अपने बैंक के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके तुरंत अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग को ब्लॉक करवाएं।

आज के दौर में फर्जी कॉल और साइबर ठगी से बचना केवल तकनीकी साधनों पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत सतर्कता और सामाजिक जागरूकता का विषय बन चुका है। डर, घबराहट और लालच ही साइबर ठगों के सबसे बड़े हथियार हैं। जब आप ठहरकर सोचना, कॉलर के दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना और सही समय पर सूचना देना सीख जाते हैं, तो ठगों के सारे मंसूबे नाकाम हो जाते हैं। याद रखें आपकी सतर्कता और सही जानकारी ही आपकी मेहनत की कमाई की सबसे बड़ी ढाल है।