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यूकेलिप्ट्स की खेती किसानों के लिए कितनी फायदेमंद? कहां लगाएं, कितनी कमाई होती है और लकड़ी किस भाव बिकती है?

Eucalyptus Cultivation : यूकेलिप्ट्स (सफेदा) की खेती कितनी फायदेमंद है? जानिए इसे कहां लगाएं, पौधे की कीमत, 1 एकड़ में संभावित कमाई, लकड़ी का प्रति क्विंटल भाव और सावधानियां।
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Eucalyptus Farming India

Eucalyptus Farming India : यूकेलिप्टस किसानों के लिए कैसे फायदेमंद, PC- Chatgpt

खेती में बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से सीमित मुनाफे के बीच कई किसान अब पेड़ आधारित खेती (Agroforestry) की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें यूकेलिप्ट्स (सफेदा) सबसे लोकप्रिय वृक्षों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तेजी से बढ़ता है, लकड़ी की मांग सालभर बनी रहती है और एक बार पौधे लगाने के बाद देखभाल भी अपेक्षाकृत कम करनी पड़ती है।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में हजारों किसान खेतों की मेड़, खाली भूमि और बागवानी क्षेत्रों में यूकेलिप्ट्स लगाकर अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। हालांकि इसके फायदे जितने हैं, उतनी ही इसकी कुछ सीमाएं भी हैं, इसलिए इसे लगाने से पहले पूरी जानकारी होना जरूरी है।

यूकेलिप्ट्स किसानों के लिए फायदेमंद क्यों माना जाता है?

यूकेलिप्ट्स को तेजी से बढ़ने वाला पेड़ माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह 5 से 7 साल में कटाई योग्य हो जाता है। इसकी लकड़ी का उपयोग कागज उद्योग, प्लाईवुड, पैकिंग बॉक्स, पोल, फर्नीचर और बायोमास उद्योग में किया जाता है। यही वजह है कि इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है।

किसानों को होने वाले प्रमुख फायदे

  • एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक आय का स्रोत बन सकता है।
  • खेत की मेड़ों पर लगाने से मुख्य फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।
  • लकड़ी की मांग स्थिर रहने से बाजार मिलने में आसानी होती है।
  • सिंचाई और रखरखाव की जरूरत कई फसलों की तुलना में कम होती है।
  • कृषि वानिकी (Agroforestry) मॉडल में अतिरिक्त आमदनी मिलती है।

किसान यूकेलिप्ट्स कहां लगा सकते हैं?

यूकेलिप्ट्स को हर जगह लगाना उचित नहीं माना जाता। यह अधिक पानी खींचने वाला पेड़ माना जाता है, इसलिए इसकी योजना सोच-समझकर बनानी चाहिए।

लगाने के उपयुक्त स्थान

  • खेत की मेड़ (बाउंड्री)
  • परती या खाली पड़ी जमीन
  • सड़क किनारे निजी भूमि
  • नहर या खेत की सीमा के आसपास
  • कृषि वानिकी मॉडल के तहत खेतों में निर्धारित दूरी पर
  • जहां लगाने से बचना चाहिए
  • बहुत कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्र
  • छोटे खेत जहां फसल क्षेत्र कम हो सकता हो
  • सब्जी और बागवानी वाली घनी खेती के बीच
  • जलभराव वाली भूमि

एक पौधे की कीमत कितनी होती है? : यूकेलिप्ट्स के पौधे की कीमत नर्सरी, किस्म और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

पौधे का प्रकारअनुमानित कीमत
सामान्य नर्सरी पौधा₹3 से ₹8
उन्नत क्लोनल पौधा₹8 से ₹20
टिश्यू कल्चर/विशेष किस्म₹15 से ₹30

कई राज्यों में कृषि वानिकी योजनाओं के तहत पौधे रियायती दरों पर भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

यूकेलिप्ट्स से कमाई कैसे होती है?

यूकेलिप्ट्स की कमाई मुख्य रूप से उसकी लकड़ी बेचकर होती है। जब पेड़ 5 से 7 साल का हो जाता है, तब उसकी कटाई कर लकड़ी उद्योगों, प्लाईवुड फैक्ट्रियों, पेपर मिलों और स्थानीय व्यापारियों को बेचा जाता है।

कमाई कई बातों पर निर्भर करती है:

  • पौधों की संख्या
  • मिट्टी की गुणवत्ता
  • सिंचाई की उपलब्धता
  • पेड़ों की उम्र
  • बाजार भाव

यूकेलिप्ट्स की लकड़ी कितने रुपये क्विंटल बिकती है?

लकड़ी का भाव राज्य, गुणवत्ता और मांग के अनुसार बदलता रहता है।

लकड़ी का प्रकारअनुमानित भाव
यूकेलिप्ट्स लकड़ी₹500 से ₹1,200 प्रति क्विंटल
कुछ क्षेत्रों में अच्छे ग्रेड की लकड़ी₹1,300–₹1,500 प्रति क्विंटल तक

भाव समय और स्थानीय बाजार की स्थिति के अनुसार ऊपर-नीचे हो सकते हैं।

एक एकड़ में कितनी कमाई हो सकती है?

यदि किसान लगभग 500 से 700 पौधे प्रति एकड़ लगाता है और पेड़ों की अच्छी वृद्धि होती है, तो 5 से 7 वर्ष बाद अच्छी आय प्राप्त हो सकती है।

मदअनुमानित आंकड़ा
पौधों की संख्या500–700
कटाई अवधि5–7 वर्ष
कुल उत्पादन80–150 टन (परिस्थितियों पर निर्भर)
संभावित सकल आय₹3 लाख से ₹10 लाख या अधिक
संभावित शुद्ध लाभलागत घटाने के बाद अच्छा लाभ

नोट: वास्तविक आय बाजार भाव और उत्पादन के अनुसार बदल सकती है।

क्या यूकेलिप्ट्स की खेती में कोई नुकसान भी है?

यूकेलिप्ट्स को लेकर वर्षों से बहस होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सही स्थान और सही संख्या में लगाया जाए तो यह लाभदायक हो सकता है, लेकिन अंधाधुंध रोपण उचित नहीं है। जानें क्या हैं चुनौतियां

  • अधिक पानी की खपत
  • लंबी अवधि का निवेश
  • लकड़ी के भाव में उतार-चढ़ाव
  • कटाई और परिवहन की लागत
  • कुछ क्षेत्रों में फसलों पर प्रतिस्पर्धी प्रभाव

इसीलिए कृषि वैज्ञानिक अक्सर इसे खेत की मेड़ों या कृषि वानिकी मॉडल में लगाने की सलाह देते हैं।