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क्या माइक्रोवेव में खाना पकाने या गर्म करने से विटामिन नष्ट होते हैं? जानिए क्या कहता है साइंस

माइक्रोवेव कुकिंग से खाने का पोषण घटता है? जानिए माइक्रोवेव बनाम पारंपरिक कुकिंग के वैज्ञानिक तथ्य और पोषण बनाए रखने के आसान टिप्स।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 17, 2026

Cooking

माइक्रोवेव कुकिंग (AI)

भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में माइक्रोवेव ओवन हमारी रसोई का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। खाना दोबारा गर्म करना हो या झटपट कोई व्यंजन तैयार करना, माइक्रोवेव समय और ऊर्जा दोनों बचाता है। इसके बढ़ते उपयोग के साथ एक बुनियादी सवाल भी लगातार चर्चा में रहता है; क्या माइक्रोवेव में खाना पकाने या गर्म करने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं? इस विषय को लेकर आम धारणाओं और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच बड़ा अंतर है। वैज्ञानिक शोध और पोषण विज्ञान के आधार पर जानिए माइक्रोवेव कुकिंग के बारे में।

माइक्रोवेव की कार्यप्रणाली: विज्ञान क्या कहता है?

पारंपरिक कुकिंग तरीकों (जैसे गैस चूल्हा या अंगीठी) में बर्तन के नीचे से ताप देकर भोजन को धीरे-धीरे पकाया जाता है। इसके विपरीत, माइक्रोवेव ओवन पूरी तरह से अलग सिद्धांत पर काम करता है:

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें: माइक्रोवेव उपकरण विद्युत-चुंबकीय तरंगें उत्पन्न करता है।

अणुओं का कंपन: ये तरंगें भोजन में मौजूद पानी, वसा और शर्करा के अणुओं को तेजी से कंपित (vibrate) करती हैं।

आंतरिक घर्षण से ऊष्मा: अणुओं के इस तीव्र घर्षण से अंदर ही अंदर गर्मी पैदा होती है, जिससे भोजन बहुत कम समय में पक जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: माइक्रोवेव से निकलने वाली तरंगें गैर-आयनकारी विकिरण (Non-ionizing Radiation) की श्रेणी में आती हैं। इसका अर्थ यह है कि इनमें भोजन के रासायनिक बंधों या डीएनए को तोड़ने की क्षमता नहीं होती। यह भोजन को कतई "रेडियोधर्मी" या जहरीला नहीं बनाता।

पोषक तत्वों पर प्रभाव: तथ्य बनाम भ्रांतियां

पोषण विज्ञान के अनुसार, जब भी भोजन को पकाया जाता है, तो तीन मुख्य कारक पोषक तत्वों के नुकसान के लिए जिम्मेदार होते हैं:

  • तापमान (Heat)
  • पकाने की अवधि (Cooking Time)
  • पानी की मात्रा (Amount of Water)

माइक्रोवेव कुकिंग में भोजन बहुत कम समय में और न्यूनतम पानी के साथ तैयार होता है। इसलिए, अधिकांश मामलों में यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखता है।

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट): कई अंतरराष्ट्रीय शोधों में यह साबित हुआ है कि माइक्रोवेव में पकाने से प्रोटीन, फैट और फाइबर की संरचना में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं आता।

विटामिन C और B-कॉम्प्लेक्स: ये विटामिन्स जल-घुलनशील (Water-soluble) और ताप-संवेदनशील (Heat-sensitive) होते हैं। खुले बर्तन में उबालने पर ये पानी में घुलकर नष्ट हो जाते हैं। माइक्रोवेव में कम पानी और कम समय लगने के कारण विटामिन C का 85% से 90% तक हिस्सा सुरक्षित बच जाता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स और खनिज: सब्जियों में पाए जाने वाले खनिज (जैसे आयरन, कैल्शियम) और फेनोलिक तत्व माइक्रोवेव में भाप (स्टीम) द्वारा पकाने पर काफी हद तक बरकरार रहते हैं।

वैज्ञानिक शोधों के मुख्य निष्कर्ष

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का अध्ययन: ब्रोकली, पालक और अन्य हरी सब्जियों पर किए गए शोध में पाया गया कि माइक्रोवेव में पकाने पर विटामिन C की हानि केवल 14% से 15% के आसपास रही, जबकि पारंपरिक रूप से उबालने पर यह नुकसान 50% से अधिक था।

सब्जियों का पोषण विश्लेषण: बैंगन, बीन्स और मूली जैसी सब्जियों पर हुए प्रयोगों से स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक और माइक्रोवेव कुकिंग के बाद मिलने वाले कुल फाइबर और मिनरल्स में कोई उल्लेखनीय अंतर नहीं होता।

माइक्रोवेव का इस्तेमाल करते समय जरूरी सावधानियां

माइक्रोवेव कुकिंग सुरक्षित और पौष्टिक है, बशर्ते कुछ बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए:

  • सही बर्तनों का चयन: कभी भी साधारण या पतले प्लास्टिक के डिब्बों में खाना गर्म न करें। केवल माइक्रोवेव-सेफ कांच (ग्लास), चीनी मिट्टी (सिरेमिक) या बीपीए-मुक्त सर्टिफाइड कंटेनरों का ही उपयोग करें।
  • समान रूप से गर्म करना: माइक्रोवेव में कभी-कभी भोजन असमान रूप से गर्म होता है, जिससे कुछ हिस्से ठंडे रह सकते हैं (Cold Spots)। इन ठंडे हिस्सों में हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसलिए खाना पकाते या गर्म करते समय बीच में चम्मच से हिलाना जरूरी है।
  • भोजन को ढककर पकाएं: माइक्रोवेव-सेफ ढक्कन या प्लेट से ढकने पर भाप अंदर बनी रहती है, जिससे खाना तेजी से और समान रूप से पकता है।
  • बार-बार गर्म करने से बचें: एक ही भोजन को बार-बार माइक्रोवेव में गर्म करने से उसका स्वाद, बनावट और पोषण तीनों प्रभावित होते हैं। जितनी जरूरत हो, केवल उतना ही हिस्सा गर्म करें।

भोजन की संपूर्ण पौष्टिकता बनाए रखने के व्यावहारिक सूत्र

स्वस्थ और संतुलित आहार सुनिश्चित करने के लिए केवल उपकरण पर निर्भर रहने के बजाय अपनी संपूर्ण रसोई शैली में ये सुधार लाएं:

  • सब्जियों को अधिक न गलाएं: सब्जियों को हल्का क्रंची रखें; जरूरत से ज्यादा पकाने से उनके प्राकृतिक एंजाइम नष्ट हो जाते हैं।
  • उबले हुए पानी की रिसाइ​कलिंग: यदि किसी सब्जी को उबालना ही पड़े, तो उस पानी को फेंकने के बजाय दाल, सूप या आटा गूंथने में इस्तेमाल करें।
  • थाली में विविधता लाएं: अपने दैनिक आहार में मौसमी हरी सब्जियां, रंगीन फल, अंकुरित अनाज, दालें और स्वस्थ वसा (घी, मेवे, बीज) शामिल करें।
  • पकाने के तरीकों का संतुलन: हर दिन एक ही तकनीक पर निर्भर न रहें। आवश्यकतानुसार स्टीमिंग, सॉते (हल्का भूनना), पारंपरिक ग्रिलिंग और माइक्रोवेव का संतुलित मिश्रण अपनाएं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से माइक्रोवेव एक पूरी तरह सुरक्षित, त्वरित और पोषण को संरक्षित रखने वाला आधुनिक माध्यम है। सही बर्तनों के चयन और सही तापमान प्रबंधन के साथ आप भोजन के प्राकृतिक गुणों को खोए बिना समय की बचत कर सकते हैं।