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खाना खाने के बाद सौंफ के साथ मिश्री क्यों खाते हैं, पाचन से लेकर मुंह की ताजगी तक जानिए फायदे और सावधानियां

खाना खाने के बाद सौंफ खाने की परंपरा भारत में लंबे समय से चली आ रही है। सौंफ मुंह की ताजगी के साथ गैस और पेट फूलने जैसी हल्की पाचन संबंधी परेशानियों में मदद कर सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी सौंफ के कुछ यौगिकों के पाचन तंत्र पर संभावित प्रभाव देखे गए हैं।
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Adarsh Thakur

Sep 17, 2026

Saunf Mishri Benifits

सांकेतिक इमेजः Gemini

भारत में खाना खाने के बाद सौंफ और मिश्री खाने की परंपरा काफी पुरानी है। घर हो या किसी खास मौके पर भोजन, खाने के बाद छोटी सी कटोरी में सौंफ और मिश्री देना आम बात है। ज्यादातर लोग इसे मुंह की खुशबू के लिए खाते हैं, लेकिन सौंफ का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी किया जाता रहा है। आधुनिक शोधों में भी सौंफ में मौजूद कुछ यौगिकों के पाचन तंत्र पर संभावित प्रभावों की जांच हुई है।

खाना खाने के बाद सौंफ क्यों खाई जाती है?

सौंफ में एनेथोल जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। इनका संबंध आंतों की मांसपेशियों पर आराम देने वाले प्रभाव से जोड़ा गया है। कुछ शोधों में सौंफ से जुड़े तत्वों ने पेट की ऐंठन और पाचन संबंधी लक्षणों पर संभावित लाभ दिखाया है। हालांकि रोजाना खाना खाने के बाद सौंफ खाने से हर व्यक्ति को समान फायदा मिलेगा, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

खाने के बाद थोड़ी सौंफ चबाने से मुंह में ताजगी भी महसूस होती है। सौंफ का स्वाद और सुगंध भोजन के बाद मुंह की गंध को कुछ समय के लिए कम करने में मदद कर सकते हैं। भारत में इसे पारंपरिक माउथ फ्रेशनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

पेट फूलने में मिल सकती है राहत

भोजन के बाद पेट भारी होना, गैस या पेट फूलना कई लोगों की आम समस्या है। सौंफ को पारंपरिक रूप से ऐसी परेशानियों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके कुछ सक्रिय तत्व पाचन तंत्र की मांसपेशियों को आराम देने में भूमिका निभा सकते हैं।

एक क्लीनिकल अध्ययन में सौंफ के तेल और करक्यूमिन के संयोजन को हल्के से मध्यम स्तर के IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) वाले लोगों में 30 दिनों तक जांचा गया। अध्ययन में लक्षणों और जीवन गुणवत्ता में सुधार देखा गया। लेकिन यह अध्ययन सौंफ और मिश्री को खाना खाने के बाद खाने पर नहीं था, इसलिए इसके परिणाम को सीधे इस घरेलू आदत पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।

मिश्री डालने की जरूरत क्यों पड़ती है?

सौंफ का स्वाद हल्का मीठा होता है। मिश्री इसके स्वाद को और मीठा कर देती है। इसी वजह से सौंफ मिश्री का मिश्रण भोजन के बाद पसंद किया जाता है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। मिश्री भी चीनी का ही एक रूप है। इसलिए इसे स्वास्थ्यवर्धक मानकर ज्यादा मात्रा में खाना उचित नहीं है। खासकर डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या वाले लोगों को मिश्री की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।

कितनी सौंफ खाना ठीक है

खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सौंफ चबाना आम तौर पर एक खाद्य आदत के रूप में लिया जाता है। इसे किसी बीमारी का इलाज समझकर बड़ी मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। सौंफ का तेल या अत्यधिक मात्रा में किसी हर्बल उत्पाद का सेवन सामान्य सौंफ खाने से अलग है।

अगर किसी व्यक्ति को लगातार गैस, पेट दर्द, सीने में जलन, उल्टी या पाचन संबंधी दूसरी समस्या रहती है तो केवल सौंफ पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

मिश्री पर रखें नियंत्रण

खाने के बाद सौंफ खाने की परंपरा का सबसे व्यावहारिक फायदा मुंह की ताजगी और संभावित पाचन सहायता है। सौंफ से जुड़े कुछ वैज्ञानिक प्रमाण भी इसके पाचन तंत्र पर संभावित प्रभाव की ओर संकेत करते हैं, लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा नहीं माना जा सकता।

इसलिए भोजन के बाद सौंफ खाना पसंद है तो सीमित मात्रा में खा सकते हैं। मिश्री का इस्तेमाल स्वाद के लिए कम मात्रा में करना बेहतर है। खासकर रोजाना सेवन करने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छोटी सी मीठी चीज भी कुल चीनी सेवन का हिस्सा होती है।

( डिस्क्लेमरः यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।)