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FYM Manure Guide: गोबर से बनाएं ‘काला सोना’; खेत की पैदावार दोगुनी करने का 100% सही फॉर्मूला

क्या आप जानते हैं कि कच्चा गोबर फसल को फायदा नहीं बल्कि नुकसान पहुंचाता है? जानिए गोबर की वैज्ञानिक खाद बनाने की विधि, खेत में डालने का सही समय, खुराक और सावधानियां।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 30, 2026

Farmer

फसल होगी सुपरफास्ट (AI)

भारतीय कृषि परंपरा में पशुधन और खेती का अटूट संबंध रहा है। रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी) के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग ने पिछले कुछ दशकों में मिट्टी के प्राकृतिक कार्बन और सूक्ष्मजीवों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में गोबर की सड़ी खाद (Farm Yard Manure - FYM) मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करने का सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है।

परंतु सबसे बड़ा सवाल यह है: क्या आप गोबर की खाद सही तरीके से बना और इस्तेमाल कर रहे हैं?

अधिकांश किसान गोबर को खुले में खुले आसमान के नीचे फेंक देते हैं, जिससे धूप, हवा और बारिश के कारण उसके 60% से अधिक पोषक तत्व उड़ जाते हैं या बह जाते हैं।

वैज्ञानिक गड्ढा विधि: उच्च गुणवत्ता वाली खाद कैसे तैयार करें?

गोबर को उच्च कोटि की जैविक खाद में बदलने के लिए गड्ढा विधि (Pit Method) सबसे वैज्ञानिक और असरदार तरीका है।

निर्माण के चरण:

  • छायादार स्थान का चुनाव: गड्ढा हमेशा ऊंचे और छायादार स्थान पर बनाएं ताकि बारिश का पानी अंदर न भरे और तेज धूप से लाभकारी बैक्टीरिया न मरें।
  • परत-दर-परत भराव: तल में 3–4 इंच सूखी पत्तियां या पुआल बिछाएं। इसके ऊपर गोबर और गोमूत्र की परत डालें।
  • बायो-कल्चर का प्रयोग: अपघटन (Decomposition) तेज करने के लिए वेस्ट डीकंपोजर या ट्राइकोडर्मा और छाछ का छिड़काव करें।
  • हवा और सीलिंग: गड्ढे को जमीन की सतह से 1–1.5 फीट ऊपर तक भरकर ऊपर से चिकनी मिट्टी और गोबर के लेप से सील कर दें।
  • पलटाई: लगभग 40–45 दिनों बाद ढेर को एक बार ऊपर-नीचे पलटें ताकि ऑक्सीजन का संचार हो सके। 90–120 दिनों में भुरभुरी, गंधहीन और चायपत्ती के रंग जैसी उत्तम खाद तैयार हो जाती है। गोबर खाद में मौजूद पोषक तत्व
  • सड़ी हुई खाद केवल NPK का स्रोत नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की भौतिक और जैविक संरचना को भी सुधारती है
  • नाइट्रोजन (NO₂) : 0.5% – 0.8% (पौधों की वानस्पतिक वृद्धि और हरियाली के लिए)
  • फॉस्फोरस ( P₂O₅ ) : 0.2% – 0.4% (जड़ों के मजबूत विकास के लिए)
  • पोटाश (KO₂): 0.5% – 0.9% (रोग प्रतिरोधक क्षमता और दाने की चमक के लिए)
  • जैविक कार्बन (Organic Carbon): मिट्टी की जलधारण क्षमता और सूक्ष्मजीवों की संख्या में 3 गुना वृद्धि करता है।

फसलवार उपयोग की मात्रा और सही समय

गोबर की खाद को कभी भी बुआई के ठीक समय नहीं डालना चाहिए। इसे हमेशा बुआई से 20 से 30 दिन पहले खेत में बिखेरकर मिट्टी पलटने वाले हल से मिला देना चाहिए।

फसल वर्गअनुशंसित मात्रा (प्रति हेक्टेयर)सर्वोत्तम समय
अनाज वाली फसलें (गेहूं, धान, मक्का)5 से 8 टन (10-15 ट्रॉली)खेत की पहली गहरी जुताई के समय
दलहन व तिलहन (चना, सरसों, मूंग)3 से 5 टन (6-8 ट्रॉली)बुआई से 3 सप्ताह पूर्व
सब्जियां व नकदी फसलें (आलू, टमाटर, गन्ना)10 से 15 टन (20-25 ट्रॉली)अंतिम जुताई और मेड़ बनाते समय
बागवानी / फलदार पौधे15 से 20 किग्रा प्रति पेड़फल तुड़ाई के बाद या सुप्तावस्था में

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ताज़ा या कच्चा गोबर खेत में डालना

कच्चे गोबर में मीथेन गैस और अमोनिया की उच्च मात्रा होती है, जिससे निकलने वाली गर्मी बीजों के अंकुरण को जला देती है।

कच्चा गोबर दीमक, सफेद लट (White Grub) और फंगस को सीधा आमंत्रण देता है।

खेत में छोटी-छोटी ढेरियां बनाकर छोड़ना:

कई दिनों तक धूप में खुली पड़ी खाद की सारी नाइट्रोजन हवा में वाष्पीकृत हो जाती है। खाद को बिखेरते ही तुरंत जुताई करें।

अत्यधिक पानी या पूर्ण सूखापन:

खाद के गड्ढे में जलभराव होने से सड़ांध पैदा होती है, जबकि अधिक सूखने पर बैक्टीरिया निष्क्रिय हो जाते हैं। 50% नमी बनाए रखें।

रोगग्रस्त पौधों के अवशेष मिलाना:

फंगस या वायरस से ग्रसित पौधों को खाद के गड्ढे में न डालें, अन्यथा बीमारी पूरे खेत में फैल जाएगी।

वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद): एक सुपरफास्ट विकल्प

  • यदि आपके पास 3–4 महीने का समय नहीं है, तो आप वर्मीकम्पोस्टिंग अपना सकते हैं:
  • गोबर को 15 दिन ठंडा होने दें।
  • आइसीनिया फेटिडा (Eisenia foetida) केंचुए डालें।
  • मात्र 45 से 60 दिनों में सामान्य गोबर खाद से 3 से 5 गुना अधिक ताकतवर 'केंचुआ खाद' तैयार हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. कैसे पहचानें कि गोबर खाद पूरी तरह तैयार है?

तैयार खाद का रंग गहरा काला या भूरा होता है, यह चायपत्ती की तरह भुरभुरी होती है, इसमें से गोबर की बदबू नहीं आती बल्कि सोंधी मिट्टी जैसी महक आती है और छूने पर बिल्कुल ठंडी होती है।

Q2. क्या गोबर की खाद के साथ रासायनिक खाद मिला सकते हैं?

गोबर खाद को खेत की तैयारी में पहले मिलाएं और रासायनिक उर्वरक (जैसे डीएपी/यूरिया) को बुआई के समय सीमित मात्रा में दें। इससे रासायनिक खाद की उपयोग दक्षता (Efficiency) भी 25% तक बढ़ जाती है।

गोबर केवल अपशिष्ट नहीं, बल्कि टिकाऊ खेती का आधारस्तंभ है। वैज्ञानिक पद्धति से तैयार गोबर खाद रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले खर्च को 30 से 40 प्रतिशत तक घटा देती है और मिट्टी को लंबे समय तक उपजाऊ बनाए रखती है। आज ही खुले में गोबर फेंकना बंद करें, वैज्ञानिक गड्ढा विधि अपनाएं और अपनी फसल की उपज व गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव देखें!