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बच्चों की सेहत और विकास के लिए जरूरी हैं ये 5 आदतें, घर से करें शुरुआत

क्या आप जानते हैं कि आपके छोटे बच्चे की सेहत की नींव आपके घर में ही रखी जाती है? अगर आप खुद स्वस्थ आदतें अपनाएंगे, तो वो भी उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बना लेंगे। इस लेख में जानते हैं, कैसे।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 19, 2026

Healthy Habits for Kids

बच्चों के लिए हेल्दी हेबिट्स। (फोटोः एआई)

बच्चों के लिए स्वस्थ जीवनशैली की नींव घर से ही रखी जाती है और इसमें माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है। जब आप खुद स्वस्थ आदतें अपनाते हैं, तो बच्चे भी उन्हें आसानी से सीखते हैं। इस लेख में हम कुछ सरल और असरदार तरीके बताने वाले हैं, जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं और बच्चों में स्वस्थ आदतें डाल सकते हैं।

स्वस्थ भोजन की आदतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बच्चों और किशोरों के लिए संतुलित, विविध और मॉडरेशन पर आधारित आहार बेहद जरूरी है। इसमें पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन स्रोत शामिल होने चाहिए, और फास्ट फूड, अतिरिक्त चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है, जबकि छोटे बच्चों (2–5 वर्ष) को 250 ग्राम और 6–9 वर्ष वालों को 350 ग्राम तक।

भारत में ICMR-NIN (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान) के दिशानिर्देशों में भी यही बात कही गई है: पैकेज्ड, अधिक तेल, नमक, चीनी और एडिटिव्स वाले खाद्य पदार्थों से बचें; संतुलित आहार और खेल-कूद को बढ़ावा दें। आप घर पर सब्जियों को रोटी या पराठे में मिलाकर, या मिल्क-सीरियल में फलों को शामिल करके बच्चों को स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प दे सकते हैं।

शारीरिक सक्रियता और स्क्रीन समय

अमेरिका के CDC (रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र) के अनुसार, 6–17 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए, जिसमें हृदय गति बढ़ाने वाली गतिविधियां, हड्डियों को मजबूत करने वाली (जैसे दौड़ना, कूदना) और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली (जैसे चढ़ना, पुश-अप) शामिल हों। डबल्यूएचओ की गाइडलाइंस भी यही कहती हैं कि बच्चों को सप्ताह में कम से कम 60 मिनट प्रतिदिन सक्रिय रहना चाहिए और सप्ताह में तीन दिन मांसपेशी व हड्डी मजबूत करने वाली गतिविधियां शामिल होनी चाहिए।

स्क्रीन समय सीमित करना भी जरूरी है। सीडीसी बताता है कि अधिक स्क्रीन समय से नींद खराब होती है, वजन बढ़ता है, पढ़ाई पर असर पड़ता है और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसलिए टीवी, मोबाइल या टैबलेट पर बिताया समय घटाकर बच्चों को परिवार के साथ खेल, बातचीत या बाहर की गतिविधियों में शामिल करें।

नींद और दिनचर्या

पर्याप्त नींद बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है। नींद की कमी से भूख बढ़ सकती है और शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है, जिससे मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए एक नियमित सोने-जागने का समय बनाएं और सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग कम करें।

डबल्यूएचओ की एक गाइडबुक बताती है कि घर में एक नियमित दिनचर्या (रूटीन) बच्चों को सुरक्षा और स्थिरता का एहसास देती है, जैसे समय पर उठना, खाना, पढ़ना, खेलना और सोना।

भावनात्मक जुड़ाव और सकारात्मक संवाद

UNICEF (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) की रिपोर्ट बताती है कि 0–2 वर्ष के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार, गले लगाना, आंखों में देखकर बात करना और आसपास की चीजों को नाम बताकर समझाना उनके मस्तिष्क विकास में मदद करता है। 2–4 वर्ष के बच्चों के लिए बातचीत करना, सुनना, दिनचर्या बनाना, खेलना और डिजिटल मीडिया को सीमित करना महत्वपूर्ण है।

स्कूल जाने वाले बच्चों (4–6 वर्ष) के लिए कहानी सुनाना, घर के कामों में शामिल करना, बाहर खेलना और शांतिपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाना जैसे व्यवहार उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाते हैं।

मॉडल बनें: आप जैसा व्यवहार करेंगे, बच्चे वैसा ही सीखेंगे

NIDDK (राष्ट्रीय मधुमेह एवं पाचन एवं गुर्दा रोग संस्थान, अमरीका) कहता है कि माता-पिता खुद स्वस्थ आदतें अपनाएं, जैसे कम चीनी, नमक और वसा वाला भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तो बच्चे भी उन्हें अपनाने लगते हैं। उदाहरण के लिए, आप साथ में चलने जाएं, साइकिल चलाएं या खेलें, इससे बच्चे भी प्रेरित होते हैं।

सरकारी संसाधन और शिक्षा

भारत सरकार की नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने “माय हेल्थ वर्ल्ड” नामक एक गाइडबुक और पिक्टोरियल बुक जारी की है, जो बच्चों और किशोरों में स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित पोषण, शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्क्रीन समय कम करने जैसे विषयों को सरल चित्रों और भाषा में समझाती है। यह स्कूलों, शिक्षकों और माता-पिता के लिए उपयोगी संसाधन है।

इसके अलावा, ICMR-NIN के पोषण अभियान के तहत ई-लर्निंग मॉड्यूल उपलब्ध हैं, जिनमें बेसिक्स ऑफ न्यूट्रिशन, चाइल्ड फीडिंग, फिजिकल एक्टिविटी आदि विषय शामिल हैं। ये रोजमर्रा की जीवनशैली में पोषण संबंधी ज्ञान बढ़ाने में मदद करते हैं।

कब डॉक्टर से सलाह लें

यदि बच्चे का वजन बहुत कम या बहुत अधिक हो, नींद या व्यवहार में अचानक बदलाव हो, या पोषण संबंधी कोई विशेष चिंता हो, तो पेडियाट्रिशियन या पोषण विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। यह लेख डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है; किसी भी गंभीर चिंता पर विशेषज्ञ से संपर्क करें।

जब आप खुद स्वस्थ आदतें अपनाते हैं, तो बच्चे भी उन्हें सहज रूप से सीखते हैं। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, सकारात्मक संवाद और दिनचर्या, ये सभी मिलकर बच्चों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ जीवनशैली की नींव रखते हैं। शुरुआत छोटे कदमों से करें, जैसे एक साथ खाना बनाना, शाम को सैर पर जाना, या सोने से पहले कहानी सुननास ये छोटे बदलाव बड़ा असर डालते हैं।