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नेचर ट्रेल और देसी थाली: भारत में बढ़ रहा ‘हाइकिंग विद लोकल फूड’ का क्रेज

हाइकिंग के साथ पहाड़ों में पारंपरिक चूल्हे के भोजन और लोकल फूड का अनोखा स्वाद चखें। जानिए भारत के प्रमुख फूड-हाइकिंग ट्रेल्स और उनके अनुभव।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 26, 2026

Hiking

स्वाद और सफर का नया संगम (AI)

क्या आपने कभी पगडंडियों पर चलते हुए जंगलों से तोड़ी गई ताजी जड़ी-बूटियों का स्वाद लिया है या किसी पहाड़ी गांव के चूल्हे पर पकी रोटी खाई है? भारत में अब यात्रा केवल मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं, बल्कि रास्ते में मिलने वाले स्थानीय स्वादों को जीने का एक नया अनुभव बन चुकी है।

भारत में पर्यटन की परिभाषा तेजी से बदल रही है। नई पीढ़ी के घुमक्कड़ अब केवल प्राकृतिक नजारों को कैमरे में कैद करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, वे स्थानीय जीवनशैली और भोजन की खुशबू को करीब से महसूस करना चाहते हैं। इसी सोच से उभरा है नया ट्रेंड हाइकिंग और लोकल फूड का संगम। जब आप जंगलों, घाटियों या गांवों के कच्चे रास्तों पर पैदल चलते हैं और दिन के अंत में किसी स्थानीय परिवार के साथ बैठकर उनके पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते हैं, तो वह सफर जीवनभर की याद बन जाता है।

पगडंडियों पर महकता पारंपरिक स्वाद

भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता की तरह यहां की खान-पान परंपरा भी बेहद समृद्ध है। इस नए ट्रेंड के तहत कई क्यूरेटेड प्लेटफॉर्म यात्रियों को ऐसे अनोखे फूड-ट्रेक पर ले जा रहे हैं।

  • कोकण का 'वाइल्ड टेबल' अनुभव: मानसून के दिनों में कोकण के जंगलों और तटीय गांवों में चार दिन की हाइकिंग के दौरान यात्री खुद 'फॉरेजिंग' (जंगल से खाने योग्य मौसमी पत्तियां, मशरूम और फल एकत्र करना) करते हैं। इसके बाद पारंपरिक वुडफायर यानी लकड़ी के चूल्हे पर पकी मालवणी थाली परोसी जाती है।
  • गोवा की जंगल-नदी ट्रेल: सामान्यत: पार्टी डेस्टिनेशन माने जाने वाले गोवा के शांत ग्रामीण इलाके, जैसे सांगोद में, तीन घंटे की नेचर ट्रेल के बाद यात्रियों को ठेठ गोअन घरेलू भोजन कराया जाता है, जिसमें पारंपरिक मसालों और चूल्हे की सौंधी महक होती है।
  • हिमाचल और कुमाऊं का 'चूल्हा कल्चर': हिमाचल के बीड़ और उत्तराखंड की गोला रेंज में खेतों के बीच धीमी वॉक के बाद ग्रामीण घरों में गर्म मडुआ (रागी) की रोटी, भांग की चटनी और स्थानीय कढ़ी परोसी जाती है। वहीं लद्दाख और सिक्किम में 'शक्ति हिमालया' जैसे सफर में गांव के घरों में रुककर ताजे फल, छाछ और लोकल स्नैक्स का आनंद मिलता है।

फूड-हाइकिंग ट्रेल्स: एक नजर में

अनुभव / प्लेटफॉर्मक्षेत्रप्रमुख आकर्षण व स्वाद
वाइल्ड टेबलकोकण (अम्बोली)मानसून फॉरेजिंग, लकड़ी के चूल्हे पर पकी मालवणी थाली
फॉरेस्ट एंड रिवर ट्रेलसांगोद (गोवा)नदी व जंगल ट्रेल, ठेठ ग्रामीण गोअन भोजन
अराउंड द चूल्हाबीड़ (हिमाचल प्रदेश)खेतों में वॉक, हिमाचली सिड्डू व पारंपरिक ब्रूज
शक्ति हिमालयाकुमाऊं, सिक्किम, लद्दाखलग्जरी विलेज वॉक, कुमाऊंनी थाली, जैविक नाश्ता
अनएक्सप्लोर्ड इंडियानीलगिरि, कुल्लूहोमस्टे स्टे, जनजातीय व्यंजन व चाय बगान ट्रेल

फॉरेजिंग और चूल्हे की सौंधी महक

इस तरह के सफर की सबसे बड़ी खासियत है 'फार्म-टू-टेबल' और 'फॉरेस्ट-टू-प्लेट' का अनुभव। जब यात्री खुद देखते हैं कि खाना किस तरह बिना किसी रासायनिक मसाले के, सीधे खेत या जंगल से लाकर मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है, तो भोजन का मूल्य समझ आता है। यह प्रक्रिया शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर एक ठहराव देती है और स्थानीय समुदाय की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है।

सफर की योजना बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • मौसम और मौसमी मेन्यू: बारिश में फॉरेजिंग और सर्दियों में चूल्हे पर पके गर्म भोजन का आनंद सबसे ज्यादा होता है। मौसम के हिसाब से अपनी यात्रा चुनें।
  • फिटनेस स्तर: कई ट्रेल्स आसान होती हैं, जबकि कुछ में 4 से 6 घंटे चलना पड़ सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार रूट चुनें।
  • छोटे समूह: ऐसे टूर्स 8 से 12 लोगों के छोटे ग्रुप में सबसे बेहतरीन अनुभव देते हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति से सीधा जुड़ाव बन सके।

जिम्मेदार पर्यटक बनें

  • स्थानीय भोजन और संस्कृति का आनंद लेते समय पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना बेहद जरूरी है।
  • जंगलों में फॉरेजिंग हमेशा स्थानीय गाइड की देखरेख में ही करें ताकि किसी जहरीली वनस्पति से बचा जा सके।
  • गांवों और जंगलों में सिंगल-यूज प्लास्टिक का कचरा बिल्कुल न छोड़ें।
  • स्थानीय लोगों की निजता, परंपराओं और भोजन से जुड़े नियमों का पूरा सम्मान करें।

हाइकिंग और लोकल फूड का यह संगम केवल पेट भरने की यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय मिट्टी की खुशबू और संस्कृति को अपनी आत्मा में उतारने का जरिया है। अगली बार जब आप पहाड़ों या जंगलों की ओर रुख करें, तो केवल नजारों का दीदार न करें, बल्कि उस माटी के पारंपरिक स्वाद को भी अपनी यात्रा का मुख्य हिस्सा बनाएं।