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Global Agriculture Policy: भारत की खेती पर दुनिया की नीतियों का असर

Global Farming: भारत की कृषि नीति पर वैश्विक व्यापार और पर्यावरण नियमों का असर बढ़ रहा है। जानिए, इससे किसानों, सब्सिडी व्यवस्था और कृषि भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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भारत

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MI Zahir

Aug 26, 2026

Global Agriculture Policy News

वैश्विक नीतियों के बदलते दौर में भारतीय कृषि के सामने चुनौतियां भी हैं और नये अवसर भी। (फोटो: AI.)

भारत की कृषि लंबे समय से केवल खेती तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बदलते वैश्विक बाजार, जलवायु परिवर्तन और व्यापार नियमों के कारण भारत की कृषि नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO), आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) जैसी संस्थाएं समय-समय पर भारत की कृषि सब्सिडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और संसाधनों के इस्तेमाल के बारे में सुझाव देती रही हैं। दूसरी ओर भारत का तर्क है कि बड़ी आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और छोटे किसानों के हितों की रक्षा के लिए समर्थन नीतियां जरूरी हैं।

WTO और कृषि सब्सिडी पर वैश्विक बहस

भारत की चावल और गेहूं खरीद व्यवस्था और MSP नीति को लेकर कुछ विकसित देशों ने WTO मंच पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी समर्थन से अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

वहीं भारत का कहना है कि उसकी कृषि सहायता योजनाएं किसानों की आय सुरक्षा और देश की खाद्य जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक हैं। भारत लगातार यह पक्ष रखता रहा है कि विकासशील देशों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वैश्विक व्यापार नियम बनाए जाने चाहिए।

किसानों के सामने संभावित चुनौतियां

  1. सब्सिडी व्यवस्था पर दबाव

भारत में खाद, बिजली, सिंचाई और कृषि उपकरणों पर मिलने वाली सहायता किसानों की लागत कम करने में मदद करती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सुझाव देती हैं कि इन सब्सिडी को अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

अगर भविष्य में सब्सिडी व्यवस्था में बड़े बदलाव होते हैं तो छोटे और सीमांत किसानों पर इसका असर पड़ सकता है।

  1. पानी और मिट्टी की चुनौती

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए लंबे समय तक भूजल, रासायनिक खाद और सिंचाई पर निर्भरता रही है। इससे कई क्षेत्रों में जल संकट और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

अब टिकाऊ खेती, माइक्रो इरिगेशन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर बढ़ रहा है।

  1. वैश्विक घटनाओं का असर

रूस-यूक्रेन युद्ध, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव ने खाद्यान्न आपूर्ति को प्रभावित किया है। ऐसे घटनाक्रमों का असर कृषि कीमतों, निर्यात और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।

भारत के लिए अवसर भी मौजूद

  1. कृषि निर्यात बढ़ाने का मौका

भारत चावल, मसाले, चाय, कॉफी, समुद्री उत्पाद और कई कृषि वस्तुओं का बड़ा निर्यातक है। बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए भारत वैश्विक कृषि बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।

  1. तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल

डिजिटल कृषि, ड्रोन तकनीक, मौसम आधारित सलाह और बेहतर भंडारण व्यवस्था किसानों की उत्पादकता बढ़ा सकती है।

सरकार की डिजिटल कृषि पहल और ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्म किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कदम हैं।

  1. टिकाऊ खेती की बढ़ती मांग

दुनिया में जैविक खेती, कम रसायन वाली खेती और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ रही है। भारत के किसान इस क्षेत्र में नए बाजार अवसर हासिल कर सकते हैं।

अब आगे की राह क्या है?

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह किसानों के हित, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखे।

भविष्य की कृषि नीति में केवल सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय सिंचाई सुधार, कृषि अनुसंधान, भंडारण, प्रसंस्करण उद्योग और बाजार पहुंच को मजबूत करना होगा।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी है कि उन्हें बेहतर तकनीक, सही मूल्य और नए बाजारों तक पहुंच मिले। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।

कृषि व्यवस्था भविष्य में और मजबूत हो सकती है

बहरहाल, वैश्विक कृषि नीतियों का दबाव भारत के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन यह सुधार और नए अवसरों का रास्ता भी खोल सकता है। यदि भारत किसान हितों की रक्षा करते हुए तकनीक, निर्यात और टिकाऊ खेती पर ध्यान देता है तो उसकी कृषि व्यवस्था भविष्य में और मजबूत हो सकती है।