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व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक ही क्यों खाते हैं, जानिए धार्मिक मान्यता और जरूरी सावधानी

हिंदू व्रत और उपवास में सेंधा नमक के इस्तेमाल की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसे प्राकृतिक और सात्विक माना जाता है, इसलिए फलाहार में सामान्य नमक की जगह इसका इस्तेमाल किया जाता है।
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Adarsh Thakur

Sep 17, 2026

Sendha Namak in Fasting

सांकेतिक इमेजः Gemini

हिंदू धर्म में व्रत और उपवास को केवल खाना छोड़ने की परंपरा नहीं माना जाता। इसे शरीर और मन को संयमित करने से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि व्रत के दौरान भोजन में भी कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है। फलाहार में साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और फलों के साथ सेंधा नमक का इस्तेमाल आम है। लेकिन सवाल यह है कि व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है।

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?

धार्मिक परंपराओं में सेंधा नमक को व्रत के अनुकूल माना गया है। इसे प्राकृतिक चट्टानों से मिलने वाला नमक माना जाता है और कई परंपराओं में इसे सात्विक आहार का हिस्सा माना जाता है। इसी कारण नवरात्रि, एकादशी, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे कई व्रतों में फलाहार बनाते समय सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।

व्रत के दौरान अनाज और कई सामान्य खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता। अलग-अलग व्रतों में नियम भी अलग हो सकते हैं। कुछ व्रतों में नमक का सेवन भी नहीं किया जाता, जबकि फलाहार वाले व्रतों में सेंधा नमक को स्वीकार किया जाता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपनी परंपरा के नियम जानना जरूरी है।

सेंधा नमक और सामान्य नमक में अंतर

सेंधा नमक को रॉक साल्ट भी कहा जाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के अनुसार खाद्य सेंधा नमक खारे पत्थरों से प्राप्त क्रिस्टलीय पदार्थ है और इसमें मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड होता है। यानी इसे केवल इस आधार पर अलग खाद्य पदार्थ नहीं माना जा सकता कि इसमें सोडियम नहीं होता।

सामान्य टेबल नमक को अक्सर शुद्ध करके और कई मामलों में आयोडीन मिलाकर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है। सेंधा नमक प्राकृतिक खनिज चट्टानों से प्राप्त होता है। यही प्राकृतिक स्वरूप धार्मिक परंपराओं में इसे व्रत के लिए उपयुक्त बनाने वाली प्रमुख वजहों में से एक माना जाता है।

सेहत के लिए कितना फायदेमंद है?

सेंधा नमक को लेकर पाचन और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन जैसे कई स्वास्थ्य दावे किए जाते हैं। हालांकि इन दावों में से कई के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे सामान्य नमक से हर स्थिति में अधिक फायदेमंद मानना सही नहीं होगा।

सबसे जरूरी बात यह है कि सेंधा नमक भी नमक ही है और इसमें सोडियम होता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भी भोजन में नमक और सोडियम की मात्रा सीमित रखने की सलाह देता है। ज्यादा सोडियम का सेवन हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम से जुड़ा है।

व्रत में भी मात्रा का रखें ध्यान

व्रत के दौरान कई लोग फलाहार को सामान्य भोजन से ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं। साबूदाना, आलू, कुट्टू या अन्य फलाहारी व्यंजनों में सेंधा नमक ज्यादा डालने से भोजन में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए सेंधा नमक का इस्तेमाल भी सीमित मात्रा में करना बेहतर है।

खासकर हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को व्रत के दौरान खानपान को लेकर डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

आस्था और विज्ञान दोनों को समझना जरूरी

व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ा है। इसकी प्राकृतिक उत्पत्ति के कारण इसे सात्विक माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से सेंधा नमक भी सोडियम का स्रोत है और इसका अधिक सेवन उचित नहीं है।

( डिस्क्लेमरः यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से संपर्क करें।)