18 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

क्या आपके शहर में बारिश का मिज़ाज बदल रहा है? जानें कैसे जलवायु परिवर्तन कर रहा है असर!

Urban Rainfall: जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण भारतीय शहरों में बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। अचानक भारी बारिश और सूखे के इस खतरे से बचने के लिए जानिए जरूरी उपाय।
3 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

Aug 18, 2026

Rain fall News

शहरों में बारिश का मिज़ाज बदल रहा है-कहीं अचानक बाढ़, तो कहीं सूखे की चिंता -यह सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि हमारे शहरों में हो रहे बदलावों की कहानी है। जलवायु परिवर्तन और तेज शहरीकरण ने बारिश का पैटर्न इतना अस्थिर बना दिया है कि आम आदमी भी अब हर मौसम में अनिश्चितता महसूस करने लगा है।

शहरी बारिश का एक नया चेहरा

हाल ही में आई एक अध्ययन रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि भारत के 63 शहरों में पिछले 120 वर्षों में बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव आए हैं। कुछ शहरों में अचानक भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि तटीय शहरों में मानसून और वार्षिक वर्षा में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जल संकट और सूखे का खतरा बढ़ गया है।

शहरीकरण का असर और भारी बारिश की बढ़ती घटनाएं

एक शोध में बताया गया है कि छह राज्यों के छह बड़े शहरों में शहरीकरण के कारण भारी बारिश और मानसूनी वर्षा में वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, मुंबई में भारी बारिश में वार्षिक औसत वृद्धि 18.72 मिमी प्रति वर्ष रही, जबकि आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह केवल 9.50 मिमी प्रति वर्ष रही। यह स्पष्ट संकेत है कि शहरों में निर्माण और कंक्रीट की चादरें बारिश का पैटर्न बदल रही हैं।

मुंबई और कोलकाता में बढ़ती बारिश की प्रवृत्ति

एक अन्य अध्ययन में यह तथ्य पाया गया है कि मुंबई और कोलकाता में बारिश के पैटर्न में तेजी आई है, जो शहरीकरण से जुड़ी जलवायु अस्थिरता का संकेत है।

देशभर में बारिश की असमानता

देश के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ी है, तो कुछ में घट रही है। उदाहरण के लिए, दक्षिणी केरल और गंगा के मैदानों में मानसूनी वर्षा में गिरावट देखी गई है, जबकि मध्य महाराष्ट्र, कर्नाटक के उत्तर और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में बारिश बढ़ी है।

तेज बारिश की घटनाओं में वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सौराष्ट्र-कच्छ, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान, तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, मिजोरम, गोवा और उत्तराखंड में भारी बारिश के दिनों की संख्या में वृद्धि हुई है।

देशव्यापी रुझान: बढ़ती चरम घटनाएं

पूरे भारत में वर्षा की चरम घटनाएं बढ़ रही हैं। मध्य और उत्तरी भारत में पिछले दशकों के दौरान व्यापक भारी बारिश की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं, जिससे बाढ़ और जलभराव की समस्या और गंभीर हो गई है।

छोटे स्तर पर बारिश में वृद्धि

एक अध्ययन के अनुसार, 2012–2022 के दशक में भारत के 55% तहसीलों में मानसूनी वर्षा में 10% से अधिक की वृद्धि हुई है। इनमें राजस्थान, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं। वहीं, कुछ इलाकों-जैसे गंगा के मैदान, पूर्वोत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्र में बारिश में कमी देखी गई है।

शहरी इलाकों में तेज और असंगत बारिश

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के प्रमुख शहरों में तेज बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था अक्सर खराब हो जाती है और फ्लैश फ्लड की स्थिति बन जाती है।

मौसम की अनिश्चितता और मानसून की देरी

इस वर्ष मानसून की शुरुआत देर से हुई, जिससे किसानों और शहरों दोनों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, एल नीनो और बढ़ती गर्मी के कारण बारिश अब असंगत और अचानक होने लगी है-यानी लंबे समय तक बारिश नहीं, बल्कि अचानक भारी बारिश और फिर सूखा।

आपके शहर में क्या हो रहा है?

अगर आप मुंबई, कोलकाता, पुणे या किसी अन्य बड़े शहर में रहते हैं, तो आपको यह समझना जरूरी है कि बारिश का बढ़ना या घटना केवल मौसम की बात नहीं, बल्कि यह शहर की बनावट, हरियाली, जल निकासी और जल प्रबंधन से भी जुड़ा हुआ मामला है।

क्या करें - अगले कदम

शहरों में जलभराव और बाढ़ से बचने के लिए नगर निगमों को जल निकासी सुधारने, हरियाली बढ़ाने और बारिश के पानी को एकत्र करने जैसे उपाय अपनाने होंगे। नागरिकों को भी छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने, गटर साफ रखने और स्थानीय जल प्रबंधन योजनाओं में भाग लेने की आवश्यकता है।

रोजमर्रा के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा सवाल

बहरहाल,शहरों में बारिश का बढ़ना या घटना अब केवल मौसम की बात नहीं रही। यह जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और स्थानीय जल प्रबंधन की कहानी है। आपके शहर में बारिश बढ़ रही है या घट रही है - यह जानना अब सिर्फ मौसम की जानकारी नहीं, बल्कि आपके रोजमर्रा के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।