
भीगी वादियों का लुत्फ़ उठाएं, पर सुरक्षा के इन नियमों को कतई न भुलाएं। (फोटो: AI)
मॉनसून टूरिज़्म (Monsoon Tourism) का आकर्षण हर सैलानी के दिल को छू लेता है। जब तपती गर्मी के बाद आसमान से राहत की फुहारें बरसती हैं, तो पहाड़ों की हरी-भरी वादियां, कल-कल बहते झरने और धुंध की चादर बरबस ही मुसाफ़िरों को अपनी जानिब खींच लेती हैं। लेकिन इस दिलकश मंज़र के पीछे छुपे कुदरती ख़तरों को नज़रअंदाज़ करना किसी भी मुसाफ़िर के लिए भारी पड़ सकता है। लगातार बारिश के सबब अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और फिसलन भरी सड़कें सफ़र के रोमांच को पल भर में मुश्किलात में तब्दील कर देती हैं। इसलिए अगर आप इस मौसम में सैर-सपाटे का इरादा बना रहे हैं, तो मुकम्मल तैयारी और बुनियादी सुरक्षा नियमों की पाबंदी करना निहायत ज़रूरी है।
बारिश के दिनों में घर से निकलने से पहले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा बुलेटिन और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए अलर्ट का संज्ञान ज़रूर लें। यदि किसी पर्वतीय मार्ग पर ‘रेड’ अथवा ‘ऑरेंज’ अलर्ट घोषित किया गया हो, तो अपनी रवानगी को टाल देना ही अक़लमंदी है। अनपेक्षित जलभराव या चट्टानें खिसकने के सबब कई बार रास्ते घंटों बंद रहते हैं। इसलिए यात्रा की योजना में समय का अतिरिक्त बफ़र रखें और होटल की बुकिंग लचीली (रिफंडेबल) नीतियों वाली ही चुनें।
भीगी और कीचड़युक्त सड़कों पर गाड़ियों के पहियों की पकड़ कमज़ोर हो जाती है, जिससे ब्रेक लगाने पर फिसलने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है। वाहन की गति नियंत्रित रखें और आगे चल रही गाड़ी से मुकम्मल फ़ासला बनाए रखें। दृश्यता (विज़िबिलिटी) कम होने पर तुरंत हेडलाइट और फ़ॉग लैंप चालू करें। अनजान जलभराव वाले रास्तों पर गाड़ी उतारने की ग़लती कभी न करें; पानी के नीचे गहरे गड्ढे या टूटे हुए पुलिया के हिस्से छिपे हो सकते हैं। रेलवे स्टेशनों या बस अड्डों पर गीली फ़र्श पर दौड़ने से बचें और सुरक्षा घेरे के पीछे खड़े रहें।
| श्रेणी / पहलू | क्या करें (ज़रूरी हिफ़ाज़त) | क्या न करें (सख़्त मनाही) |
|---|---|---|
| मार्ग व मौसम | सफ़र से पूर्व IMD वेदर अलर्ट व स्थानीय एडवाइज़री जांचें। | चेतावनी वाले बंद या संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर न जाएं। |
| वाहन संचालन | हेडलाइट ऑन रखें, गति सीमित रखें और सुरक्षित दूरी बनाएं। | जलमग्न अज्ञात रास्तों और उफनते रपटों पर वाहन न उतारें। |
| पहनावा व बैग | वाटरप्रूफ़ परिधान, अच्छी ग्रिप वाले जूते व वॉटरटाइट बैग रखें। | फिसलन भरे तलवे वाले फ़ैशनेबल जूते व खुले सैंडल न पहनें। |
| जलस्रोत व नदियां | केवल प्रशासन द्वारा चिन्हित सुरक्षित व्यू-पॉइंट्स पर रुकें। | उफनती नदियों, झरनों और समुद्र की लहरों में तैराकी न करें। |
| खान-पान व सेहत | उबला/फ़िल्टर्ड पानी पिएं, ओआरएस व प्राथमिक दवाएं साथ रखें। | खुले ठेलों का कटा फल, बासी भोजन व दूषित पानी न लें। |
| कुदरती आपदाएं | वज्रपात के समय पक्की छत वाली इमारत या बंद गाड़ी में रुकें। | बिजली चमकते वक़्त ऊंचे पेड़ों के नीचे या खंभों के पास न खड़े हों। |
मॉनसून के दौरान जलजनित और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेज़ी से फैलता है। सफ़र के दौरान खुले ढाबों के बासी खाने और अस्वच्छ पानी के इस्तेमाल से परहेज़ करें। सदैव उबला हुआ या प्रमाणित सीलबंद पानी ही पिएं। अपनी यात्रा किट में उच्च गुणवत्ता वाले वाटरप्रूफ़ रेनकोट, मज़बूत ग्रिप वाले जूते, सिलिका जेल पाउच (इलेक्ट्रॉनिक्स की सुरक्षा के लिए), ज़रूरी दवाइयां और पूरी तरह चार्ज पावर बैंक ज़रूर शामिल करें। आकाशीय बिजली चमकने की सूरत में खुले मैदानों, जलस्रोतों या ऊंचे दरख़्तों के नीचे पनाह लेने से बचें।
बहरहाल,पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ जाना (फ़्लैश फ़्लड) एक आम परिघटना है। अक्सर सैलानी सेल्फ़ी लेने या रोमांच के फेर में उफनती नदियों और तेज़ बहाव वाले झरनों के किनारे चले जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी सूरत में लाइफगार्ड की हिदायतों की अनदेखी न करें। कूर्ग, मुन्नार, ऊटी जैसे सुगम बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्रों अथवा लद्दाख व स्पीति जैसे वृष्टि-छाया (Rain Shadow) क्षेत्रों का चयन बारिश के मौसम में अधिक मुफ़ीद और महफ़ूज़ रहता है।
Updated on:
29 Aug 2026 04:55 pm
Published on:
29 Aug 2026 04:55 pm
