19 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बारिश में विटामिन डी की कमी से कैसे बचें? धूप से डाइट तक जानें जरूरी उपाय

मॉनसून में आपकी सेहत का एक अहम घटक, विटामिन डी पाना मुश्किल हो जाता है। जानिए कैसे कुछ आसान उपायों से आप इसकी कमी को दूर कर सकते हैं और अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Adarsh Thakur

Aug 19, 2026

Monsoon Health Tips

मॉनसून में विटामिन डी कैसे पाएं? (फोटोः एआई)

भारतीय मौसम में विटामिन डी की कमी एक बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट है, खासकर मॉनसून के दौरान जब धूप कम होती है और लोग घरों में अधिक समय बिताते हैं। कुछ सरल, व्यावहारिक उपाय अपनाकर इसे रोका जा सकता है, चाहे आप बच्चे हों, वर्किंग एडल्ट, होममेकर या सीनियर। चलिए जानते हैं, विटामिन डी की कमी को पूरा करने की आसान टिप्स।

सूरज की किरणें: सबसे प्राकृतिक और मुफ्त स्रोत

विटामिन डी का सबसे बड़ा स्रोत है त्वचा द्वारा सूर्य की अल्ट्रावायलेट बी (UVB) किरणों से इसका निर्माण। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच, बिना सनस्क्रीन के, कम से कम 5–30 मिनट तक चेहरे, हाथ और पैर को धूप में रखना पर्याप्त हो सकता है। मॉनसून में धूप कम होने पर यह और भी अहम हो जाता है।

भारतीय त्वचा की विशेषता और जीवनशैली

भारत में विटामिन डी की कमी का कारण सिर्फ धूप की कमी नहीं है। गहरी त्वचा (मेलनिन) UVB किरणों को अवशोषित कर लेती है, जिससे विटामिन डी का निर्माण कम होता है। साथ ही, प्रदूषण, इंडोर जीवनशैली और सांस्कृतिक कारणों से धूप से बचने की प्रवृत्ति भी इसे बढ़ाती है।

खानपान में सुधार: विटामिन डी के स्रोत

प्राकृतिक रूप से विटामिन डी केवल कुछ ही खाद्य पदार्थों में मिलता है, जैसे फैटी फिश (सैल्मन, मैकेरल, टूना), अंडे की जर्दी और मशरूम (UV-प्रक्रिया वाले)। भारतीय थाली में ये कम ही शामिल होते हैं। दूध और डेयरी उत्पादों में विटामिन डी की मात्रा बहुत कम होती है, जब तक कि वे फोर्टिफाइड न हों।

फोर्टिफिकेशन: एक जनहित उपाय

भारत में कुछ खाद्य पदार्थों जैसे वनस्पति घी को विटामिन डी से फोर्टिफाइड किया गया है, लेकिन यह व्यापक नहीं है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि दूध, आटा, दालडा, दही, और चावल के आटे जैसे आम खाद्य पदार्थों में विटामिन डी फोर्टिफिकेशन को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल किया जाए।

फोर्टीफाइड (Fortified) उन खाद्य पदार्थों को कहा जाता है, जिनमें स्वास्थ्य सुधार और पोषण की कमी को दूर करने के लिए परिरक्षण या निर्माण के दौरान बाहर से आवश्यक विटामिन, खनिज (मिनरल्स) या अन्य पोषक तत्व कृत्रिम रूप से मिलाए जाते हैं।

सप्लीमेंटेशन: कब और कैसे लें

भारत में विटामिन डी की कमी बहुत आम है। भारतीय एंडोक्राइनोलॉजिस्टों के एक समूह ने सामान्य वयस्कों के लिए 25(OH)D स्तर को 40–60 ng/mL (100–150 nmol/L) बनाए रखने की सलाह दी है।
– वयस्कों में कमी के इलाज के लिए: 60,000 IU (इंटरनेशनल यूनिट) चोलेकैल्सिफेरॉल प्रति सप्ताह 12 हफ्ते, फिर मासिक 60,000 IU।
– बच्चों में: 1–3 वर्ष के लिए 600 IU/दिन, 4–10 वर्ष के लिए 600–1,000 IU/दिन।
– किशोरों को धूप में 30–45 मिनट बिना सनस्क्रीन के रहने की सलाह है; सामान्य स्थिति में सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं।
– बुजुर्गों में: हर 90 दिन में 100,000 IU या रोजाना 4,000 IU सुरक्षित और प्रभावी है।

मॉनसून में विशेष सावधानियां

मॉनसून में धूप कम और घर में समय बढ़ने से विटामिन डी की कमी का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान:
– रोजाना थोड़ी धूप लेने की कोशिश करें, जैसे बालकनी या छत पर।
– विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, मशरूम, और यदि संभव हो तो फैटी फिश शामिल करें।
– डॉक्टर से सलाह लेकर सप्लीमेंट लेना समझदारी है, खासकर यदि पहले से कमी की पुष्टि हो।

कब डॉक्टर से मिलें

यदि किसी को हड्डियों में दर्द, कमजोरी, बार-बार गिरने की समस्या, या थकान जैसी शिकायतें हैं, तो डॉक्टर से 25(OH)D स्तर की जांच कराएं। यह लेख डॉक्टर का विकल्प नहीं है, किसी भी सप्लीमेंट या इलाज से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

आगे का कदम

धूप, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंटेशन, ये तीनों उपाय मिलकर विटामिन डी की कमी को रोकने में मदद कर सकते हैं। मॉनसून में थोड़ी सतर्कता और नियमितता से आप और आपके परिवार की हड्डियां मजबूत और स्वास्थ्य बेहतर रह सकता है।

(मेडिकल डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। किसी भी सप्लीमेंट या उपचार से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।)