
PM नरेंद्र मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात (इमेज सोर्स- Chatgpt)
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में सोमवार को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इनमें सबसे अहम मुलाकात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से रही। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस साल फरवरी में शुरू हुए ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने मुलाकात थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि भारत अपने व्यापक कूटनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर पक्षों को युद्ध से बातचीत की मेज पर लाने में मदद करे। ईरानी पक्ष के बयान के हवाले से आई खबरों में पेजेश्कियान ने अमेरिका पर कूटनीतिक रास्ता छोड़कर बल-प्रयोग को तरजीह देने का आरोप लगाया।
पेजेश्कियान से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के हर प्रयास का समर्थन जारी रखेगा। इस दौरान पीएम ने सभी मसलों को बातचीत व कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों, नागरिक ढांचे और मालवाहक जहाज़ों की सुरक्षा तथा नौवहन की स्वतंत्रता की अहमियत भी रेखांकित की। दोनों नेताओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और चाबहार बंदरगाह सहयोग पर भी बातचीत हुई।
अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम के बावजूद पीएम मोदी ने पेजेश्कियान से कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ व्यापार के दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहता है। मोदी ने पेजेश्कियान को नई दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित भी किया। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने ईरान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती को विभिन्न क्षेत्रों में और मज़बूत करने के संकल्प को दोहराया है।
पीएम मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान से भी द्विपक्षीय मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पोस्ट में बताया कि दोनों नेताओं ने रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इसके साथ ही पश्चिम एशिया सहित क्षेत्रीय व वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए। आर्मेनियाई समाचार एजेंसी आर्मेनप्रेस के अनुसार, पशिन्यान ने मोदी को आर्मेनिया-अज़रबैजान शांति समझौते की प्रगति के बारे में जानकारी दी।
जून में हुए आर्मेनिया के संसदीय चुनावों में पशिन्यान की दोबारा नियुक्ति के बाद यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात थी। मोदी ने पहले ही उन्हें चुनावी जीत पर बधाई दी थी। भारत ने आर्मेनिया को 26 दिसंबर 1991 को मान्यता दी थी और रक्षा क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ रहा है। आर्मेनिया ने भारत से स्वाति रडार, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसे उपकरण खरीदे हैं।
एससीओ समिट के दौरान भारत का ध्यान वैकल्पिक कनेक्टिविटी मार्गों पर भी रहा। पीएम मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात करीब 7,200 किलोमीटर लंबे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) को आगे बढ़ाने के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। यह कॉरिडोर मुंबई को ईरान के रास्ते रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है और भीड़भाड़ वाले पारंपरिक समुद्री मार्गों का विकल्प देता है।
एससीओ समिट से पहले सोमवार सुबह पीएम मोदी ने बिश्केक स्थित महात्मा गांधी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस प्रतिमा का अनावरण खुद पीएम मोदी ने 2015 में अपनी किर्गिस्तान यात्रा के दौरान किया था। इस मौके पर मोदी ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने किर्गिस्तान के उन स्थानीय नागरिकों के एक समूह से भी भेंट की जो भारत से जुड़े रहे हैं। इनमें योग फेडरेशन के अध्यक्ष, शिक्षाविद और शोधकर्ता शामिल थे, जिन्होंने भारत के साथ अपने सांस्कृतिक और योग संबंधी जुड़ाव को साझा किया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक 26वें SCO शिखर सम्मेलन में 10 सदस्य देश, 15 पार्टनर देश और दो पर्यवेक्षक देश शामिल हो रहे हैं। भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है। समिट के दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और किर्गिज राष्ट्रपति सद्यर झापारोव से भी अलग-अलग बैठकें कीं।
Updated on:
01 Sept 2026 05:15 pm
Published on:
01 Sept 2026 05:15 pm
