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राजस्थान की पहली महिला फुटबॉलर मुन्नी भांभू के सफर से जानें, गांव की लड़कियां कैसे बदल रही हैं खेल का भविष्य!

क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण गांव की लड़की अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकती है? मुन्नी भांभू की प्रेरणादायक यात्रा यह साबित करती है कि सपने सच हो सकते हैं, जब मेहनत और सही मार्गदर्शन का साथ हो!
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 14, 2026

Rajasthan women footballer story

प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT

राजस्थान की पहली महिला फुटबॉलर मुन्नी भांभू अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मुन्नी की कहानी में हम जानेंगे कि कैसे एक युवा खिलाड़ी ने राज्य की सीमाओं से निकलकर देश और दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है और यह सब कैसे एक नए युग की शुरुआत है।

मुन्नी भांभू की अंतरराष्ट्रीय उड़ान

धिंगसरी, राजस्थान की रहने वाली मुन्नी भांभू ने SAFF अंडर‑19 महिला चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह राजस्थान की पहली महिला फुटबॉलर हैं, जिन्होंने इतने वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि राजस्थान में महिला फुटबॉल के लिए एक प्रेरणादायक मोड़ भी है।

जमीन से आसमान तक: मुन्नी की यात्रा

मुन्नी ने अपनी फुटबॉल यात्रा MSR अकादमी से शुरू की, जहां उन्होंने गोलकीपर के रूप में प्रशिक्षण लिया। इस अकादमी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और SAFF U‑19 महिला चैंपियनशिप में चयन का मार्ग प्रशस्त किया। यह सफर बताता है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कैसे एक खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकता है।

फुटबॉलर मुन्नी ने इससे पहले भारत की U-14 और U-17 टीमों के लिए भी शानदार खेल दिखाया है। नेपाल के पोखरा में हुई SAFF U-19 प्रतियोगिता में उन्होंने भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभाई।

राजस्थान की फुटबॉल संरचना में बदलाव

राजस्थान में फुटबॉल के विकास में कई संस्थाओं ने अहम भूमिका निभाई है। Zinc Football Academy ने पांच जिलों में मुफ्त कोचिंग के माध्यम से हजारों बच्चों को स्काउट किया और सैकड़ों को प्रशिक्षित किया है। यह पहल AIFF 3‑स्टार अकादमी के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसमें तकनीकी‑आधारित F‑Cube तकनीक का उपयोग होता है।

इसी तरह, Royal Football Club, Jaipur ने U‑15 राजस्थान लीग जीतकर AIFF अंडर‑16 यूथ लीग 2026 के लिए क्वालीफाई किया और राज्य की टीम को सेंटोष ट्रॉफी क्वार्टर‑फाइनल तक पहुंचाया। इन दोनों संस्थाओं ने स्थानीय प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

एक और उभरता नाम: संजू राजवी

MSR अकादमी से ही एक और नाम उभरकर सामने आया है - संजू राजवी, जिन्हें हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय टीम के कैंप में बुलाया गया है। यह चयन राजस्थान के लिए एक और गर्व का पल है और बताता है कि राज्य में फुटबॉल के लिए संभावनाएं कितनी बढ़ रही हैं।

राजस्थान से अंतरराष्ट्रीय तक - क्या बदल रहा है?

इन उपलब्धियों से साफ दिखता है कि राजस्थान में फुटबॉल अब सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक संभावनाओं का रास्ता बन रहा है।

  • महिला फुटबॉल में मुन्नी भांभू ने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
  • Zinc और Royal FC जैसी संस्थाओं ने आधारभूत संरचना और प्रशिक्षण में सुधार किया है, जिससे खिलाड़ी बेहतर मंच पा रहे हैं।
  • संजू राजवी जैसे युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर सही समय पर सही कोचिंग और अवसर मिले, तो किसी भी खिलाड़ी की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। स्कूल और कॉलेज के खिलाड़ी, खासकर राजस्थान से, यह देख सकते हैं कि फुटबॉल में करियर बनाने के लिए अब रास्ते खुल रहे हैं। उन्हें चाहिए कि वे स्थानीय अकादमियों से जुड़ें, नियमित अभ्यास करें, और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें।

मुन्नी भांभू और संजू राजवी जैसे खिलाड़ियों की सफलता से यह उम्मीद जगती है कि आने वाले समय में और खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में जगह बनाएंगे। राजस्थान में फुटबॉल के लिए बेहतर सुविधाएं और कोचिंग नेटवर्क का विस्तार हो रहा है। यदि यह रफ्तार बनी रहे, तो राज्य से आने वाले खिलाड़ी आने वाले वर्षों में और बड़े मंचों पर चमकेंगे।

इस तरह, राजस्थान का फुटबॉल अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नया अध्याय लिख रहा है।