
Pyar ki Ganga Bahe on independence day india: AI Creative
Pyar ki ganga bahe song: साल 1990 के दशक की शुरुआत में बना यह गीत उस समय के हिंदी सिनेमा के बड़े सितारों को एक साथ लेकर आया था। खास बात यह थी कि इसमें केवल बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भारतीय फिल्म उद्योगों के कलाकार भी दिखाई दिए। सलमान खान, आमिर खान, अनिल कपूर, गोविंदा, जैकी श्रॉफ, ऋषि कपूर और नसीरुद्दीन शाह जैसे नामों के साथ रजनीकांत, चिरंजीवी, ममूटी, प्रोसेनजीत चटर्जी और सचिन पिलगांवकर भी इसका हिस्सा बने।
इस गीत के पीछे की कहानी आज के समय में इसे और खास बना देती है। निर्देशक सुभाष घई के मुताबिक, बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश का माहौल बेहद तनावपूर्ण था। सांप्रदायिक हिंसा की खबरों के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से उनसे संपर्क किया गया और पूछा गया कि क्या फिल्म उद्योग भाईचारे और शांति का संदेश देने के लिए एक साथ आ सकता है। घई ने हामी भरी और फिर गीतकार जावेद अख्तर के साथ मिलकर इस विचार को गीत का रूप दिया। यही वजह है कि यह सामान्य फिल्मी गीत नहीं था। इसका मकसद मनोरंजन से ज्यादा एकता, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश लोगों तक पहुंचाना था।
गीत की सबसे भावुक तस्वीरों में आज के कई बड़े सितारे बच्चों के रूप में नजर आते हैं। जैकी श्रॉफ की गोद में नन्हे टाइगर श्रॉफ, अनिल कपूर के साथ छोटी सोनम कपूर और ऋषि कपूर के साथ बाल कलाकार के रूप में रणबीर कपूर दिखाई देते हैं। सुभाष घई ने बाद में बताया था कि वह संदेश केवल उस समय के दर्शकों तक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी तक भी पहुंचाना चाहते थे। आज पीछे मुड़कर देखें तो इन तीनों बच्चों की मौजूदगी इस गीत को और दिलचस्प बना देती है। उस वक्त कोई नहीं जानता था कि कैमरे के सामने नजर आने वाले ये बच्चे आगे चलकर हिंदी सिनेमा के चर्चित नाम बनेंगे।
'प्यार की गंगा बहे' को मोहम्मद अजीज, उदित नारायण, मनहर उधास और जॉली मुखर्जी ने अपनी आवाज दी थी। संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था। सुभाष घई ने इस गीत को केवल मुंबई तक सीमित नहीं रखा। दक्षिण भारतीय सिनेमा से रजनीकांत, चिरंजीवी और ममूटी जैसे सितारे जुड़े, जबकि बंगाली और मराठी सिनेमा की मौजूदगी प्रोसेनजीत चटर्जी और सचिन पिलगांवकर के जरिए दिखाई दी। इस तरह गीत की तस्वीर में भारत के अलग-अलग फिल्मी क्षेत्रों की झलक भी नजर आई।
इस गीत की शूटिंग किसी सामान्य फिल्मी गाने की तरह एक ही जगह पर पूरी नहीं हुई थी। इसका एक हिस्सा सुभाष घई की फिल्म 'सौदागर' के सेट पर शूट किया गया। कुछ कलाकारों ने अपने-अपने शूटिंग स्थानों पर हिस्से रिकॉर्ड किए, जिन्हें बाद में संपादन के जरिए एक साथ जोड़ा गया। यानी स्क्रीन पर जो एकजुटता दिखाई देती है, उसके पीछे तकनीकी तौर पर भी काफी अलग तरह की मेहनत थी। और सबसे खास बात—सुभाष घई के अनुसार, इस संदेश के लिए शामिल हुए कलाकारों ने कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था।
तीन दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी 'प्यार की गंगा बहे' की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है। इसकी वजह केवल इसमें नजर आने वाले बड़े सितारे नहीं हैं। इसकी असली ताकत वह विचार है जिसके लिए ये सभी कलाकार एक साथ आए थे। आज जब 15 अगस्त पर देशभक्ति गीतों की सूची तैयार होती है, तब यह गीत हमें याद दिलाता है कि देशभक्ति केवल तिरंगा लहराने या राष्ट्रगान गाने तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों, भाषाओं और समुदायों के बीच भरोसा और भाईचारा बनाए रखना भी उसी भावना का हिस्सा है।
शायद यही कारण है कि 1990 के दशक का यह पुराना गीत हर स्वतंत्रता दिवस के आसपास फिर सामने आ जाता है। चेहरों पर वक्त की परत चढ़ गई, कई सितारे आज हमारे बीच नहीं हैं और उस दौर के बच्चे अब खुद बड़े सितारे बन चुके हैं, लेकिन गीत का संदेश अब भी वही है। 'प्यार की गंगा बहे' इसलिए पुराना नहीं हुआ, क्योंकि इसका विषय किसी एक दौर का नहीं था। यह उस भारत की बात करता है जिसे हर पीढ़ी को फिर से जोड़ना पड़ता है।
Updated on:
14 Aug 2026 02:21 pm
Published on:
14 Aug 2026 02:21 pm
