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पति और पत्नी के बीच ये 9 छोटी आदतें बढ़ा सकती हैं नाराजगी, वजह को समझ कर रिश्तों को बनाएं बेहतर

क्या आपको पता है कि छोटी-छोटी आदतें कैसे बड़े झगड़ों का कारण बन सकती हैं? जानें वो आसान तरीके, जो आपके रिश्ते में शांति और समझ लाने में मदद कर सकते हैं।
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Adarsh Thakur

Sep 17, 2026

Husband Wife Relationship

सांकेतिक इमेजः ChatGPT

पति-पत्नी के रिश्ते में छोटी छोटी बातों पर मतभेद होना सामान्य है। घर के काम, खर्च, समय, मोबाइल का इस्तेमाल, परिवार के दूसरे सदस्यों से जुड़ी बातें या एक दूसरे से उम्मीदें कई बार बहस की वजह बन जाती हैं। लेकिन जब ऐसी छोटी बातें बार बार दोहराई जाएं और बातचीत का तरीका सही न हो तो रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है। रिश्तों पर हुए शोध भी बताते हैं कि समस्या केवल विवाद होने की नहीं होती, यह भी महत्वपूर्ण है कि दोनों साथी असहमति के दौरान किस तरह बात करते हैं।

1. हर बात में कमी निकालना

अगर किसी साथी को लगातार यह महसूस हो कि उसकी कोशिशों को महत्व नहीं मिल रहा और हर काम में कमी निकाली जा रही है तो नाराजगी बढ़ सकती है। किसी खास काम पर शिकायत करना अलग बात है, लेकिन व्यक्ति के स्वभाव या चरित्र पर टिप्पणी करना बातचीत को ज्यादा तनावपूर्ण बना सकता है। रिश्तों पर काम करने वाले विशेषज्ञ आलोचना के बजाय किसी खास व्यवहार पर बात करने की सलाह देते हैं।

2. बार बार पुराने झगड़े याद दिलाना

एक नई बहस में सालों पुरानी गलतियों को जोड़ देना समस्या को बड़ा बना सकता है। किसी एक मुद्दे पर बात करने के बजाय पुराने मामलों की पूरी सूची सामने आने से दोनों पक्ष अपनी बात समझाने के बजाय खुद को बचाने में लग सकते हैं।

3. बात बात पर तुलना करना

पति या पत्नी की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से करना या यह कहना कि दूसरे लोग ज्यादा जिम्मेदार हैं, ज्यादा कमाते हैं या ज्यादा ध्यान रखते हैं, रिश्ते में असुरक्षा पैदा कर सकता है। तुलना की जगह अपनी वास्तविक जरूरत स्पष्ट तरीके से बताना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

4. बातचीत के दौरान मोबाइल में व्यस्त रहना

जब एक साथी अपनी बात कह रहा हो और दूसरा लगातार फोन देख रहा हो तो उसे अनदेखा किए जाने का अहसास हो सकता है। बातचीत में ध्यान देना रिश्ते के लिए महत्वपूर्ण है। मनोवैज्ञानिक शोध में भी साथी की बात सुनने, उसकी भावनाओं को समझने और उसे महत्व देने को स्वस्थ रिश्ते की महत्वपूर्ण विशेषताओं में गिना जाता है।

5. हर फैसले पर नियंत्रण रखने की कोशिश

पैसे, दोस्तों, परिवार, बाहर जाने या रोजमर्रा के फैसलों में केवल एक व्यक्ति की बात चलने लगे तो दूसरे साथी को दबाव महसूस हो सकता है। स्वस्थ रिश्ते में महत्वपूर्ण फैसलों पर दोनों की राय सुनना जरूरी होता है।

6. गुस्से में चुप्पी साध लेना

बहस के दौरान कुछ समय शांत रहना ठीक है, लेकिन समस्या से बचने के लिए लंबे समय तक बातचीत बंद कर देना रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे मनोविज्ञान में Withdrawal या Stonewalling जैसे व्यवहारों से जोड़ा जाता है।

अगर गुस्सा बहुत ज्यादा हो तो थोड़ी देर का विराम लिया जा सकता है और पहले शांत होने के बाद बातचीत दोबारा शुरू की जा सकती है।

7. घर की जिम्मेदारियों को लेकर अस्पष्टता

घर के काम, बच्चों की देखभाल, खरीदारी और परिवार से जुड़े काम अगर स्पष्ट रूप से बांटे न जाएं तो एक साथी को लग सकता है कि सारी जिम्मेदारी उसी पर है। इससे छोटी शिकायत धीरे-धीरे बड़े विवाद में बदल सकती है।

8. निजी बातों को दूसरों के सामने रखना

पति पत्नी के बीच हुई निजी बहस को दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने बताना भरोसे को प्रभावित कर सकता है। किसी गंभीर समस्या में भरोसेमंद व्यक्ति या विशेषज्ञ की मदद लेना अलग बात है, लेकिन हर छोटी बहस को सार्वजनिक चर्चा बनाना रिश्ते के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

9. साथी की अच्छी बातों को नजरअंदाज करना

रिश्ते में केवल शिकायतें याद रखने से नकारात्मकता बढ़ सकती है। 2026 के एक अध्ययन में पाया गया कि जोड़े जब अपने साथ बिताए अच्छे पलों को जानबूझकर याद करते और उनकी सराहना करते हैं, तो रिश्ते से संतुष्टि और भविष्य को लेकर भरोसा अधिक पाया गया। साथ ही संवाद से जुड़े विवाद कम रिपोर्ट हुए।

बहस होना गलत नहीं, तरीका महत्वपूर्ण है

मनोवैज्ञानिक शोध के अनुसार असहमति किसी भी रिश्ते का सामान्य हिस्सा हो सकती है। समस्या तब बढ़ती है जब बातचीत में लगातार अपमान, व्यक्तिगत आरोप, चिल्लाना या एक दूसरे से दूरी बनाने जैसे व्यवहार शामिल हो जाते हैं।

इसलिए किसी एक साथी की आदतों को दोष देने के बजाय दोनों को यह देखना चाहिए कि विवाद के दौरान उनकी बातचीत कैसी रहती है। आरोप लगाने की जगह अपनी परेशानी बताना, सामने वाले की बात सुनना और जरूरत पड़ने पर थोड़ी देर रुककर शांत होने के बाद बातचीत करना रिश्ते में तनाव कम करने में मदद कर सकता है। अगर विवाद लगातार बढ़ रहा हो, डर या हिंसा की स्थिति हो या दोनों खुद समस्या सुलझाने में असमर्थ महसूस करें तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।