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रोज 80 मिनट कम सोना भी बढ़ा सकता है वजन, नई रिसर्च में सामने आया नींद और मोटापे का कनेक्शन

नई रिसर्च में संकेत मिला है कि लंबे समय तक सामान्य से करीब 80 से 90 मिनट कम सोने पर वजन और ऊर्जा संतुलन प्रभावित हो सकता है। कम नींद भूख से जुड़े हार्मोन और कैलोरी सेवन पर असर डाल सकती है।
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Adarsh Thakur

Sep 17, 2026

Sleep Deprivation Weight Gain

सांकेतिक इमेजः ChatGPT

अगर आप रोज देर रात तक जागते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते हैं तो यह आदत थकान बढ़ाने के साथ ही वजन पर भी असर डाल सकती है। 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार कुछ हफ्तों तक सामान्य से कम नींद लेने पर शरीर के वजन और ऊर्जा संतुलन में बदलाव हो सकता है। शोध में करीब 1.5 घंटे की नींद कम करने का असर देखा गया। यह लगभग 80 से 90 मिनट की कमी के बराबर है।अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च की है।

80 मिनट कम नींद का क्या असर दिखा

नए शोध में 2 पहले किए गए नियंत्रित अध्ययनों के आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण किया गया। इसमें 6 सप्ताह तक हर रात लगभग 1.5 घंटे नींद कम करने के प्रभाव को देखा गया। शोधकर्ताओं ने शरीर के वजन और ऊर्जा संतुलन से जुड़े बदलावों का अध्ययन किया।

रिपोर्ट में नींद सीमित रखने वाले लोगों में औसतन करीब 1 पाउंड यानी लगभग 0.45 किलो वजन बढ़ने की बात सामने आई। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति की नींद 80 मिनट कम होते ही उसका वजन निश्चित रूप से बढ़ जाएगा। वजन पर खानपान, शारीरिक गतिविधि, उम्र, दवाएं और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों का भी असर पड़ता है।

कम नींद से भूख क्यों बढ़ सकती है

नींद और भूख के बीच शरीर के हार्मोन का संबंध होता है। पर्याप्त नींद न मिलने पर भूख से जुड़े हार्मोन घ्रेलिन और लेप्टिन के संतुलन पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार कम नींद से घ्रेलिन बढ़ सकता है और लेप्टिन कम हो सकता है। इससे भूख ज्यादा लग सकती है और पेट भरा होने का संकेत कमजोर महसूस हो सकता है।

यही वजह है कि देर रात तक जागने वाले लोगों में अनजाने में अतिरिक्त कैलोरी लेने की संभावना बढ़ सकती है। पुराने नियंत्रित अध्ययनों में नींद की कमी के दौरान अधिक कैलोरी लेने और देर रात खाने की प्रवृत्ति देखी गई है।

नींद कम होने पर कैलोरी सेवन बढ़ सकता है

एक अन्य अध्ययन में अधिक वजन वाले ऐसे वयस्कों को शामिल किया गया जो सामान्य तौर पर 6.5 घंटे से कम सोते थे। जब उनकी नींद औसतन करीब 1.2 घंटे बढ़ाई गई तो रोजाना कैलोरी सेवन में लगभग 270 कैलोरी की कमी देखी गई। इस अध्ययन से यह संकेत मिला कि नींद सुधारने से भोजन की मात्रा पर भी असर पड़ सकता है।

इसका एक कारण यह हो सकता है कि कम नींद में व्यक्ति को दिन के साथ साथ रात में भी खाने के ज्यादा मौके मिलते हैं। इसके अलावा थकान की वजह से शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है।

कितनी नींद जरूरी है

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार 18 से 64 वर्ष के वयस्कों को आम तौर पर 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए 7 से 8 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।

नियमित रूप से 7 घंटे से कम नींद लेने और अधिक वजन के बीच संबंध भी पाया गया है। कम नींद से भूख और भोजन की पसंद पर असर पड़ सकता है।

सिर्फ नींद सुधारना ही पर्याप्त नहीं

वजन नियंत्रित रखने के लिए केवल ज्यादा सोना पर्याप्त नहीं है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद तीनों महत्वपूर्ण हैं। नींद की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो वजन के अलावा ब्लड शुगर, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक सतर्कता पर भी असर पड़ सकता है।

अगर पर्याप्त समय सोने के बावजूद लगातार थकान रहती है, बार बार नींद टूटती है या तेज खर्राटे और सांस रुकने जैसी समस्या होती है तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

( डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। आवश्यकता पड़ने पर और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लें।)