
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
आमतौर पर मानसून के सीजन में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों को सांप भारत में ही काटते हैं? लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के सेंटर फॉर स्नेकबाइट रिसर्च एंड इंटरवेंशंस के शोधकर्ताओं का एक नया अध्ययन 25 अगस्त 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल PLoS मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इस अध्यन के मुताबिक भारत में हर साल करीब 13 लाख लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं। यह आंकड़ा दुनिया में किसी भी देश से सबसे ज्यादा है। शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष दुनिया के 79 देशों में जनवरी 2007 से मार्च 2025 तक उपलब्ध सर्पदंश से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर निकाला है।
शोध अध्ययन के मुताबिक, पूरी दुनिया में हर साल करीब 70 लाख सर्पदंश की घटनाएं होती हैं, जिनमें से करीब 75% मामले सिर्फ 20 देशों में दर्ज होते हैं। इन देशों में भारत के अलावा नाइजीरिया, इंडोनेशिया, ब्राजील, वियतनाम और चीन जैसे देश शामिल हैं। भारत के बाद सबसे ज्यादा सर्पदंश के मामलों वाले तीन देश हैं। नाइजीरिया (करीब 6.66 लाख), इंडोनेशिया (करीब 4.90 लाख) और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (करीब 4.67 लाख)। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दुनियाभर में सर्पदंश से हर साल करीब 2.74 लाख से 5.13 लाख लोगों की मौत हो सकती है।
अध्ययन बताता है कि सर्पदंश का सबसे ज्यादा असर गरीब और कम संसाधन वाले देशों पर पड़ता है। सहारा रेगिस्तान के दक्षिण में स्थित अफ्रीकी देशों (सब-सहारन अफ्रीका) में दुनिया के करीब 45% सर्पदंश के मामले सामने आते हैं। वहां होने वाली मौतों की संख्या भी अनुपातिक रूप से काफी अधिक है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस क्षेत्र में सर्पदंश की समस्या दक्षिण एशिया की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा गंभीर है। इसकी बड़ी वजह चिकित्सा सुविधाओं, खासकर विषरोधी दवा (एंटीवेनम) की कमी बताई गई है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2017 में सर्पदंश को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों (नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज) की सूची में शामिल किया था और 2019 में 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों व दिव्यांगता को आधा करने का लक्ष्य तय किया था।
भारत में सर्पदंश की गंभीरता कोई नई बात नहीं है। इससे पहले मिलियन डेथ स्टडी पर आधारित एक शोध (सुरवीरा एवं अन्य, 2020) ने अनुमान लगाया था कि भारत में 2000 से 2019 के बीच औसतन हर साल करीब 58,000 लोगों की मौत सर्पदंश से हुई। 2015 में देश में करीब 11 लाख से 17.7 लाख सर्पदंश की घटनाएं हुई थीं। यानी नए अध्ययन का 13 लाख का आंकड़ा पुराने अनुमानों के आसपास ही बैठता है।
हालांकि अलग-अलग अध्ययनों की कार्यप्रणाली अलग होने से आंकड़ों में मामूली अंतर रहता है। पुराने शोध के अनुसार करीब 70% मौतें आठ अधिक प्रभावित राज्यों में होती हैं, और आधी मौतें मानसून के मौसम के दौरान दर्ज होती हैं। भारत दुनिया की करीब आधी सर्पदंश मौतों के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है, जिससे डब्ल्यूएचओ के 2030 के वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने में भारत की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
भारत सरकार ने भी सर्पदंश की समस्या की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कदम उठाने शुरू किए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 मार्च 2024 को सर्पदंश विषाक्तता की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPSE) शुरू की थी। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों को आधा करना है। इसके बाद नवंबर 2024 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर सर्पदंश के मामलों व मौतों को राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत अधिसूचित रोग (नोटिफायबल डिजीज) घोषित करने को कहा, ताकि निगरानी तंत्र मजबूत हो सके।
कर्नाटक इस दिशा में पहला राज्य बना, जहां फरवरी 2023 में सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित किया गया। इसका असर भी तुरंत दिखा, राज्य में दर्ज मामले 2023 के 6,596 मामलों (19 मौतें) से बढ़कर 2024 में 13,235 मामलों (100 मौतें) तक पहुंच गए, जो दर्शाता है कि पहले सर्पदंश के मामलों की भारी अंडररिपोर्टिंग हो रही थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्पदंश से होने वाली अधिकतर मौतें रोकी जा सकती हैं। बशर्ते पीड़ित को समय पर एंटीवेनम उपलब्ध हो सके। भारत में ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण इलाकों में, खेतों में काम करने के दौरान या रात में घर के भीतर होती हैं, जहां अस्पताल पहुंचने में देरी सबसे बड़ी चुनौती बनती है। मानसून के मौसम में विशेष रूप से सतर्क रहने, रात में टॉर्च का इस्तेमाल करने, घर के आसपास साफ-सफाई रखने और सर्पदंश होने पर बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचने की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार देते रहे हैं।
Updated on:
28 Aug 2026 07:39 pm
Published on:
28 Aug 2026 07:39 pm
