
Expressways in UP : यूपी में कुल कितने एक्सप्रेस-वे।
उत्तर प्रदेश लंबे समय तक देश के उन राज्यों में गिना जाता था जहां आबादी तो बहुत थी, लेकिन तेज और आधुनिक सड़क नेटवर्क की कमी आर्थिक विकास की राह में बड़ी बाधा मानी जाती थी। दिल्ली से पूर्वी उत्तर प्रदेश या बुंदेलखंड तक यात्रा करने में कई घंटे लग जाते थे, माल परिवहन महंगा पड़ता था और निवेशकों के लिए भी कनेक्टिविटी एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन पिछले डेढ़ दशक में तस्वीर तेजी से बदली है। आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क विकसित करने वाला राज्य बन चुका है।
यमुना एक्सप्रेस-वे से शुरू हुई यह यात्रा अब गंगा एक्सप्रेस-वे तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में कई एक्सप्रेस-वे चालू हैं, कुछ निर्माणाधीन हैं और कई परियोजनाएं योजना के चरण में हैं। यही वजह है कि आज उत्तर प्रदेश को “एक्सप्रेस-वे स्टेट” भी कहा जाने लगा है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एक्सप्रेस-वे सामान्य सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) से अलग होता है।एक्सप्रेस-वे ऐसी सड़क होती है जहां वाहनों के प्रवेश और निकास को नियंत्रित किया जाता है। बीच में गांव, कस्बों या शहरों के लिए सीधे कट नहीं होते। सड़क पर चौराहे, ट्रैफिक सिग्नल या रेलवे क्रॉसिंग नहीं होती। वाहनों की गति अधिक रहती है और लंबी दूरी की यात्रा कम समय में पूरी की जा सकती है।
यही कारण है कि एक्सप्रेस-वे को आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। विकसित देशों में औद्योगिक विकास और सड़क नेटवर्क का सीधा संबंध देखा गया है।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 7 प्रमुख एक्सप्रेस-वे संचालित हैं। इनके अलावा कई परियोजनाएं निर्माणाधीन और प्रस्तावित हैं।
| एक्सप्रेस-वे | लंबाई (लगभग) |
|---|---|
| नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे | 25 किमी |
| यमुना एक्सप्रेस-वे | 165 किमी |
| आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे | 302 किमी |
| पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे | 341 किमी |
| बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे | 296 किमी |
| गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे | 91 किमी |
| गंगा एक्सप्रेस-वे | 594 किमी |
इन एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई लगभग 1,800 किलोमीटर से अधिक है, जो किसी भी राज्य के लिए एक बड़ा नेटवर्क माना जाता है।
यूपी में एक्सप्रेस-वे की शुरुआत कैसे हुई? : उत्तर प्रदेश में आधुनिक एक्सप्रेस-वे युग की शुरुआत यमुना एक्सप्रेस-वे से मानी जाती है।
दिल्ली-एनसीआर को आगरा से जोड़ने वाला 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेस-वे 2012 में शुरू हुआ था। इस सड़क ने दिल्ली से आगरा की यात्रा का समय लगभग आधा कर दिया। इस परियोजना ने यह साबित किया कि तेज रफ्तार सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं, बल्कि उनके आसपास औद्योगिक, रियल एस्टेट और व्यावसायिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ती हैं।
यमुना एक्सप्रेस-वे के बाद सबसे बड़ा बदलाव आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के रूप में आया। करीब 302 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश को जोड़ता है। इसके बनने से लखनऊ और आगरा के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया।
यह एक्सप्रेस-वे इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसकी आपातकालीन हवाई पट्टी पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ का प्रदर्शन किया गया था।
पूर्वी उत्तर प्रदेश लंबे समय तक विकास की दौड़ में पीछे माना जाता था। इस क्षेत्र में उद्योग कम थे और सड़क संपर्क भी सीमित था।ऐसे में 341 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे महत्वपूर्ण परियोजना साबित हुआ।
यह लखनऊ को सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर जैसे जिलों से जोड़ता है। इसके बनने से पूर्वी उत्तर प्रदेश को राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बेहतर कनेक्टिविटी मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेस-वे के कारण पूर्वांचल क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से सूखा, पलायन और आर्थिक पिछड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। करीब 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे चित्रकूट को इटावा क्षेत्र से जोड़ता है और आगे यमुना एक्सप्रेस-वे तथा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से संपर्क स्थापित करता है।
इस परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क बनाना नहीं था, बल्कि बुंदेलखंड को औद्योगिक और रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना भी था। इसी क्षेत्र में रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Corridor) विकसित किया जा रहा है।
गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक बड़ा शहर है। हालांकि यह सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर नहीं था। इस समस्या को दूर करने के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया गया, जो गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ता है। लगभग 91 किलोमीटर लंबी यह सड़क पूर्वी यूपी के कई जिलों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाती है।
अगर किसी एक परियोजना ने यूपी के एक्सप्रेस-वे नेटवर्क को नई पहचान दी है, तो वह गंगा एक्सप्रेस-वे है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज तक जाता है। यह वर्तमान में उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे है। इस मार्ग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह सड़क कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और यात्रियों की आवाजाही को तेज करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
इस सवाल का जवाब काफी हद तक 'हां' है। दुनिया भर में निवेशक उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं जहां सड़क, बिजली और परिवहन की बेहतर व्यवस्था हो। उत्तर प्रदेश में भी कई औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक हब और वेयरहाउसिंग परियोजनाएं एक्सप्रेस-वे के आसपास विकसित हो रही हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे के आसपास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) और कई औद्योगिक परियोजनाएं इसका उदाहरण हैं।
लंबाई और संख्या दोनों के लिहाज से उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी बढ़त बनाई है। दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी उत्कृष्ट एक्सप्रेस-वे हैं, लेकिन एक ही राज्य में इतने बड़े पैमाने पर फैला नेटवर्क उत्तर प्रदेश को अलग पहचान देता है।
गंगा, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, आगरा-लखनऊ और यमुना जैसे एक्सप्रेस-वे मिलकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ते हैं, जिससे पश्चिमी, मध्य, पूर्वी और बुंदेलखंड क्षेत्र एक साझा परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं।
Updated on:
15 Aug 2026 10:25 am
Published on:
15 Aug 2026 10:25 am
