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कम जमीन, कम खर्च और ज्यादा फायदा: जानिए मेथी की खेती का पूरा गणित

किसान भाइयों, सीमित जमीन से भी लाखों कमाने का सपना सच हो सकता है। मेथी की खेती जल्दी तैयार होती है और आपके छोटे निवेश को भी बड़ा मुनाफा बना सकती है। इस लेख में जानिए कैसे...
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 15, 2026

Fenugreek Farming

मेथी की खेती से अच्छी कमाई कैसे करें? (फोटोः एआई)

सर्दियों में ताजी मेथी(fenugreek) की बाजार में अच्छी मांग रहती है और इसकी खेती कम लागत में जल्दी तैयार हो जाती है। ऐसे में छोटे किसानों के लिए मेथी (फेनुग्रीक) एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरती है, जो सीमित जमीन और संसाधनों में भी अच्छी आमदनी दे सकती है। आइए इस लेख में समझते हैं. मेथी की खेती का पूरा गणित।

मेथी की खासियत यह है कि यह जल्दी तैयार हो जाती है। जमशेदपुर के किसान रामकुमार कुशवाहा ने केवल तीन कट्ठा जमीन पर 2000 रुपये की शुरुआती लागत से मेथी की खेती शुरू की। उन्होंने बताया कि बीज बोने के 25–30 दिन बाद पहली कटाई हो जाती है और इसके बाद हर 8–10 दिन में नई पत्तियां उग आती हैं। इससे लगातार आय का स्रोत बनता है।

कम लागत, बेहतर मुनाफा

एक अन्य अध्ययन में बताया गया है कि एक एकड़ में मेथी की खेती पर कुल खर्च लगभग 9,000–11,000 रुपये आता है, जबकि शुद्ध मुनाफा 40,000–52,000 रुपये तक हो सकता है। यह छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है, क्योंकि सीमित निवेश में अच्छी आमदनी संभव होती है।

राजस्थान में तकनीकी सुधार से लाभ

राजस्थान के आदिवासी इलाकों में फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (FLD) के माध्यम से मेथी की खेती में सुधार लाया गया। इस तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों की आमदनी बढ़ी। सामान्य खेती में जहां सकल आमदनी लगभग 37,597 रुपये थी, वहीं यह तकनीक अपनाने पर यह बढ़कर 54,022 रुपये हो गई। यह दिखाता है कि वैज्ञानिक तरीके अपनाने से उत्पादन और मुनाफा दोनों में सुधार होता है।

फसल प्रणाली में मेथी का योगदान

बीज मसालों पर आधारित फसल प्रणाली में मेथी का स्थान महत्वपूर्ण है। एक अध्ययन में पाया गया कि मेथी, धनिया और अन्य मसालों को रबी सीजन में शामिल करने से लाभ-लागत अनुपात बेहतर होता है। उदाहरण के लिए, मेथी-धनिया-मूंगफली आधारित प्रणाली का लाभ-लागत अनुपात लगभग 2.92 था, जो इसे आर्थिक रूप से आकर्षक बनाता है।

सरकारी सहायता से बढ़ता अवसर

बिहार सरकार ने मानसून सीजन में मेथी की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपये तक की सहायता देने की योजना शुरू की है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और मसाला उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में है। इस तरह की योजनाएं छोटे किसानों के लिए खेती की लागत कम करने और जोखिम घटाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

खेती की चुनौतियां और सावधानियां

मेथी की खेती में कुछ चुनौतियां भी हैं। पान मेथी (हरी पत्तियां) जल्दी खराब हो जाती हैं, इसलिए कटाई के बाद तुरंत बाजार पहुंचाना आवश्यक है। इसके अलावा, बीज की लागत और सिंचाई की आवश्यकताएं भी ध्यान देने योग्य हैं। वैज्ञानिक मार्गदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता से इन चुनौतियों को कम किया जा सकता है।

छोटे किसान कैसे आगे बढ़ें?

  • वैज्ञानिक तकनीक अपनाएंः जैसे बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई और रोग-नियंत्रण, जिससे उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं।
  • बार-बार कटाई का लाभ उठाएंः पहली कटाई 25–30 दिन में, और फिर हर 8–10 दिन में नई पत्तियां।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ लेंः जैसे बिहार की 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता।
  • ताजी पत्तियों को समय पर मंडी या स्थानीय बाजार में बेचेंः पान मेथी जल्दी खराब होती है, इसलिए ताजगी बनाए रखना जरूरी है।
  • समूह में काम करेंः जैसे क्लस्टर मॉडल, जिससे लागत साझा हो और विपणन बेहतर हो सके।

आगे क्या बदल सकता है?

यदि किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, तो मेथी की खेती से उनकी आय में स्थिरता और वृद्धि संभव है। छोटे किसान सीमित संसाधनों में भी इस फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। किसान समूह बनाकर या सहकारी संस्थाओं के माध्यम से विपणन (मार्केटिंग) और तकनीकी सहायता को मजबूत कर सकते हैं।