
सांकेतिक इमेज (सोर्स-gemini)
आज के समय में जब युवा उद्यमी और छोटे व्यवसायी नए-नए विचारों को आकार देने की कोशिश कर रहे हैं, तो NGO से मिलने वाली फंडिंग एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है। यह साधारण निवेश से अलग होती है। यह अक्सर गैर-लाभकारी उद्देश्य से जुड़ी होती है और स्टार्टअप को सामाजिक या पर्यावरणीय प्रभाव के साथ आगे बढ़ने में मदद करती है। आइए समझते हैं कि नए स्टार्टअप्स के लिए किस प्रकार फंडिंग मिल सकती है?
एनजीओ या सेक्शन 8 कंपनियां, जो समाज में बदलाव लाने वाले स्टार्टअप्स को समर्थन देती हैं। ऐसी कंपनियां और संगठन अक्सर CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड, विदेशी फाउंडेशन ग्रांट, और सरकारी सामाजिक नवाचार कार्यक्रमों के माध्यम से फंडिंग प्रदान करते हैं।
उदाहरण के लिए, Tata Trusts, Azim Premji Foundation, Bill & Melinda Gates Foundation जैसी संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को फंड देती हैं। इसके अलावा, NEEV Startup Kickstart Program, Pre‑Incubation Cohort 2026 जैसे CSR‑लिंक्ड कार्यक्रम शुरुआती चरण के संस्थापकों को समर्थन देते हैं। ISGBB जैसे कार्यक्रम तकनीकी समाधान वाले सामाजिक चुनौतियों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को फंड करते हैं।
सरकार द्वारा संचालित सामाजिक नवाचार कार्यक्रमों और विदेशी फाउंडेशन द्वारा दी जाने वाली फंडिंग भी महत्वपूर्ण है। “Fund for Innovation in Development जैसे कार्यक्रम गरीबी और असमानता से लड़ने वाले नवाचारों को गैर-डिल्यूटिव ग्रांट (वापसी नहीं) देते हैं, जिनकी राशि ₹45 लाख से ₹36 करोड़ तक हो सकती है। इसी तरह DIV Fund Grant for Global Development Innovations, ₹1.8 करोड़ से ₹13.5 करोड़ तक की राशि प्रदान करता है।
इसके अलावा NGO Funds India जैसे डायरेक्टरी प्लेटफॉर्म पर MCL Seed Grant 2026 के तहत NIT Rourkela के FTBI में इनक्यूबेटेड तकनीकी स्टार्टअप्स को ₹3 लाख तक का ग्रांट मिलता है। SheConnects Digital Accelerator India 2026 जैसे कार्यक्रम महिलाओं की डिजिटल समावेशन से जुड़े गैर-लाभकारी प्रयासों को ₹85 लाख से ₹4.2 करोड़ तक का समर्थन देते हैं।
एनजीओ को सरकारी ग्रांट पाने के लिए आमतौर पर 2 साल का अनुभव, वित्तीय स्थिरता, और 10% तक की अपनी हिस्सेदारी दिखानी होती है। आवेदन प्रक्रिया में आय-व्यय विवरण, ऑडिटर रिपोर्ट, वार्षिक रिपोर्ट, बजट, लाभार्थियों का विवरण, पंजीकरण प्रमाणपत्र आदि दस्तावेज शामिल होते हैं। आवेदन आमतौर पर संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकार के माध्यम से भेजा जाता है। सरकारी e‑ANUDAAN पोर्टल के माध्यम से भी एनजीओ ग्रांट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पहले NGO‑Darpan पर पंजीकरण अनिवार्य है।
कुछ स्टार्टअप्स, जैसे कि Karya, ने एक ऐसा मॉडल अपनाया है जहां एक गैर-लाभकारी इकाई और एक लाभ-उन्मुख इकाई दोनों साथ काम करते हैं। लाभ-उन्मुख इकाई अपनी कमाई का एक हिस्सा गैर-लाभकारी इकाई को देती है, जिससे कर्मचारियों का वेतन और संगठन की स्थिरता बनी रहती है। यह मॉडल विशेष रूप से तब काम आता है जब एनजीओ मॉडल पूरी तरह से फाउंडेशन ग्रांट पर निर्भर हो और बाजार से आय सीमित हो।
एनजीओ से मिलने वाली फंडिंग अक्सर गैर-डिल्यूटिव होती है, यानी स्टार्टअप की हिस्सेदारी कम नहीं होती। यह सामाजिक उद्देश्य वाले स्टार्टअप्स के लिए आदर्श है। लेकिन इसके साथ कुछ सावधानियां भी हैं।
यदि आपका स्टार्टअप सामाजिक या पर्यावरणीय बदलाव पर केंद्रित है, तो NGO से फंडिंग एक मजबूत विकल्प हो सकता है। लेकिन यदि आपका उद्देश्य शुद्ध व्यावसायिक लाभ है, तो पारंपरिक निवेश जैसे एंजल या वेंचर कैपिटल बेहतर हो सकते हैं। यदि आप इस रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो पहले अपने स्टार्टअप को एक सामाजिक उद्देश्य के साथ स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। फिर उपयुक्त फंडिंग स्रोतों की सूची बनाएं, जैसे CSR फाउंडेशन, विदेशी ग्रांट, सरकारी सामाजिक नवाचार कार्यक्रम। इसके बाद, आवश्यक पंजीकरण (जैसे 12A, 80G, FCRA) और दस्तावेज तैयार करें, और NGO Funds India या TrustNGO Labs StartupHub जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवसरों को देखें।
Updated on:
30 Aug 2026 09:36 pm
Published on:
30 Aug 2026 09:36 pm
