
मरूधरा के नाम से विख्यात बीकानेर शहर में एक ओर धोरे की जगह कंकरीट का जाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के चारों तरफ बनेा डंपिंग स्टेशन सौन्दर्य पर दाग लगा रहे हैं। गंदगी और पर्याावरण की अनदेखी से ना केवल वायुमंडल प्रदूषित हो रहा वरन पृथ्वी भी पॉलीथ्रिन और अपशिष्टों से बंजर हो रही है। विश्व पृथ्वी दिवस पर बड़ी बिल्डिंगों के उजले पक्ष का दूसरा पहलु दर्शाते दृश्य।

मरूधरा के नाम से विख्यात बीकानेर शहर में एक ओर धोरे की जगह कंकरीट का जाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के चारों तरफ बनेा डंपिंग स्टेशन सौन्दर्य पर दाग लगा रहे हैं। गंदगी और पर्याावरण की अनदेखी से ना केवल वायुमंडल प्रदूषित हो रहा वरन पृथ्वी भी पॉलीथ्रिन और अपशिष्टों से बंजर हो रही है। विश्व पृथ्वी दिवस पर बड़ी बिल्डिंगों के उजले पक्ष का दूसरा पहलु दर्शाते दृश्य।

मरूधरा के नाम से विख्यात बीकानेर शहर में एक ओर धोरे की जगह कंकरीट का जाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के चारों तरफ बनेा डंपिंग स्टेशन सौन्दर्य पर दाग लगा रहे हैं। गंदगी और पर्याावरण की अनदेखी से ना केवल वायुमंडल प्रदूषित हो रहा वरन पृथ्वी भी पॉलीथ्रिन और अपशिष्टों से बंजर हो रही है। विश्व पृथ्वी दिवस पर बड़ी बिल्डिंगों के उजले पक्ष का दूसरा पहलु दर्शाते दृश्य।

मरूधरा के नाम से विख्यात बीकानेर शहर में एक ओर धोरे की जगह कंकरीट का जाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के चारों तरफ बनेा डंपिंग स्टेशन सौन्दर्य पर दाग लगा रहे हैं। गंदगी और पर्याावरण की अनदेखी से ना केवल वायुमंडल प्रदूषित हो रहा वरन पृथ्वी भी पॉलीथ्रिन और अपशिष्टों से बंजर हो रही है। विश्व पृथ्वी दिवस पर बड़ी बिल्डिंगों के उजले पक्ष का दूसरा पहलु दर्शाते दृश्य।